अभिभावक स्कूल फीस भरने के लिए स्वतंत्र अभिभावकों को मजबूर करने वाली संस्थाओं पर है प्रतिबंध: राज्य सरकार

राज्य सरकार ने मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट को सूचित किया कि अभिभावक अपने इच्छानुसार बच्चों के कॉलेज और स्कूल का फीस भर सकते हैं और उनको मजबूर करने वाली संस्थाओं पर प्रतिबंध है

By: Vishal Kesharwani

Updated: 30 Jun 2020, 05:25 PM IST


-मद्रास हाईकोर्ट को दी जानकारी
चेन्नई. राज्य सरकार ने मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट को सूचित किया कि अभिभावक अपने इच्छानुसार बच्चों के कॉलेज और स्कूल का फीस भर सकते हैं और उनको मजबूर करने वाली संस्थाओं पर प्रतिबंध है। एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने बताया कि ऐसे शिक्षण संस्थानों के लिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत (आरटीई) आवंटित 25 प्रतिशत सीटों के प्रतिपूर्ति के लिए राज्य सरकार ने पहले ही 248. 79 करोड़ की मंजूरी दे दी है। इस राशि के साथ शिक्षण संस्थान कम से कम दो से तीन महीने तक अपने प्रबंधन को जारी रख सकते हैं। सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान स्कूलों को अभिभावकों से जबरन फीस वसूली करने पर लगाए गए प्रतिबंध पर निजी शिक्षण संस्थानों समेत अन्य एसोसिएशनों द्वारा याचिका दायर कर मद्रास हाईकोर्ट में दी गई चुनौती पर सुनवाई के दौरान नारायण ने यह जानकारी दी। न्यायाधीश आर. महादेवन के समक्ष सुनवाई की गुहार लगाई गई तो एडवोकेट जनरल ने कहा लॉकडाउन अवधि के दौरान शुल्क माफ नहीं किया गया है बल्कि समय के अनुसार संस्थानों को पैसा मिल जाएगा।

 

लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुए अभिभावकों की समस्याओं को भी देखना जरूरी है। इस संकटकाल के दौरान काफी लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। प्रस्तुति को सुनने के बाद न्यायाधीश ने शिक्षण संस्थानों को शुल्क का संग्रह करने के लिए एक फार्मूला के साथ एक विस्तृत प्रतिनिधित्व बनाने का निर्देश दिया। लॉकडाउन से प्रभावित जनता की समस्याओं को देखते हुए शिक्षण संस्थान या तो किस्त या किसी अन्य तरीके से फीस प्राप्त करने पर विचार करें। साथ ही कोर्ट ने राज्य को जल्द से जल्द प्रतिनिधित्व पर विचार कर आगामी 6 जुलाई तक कोर्ट को जवाब देने का निर्देश दिया।

Corona virus
Show More
Vishal Kesharwani
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned