प्रवासी राजस्थान में लगाएंगे उद्योग, मिलेगा अपने ही क्षेत्र में रोजगार

कई प्रवासी अपने इलाके में ही बिजनस स्थापित करने की सोच रहे है। यदि ऐसा हुआ तो आसपास के क्षेत्र के लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा, क्योंकि लाकडाउन ने कई लोगों की रोजी-रोटी व नौकरियां छीन ली है। प्रवासियों की अपनी जन्मभूमि पर बिजनस का विस्तार क्षेत्र के लोगों को नई संजीवनी देगी।

By: Ashok Rajpurohit

Published: 17 Jun 2020, 04:21 PM IST

चेन्नई. कोविड-19 के चलते पैदा हुए हालात के चलते कई लोगों के रोजगार छीन गए तो कई कल-कारखाने रूग्ण हालात में पहुंच गए। राजस्थान से दक्षिणी राज्यों में बरसों से रोजगार के लिए आकर बिजनस में झंडे गाडऩे वाले प्रवासियों को अब खुद अपनी मिट्टी भाने लगी हैं और कई प्रवासी अपनी जन्मभूमि में उद्योग लगाने में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं। इससे स्थानीय क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सकेगा। कोरोना महामारी के बीच लाकडाउन के चलते अधिकांश प्रवासी अपने गृह क्षेत्र लौट चुके हैं। कई प्रवासी अपने इलाके में ही बिजनस स्थापित करने की सोच रहे है। यदि ऐसा हुआ तो आसपास के क्षेत्र के लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा, क्योंकि लाकडाउन ने कई लोगों की रोजी-रोटी व नौकरियां छीन ली है। प्रवासियों की अपनी जन्मभूमि पर बिजनस का विस्तार क्षेत्र के लोगों को नई संजीवनी देगी।
अब जन्मभूमि छोडऩे के इच्छुक कम
कई प्रवासी ऐसे हैं जो वापस दक्षिणी राज्यों में नहीं जाना चाहते और अपनी जन्मभूमि पर ही छोटा-मोटा रोजगार करने के इच्छुक बताए जाते हैं। बाहर से अपने गृह क्षेत्र लौटे कई गरीब व मजदूर वर्ग अपने ही इलाके में मनरेगा के काम में लग चुके हैं। प्रवासियों का दक्षिण भारत में दो शताब्दियों से आना-जाना है। अब कोरोना के चलते हालात कुछ बदलने की संभावनाएं दिख रही हैं। ऐसे में प्रवासी जरूरत व मांग के अनुसार राजस्थान में ही लघु व मध्यम दर्जे के उद्योग स्थापित करने की योजना पर काम करने लगे हैं। पिछले दिनों सरकार ने भी प्रवासियों को अपने इलाके में उद्योग लगाने पर हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया था।
केन्द्र का स्कील डवलपमेन्ट योजना पर विचार
हालांकि केन्द्र ने भी कोविड-19 के बने हालात के चलते कुछ ऐसी ही योजना तैयार की है जिसमें स्कील डवलपमेन्ट के तहत काम किया जाएगा। इससे केन्द्र की इस योजना का स्थानीय क्षेत्र के लोग फायदा उठा सकेंगे और उन्हें अपने ही इलाके में काम मिल जाएगा। इस योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए केन्द्र लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के साधन मुहैया कराएगा। इसके लिए आंकड़े मंगवाने शुरू किए हैं।
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सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मिलेगा रोजगार
मेरा चेन्नई में बिजनस हैं। इसके अलावा हैदराबाद एवं मुम्बई में भी व्यवसाय है। अब मैं मेरे गांव बासड़ा धनजी में बीस बीघा जमीन पर मकानों का निर्माण शुरू करुंगा। साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सुमेरपुर में तीन सौ फ्लेट बन रहे हैं। इससे सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकेगा। दक्षिणी प्रदेशों से लौटे श्रमिकों को काम मिल सकेगा। साथ ही दुकानों पर काम कर रहे लोगों को भी जरूरत के हिसाब से नौकरी मिल सकेगी। इसके अलावा कृषि भूमि के एक बड़े भूभाग पर अनार के पौधे लगाने की योजना हैं और इससे बड़ी संख्या में किसानों को रोजगार मिल सकेगा। कोविड-19 के चलते पैदा हुए हालात के कारण कई लोग बेरोजगार हो चुके हैं और इन प्रोजेक्ट के शुरू होने से लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
- शिवनाथसिंह राजपुरोहित, जालोर जिले के बासड़ा धनजी गांव के निवासी।
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किसानों व श्रमिकों को मिलेगा फायदा
मेरा चेन्नई में गिरवी व ज्वैलरी का व्यवसाय है। मैंने कुछ समय पहले ही जोधपुर जिले के बापिणी तहसील के पूनासर गांव में श्री पंचमुखी बालाजी जिनिंग कपास मिल शुरू की है। आसपास के किसानों से कपास इकट्ठी कर यहां रूई के धागे के लिए गांठ तैयार की जाती है और जिसे अन्य शहरों में भेजा जाता है। फिलहाल यहां 32 मशीनें लगाई गई हैं। इससे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को रोजगार मिल रहा है। इसका जल्द और विस्तार कर आसपास के क्षेत्र के किसानों, श्रमिकों एवं अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। पिछले कुछ समय से नागौर जिले के खींवसर, मेड़ता व आसपास के क्षेत्र में ऐसी दर्जनों उद्योग स्थापित हो चुके है। कपास की मांग बढऩे से आसपास के किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकेगी। इससे लोगों को रोजगार मिलने से उनका जीवन स्तर ऊपर उठ सकेगा।
- हुकमाराम गोदारा, नागौर जिले के कुड़छी गांव के रहने वाले।
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