अतिरिक्त फीस वसूली तो मान्यता होगी रद्द

मद्रास उच्च न्यायालय सख्त

By: PURUSHOTTAM REDDY

Published: 24 Jul 2018, 10:30 PM IST

मदुरै. शिक्षा के अनिवार्य अधिकार कानून के तहत अगर कोई स्कूल अधिक फीस वसूल करता है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। मद्रास उच्च न्यायालय के मदुरै खण्डपीठ ने मंगलवार को यह बात कही।
उच्च न्यायालय में राजू नाम के व्यक्ति ने याचिका दायर की कि तमिलनाडु के निजी विद्यालय आरटीई कानून के तहत भर्ती होने वाले विद्यार्थियों से अधिक फीस वसूल रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी की न्यायिक बेंच ने मंगलवार को सुनवाई में कहा कि अगर कोई स्कूल विद्यार्थियों से अधिक फीस वसूलता है तो उसकी मान्यता रद्द हो सकती है। विशेषकर आरटीई के तहत दाखिला प्राप्त विद्यार्थियों के साथ यह आचरण होता है तो ऐसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आरटीई के तहत छह से चौदह वर्ष तक के किशोरों को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। यह हक उनको हासिल है इसे सुनिश्चित करना केंद्र व राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

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जयललिता की बॉयोलॉजिकल पुत्री का मामला

दावाकर्ता अमृता के दस्तावेज झूठे : सरकार

चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय में मंगलवार को सरकार ने कहा कि स्वर्गीय जे. जयललिता की पुत्री होने का दावा करने वाली अमृता नाम की महिला ने जो दस्तावेज पेश किए हैं वे झूठे हैं।
बेंगलूरु की अमृता नाम की महिला ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है कि उनको जयललिता की बॉयोलॉजिकल (जैविक) पुत्री घोषित किया जाए। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार के मुख्य अभियोजक ने दलील दी कि अमृता का कहना है कि उसका जन्म १४ अगस्त १९८० को हुआ। लेकिन उनके पास इस तारीख से एक महीने पहले आयोजित हुए कार्यक्रम का वीडियो है जिसमें जयललिता हैं।
सरकार के द्वारा पेश शपथ पत्र में अमृता के सभी दावों को झुठलाया गया। सरकार का कहना था कि जयललिता की सम्पत्ति हासिल करने की चाहत में अमृता उनकी बेटी होने की दावेदारी पेश कर रही है। सरकार के शपथ पत्र को स्वीकार करने के साथ ही दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। अदालत ने फैसला अगले सप्ताह तक स्थगित कर दिया है।

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एम्स निर्माणाधीन इमारत की सीबीआई निगरानी की आवश्यकता नहीं

मदुरै. मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने माना कि तोप्पूर में बन रहे ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एआईआईएमएस) के भवन निर्माण को सीबीआई द्वारा निगरानी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया और याचिका खारिज कर दी। याचिका में मांग की गई थी कि प्राधिकरण निर्माण कार्य में तेजी लाए। याची का आरोप है कि हाल ही में प्रस्तावित एआईआईएमएस की इमारत का निर्माण कार्य काफी धीमा चल रहा है। याची ने निर्माणाधीन अस्पताल में तमिलनाडु के डॉक्टरों के लिए ३५ प्रतिशत आरक्षण की मांग पर भी कोर्ट ने हैरानी जताई।

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