राजस्थान के लाल, कर गए कमाल

Mukesh Sharma

Publish: Sep, 09 2017 09:09:00 (IST)

Chennai, Tamil Nadu, India
राजस्थान के लाल, कर गए कमाल

यहां स्थित अफसर प्रशिक्षण अकादमी में राजस्थान के कई युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर लेफ्टिनेंट बन गए हैं। इन लेफ्टिनेंट बनने वाले राजस्थान मूल के युवाओं से

चेन्नई।यहां स्थित अफसर प्रशिक्षण अकादमी में राजस्थान के कई युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर लेफ्टिनेंट बन गए हैं। इन लेफ्टिनेंट बनने वाले राजस्थान मूल के युवाओं से राजस्थान पत्रिका ने अपने अनुभव बांटे।

प्रशिक्षण ने बदल दी जीवन की दिशा

बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव रमणिया के रहने वाले रमेश कुमार राजुपरोहित परिवार के ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने भारतीय वायु सेना में सीधे कमीशन पाया है। परिवार बेंगलूरु में होने के कारण उनकी शिक्षा भी वहीं हुई। वे रमैया कालेज बेंगलूरु से बीबीएम की डिग्री लेने के बाद भारतीय थल सेना में सीधे लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुए एवं एनसीसी में सी सर्टिफिकेट हासिल किया है। उनकी घुड़सवारी में खासी रुचि रही है। लेफ्टिनेंट का प्रशिक्षण पूरा करने पर उनका कहना है कि प्रशिक्षण कठिन जरूर था लेकिन इससे बहुत कुछ सीखने को मिला है। प्रशिक्षण ने जीवन की दिशा ही बदल दी है। शारीरिक एवं मानसिक रूप से काफी मजबूती मिली है। चेन्नई के गर्म मौसम में जरूर कठिनाई हुई लेकिन प्रशिक्षण के बाद जीवन में बहुत बदलाव भी दृष्टिगोचर हो रहा है। उनके पिता हनुमानसिंह राजपुरोहित बेंगलूरु में कपड़े का व्यवसाय करते हैं व माता गीता देवी गृहिणी है। बड़े भाई कपिल वहीं एक निजी कंपनी में कार्यरत है। छोटी बहन पूजा पढ़ाई कर रही है।

नम्रता बनी बालिकाओं के लिए मिसाल

पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रही चितौड़ मूल की नम्रता शेखावत भारतीय सेना में लेफ्ंिटनेेंट बनकर देश सेवा के लिए तैयार है। उन्होंने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर से बीए (आनर्स) व एमए किया और दोनों में ही स्वर्णपदक हासिल किया। इस विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा निदेशालय के प्रमुख पद से सेवाविृत्त डा. लोकेन्द्रंिसंह शक्तावत की पुत्री नम्रता ने लेफ्टिनेंट के प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन को जीवन में उतारा तो समय प्रबंधन के गुर सीखे। कालेज शिक्षा के दौरान एनसीसी का सी सर्टिफिकेट पाया। उनकी बड़ी बहन हेतल के पति धीरेन्द्रसिंह कर्मसोत मेजर के पद पर कार्यरत है व छोटी बहन नेतल जोधपुर की जीत इन्स्टीट्यूट से बीटेक (आईटी) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद बेंगलूरु में डेलोइट कंपनी में आईटी इंजीनियर के पद पर कार्यरत है।

पांचवीं बार में मिला सीधा प्रवेश

राजस्थान के योगेन्द्रसिंह राठौड़ ने पांचवें प्रयास में लेफ्टिनेंट में सीधे एन्ट्री की है। चार बार परीक्षा में *****फल रहने के बावजूद हार नहीं मानते हुए पांचवीं बार परीक्षा में पास हो गए। लेफ्टिनेंट का प्रशिक्षण पूरा करने पर वे कहते हैं वे सेवानिवृत्त कर्नल नाथूसिंह शेखावत की प्रेरणा से ही आज लेफ्टिनेंट बन पाए हैं। उनके नाना सवाईसिंह शेखावत सूबेदार मेजर रहे हैं। उन्होंने जयपुर में माहेश्वरी सीनियर सेकण्डरी स्कूल से स्कूली शिक्षा लेकर एस.एस. जैन सुबोध पीजी कालेज से बीएससी की डिग्री ली। उनका कहना है प्रशिक्षण से आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा है। अकादमी में रहते क्रास कंट्री, 40 किमी चलना, लम्बी कूद, निशानेबाजी समेत कई स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। पिता स्वरूपसिंह राठौड़ जयपुर में एक निजी फर्म में कंसल्टेन्ट व माता संतोष कंवर गृहिणी हैं।



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