scriptrice | टिप्पणीः चावल तस्करों से निपटना चुनौती | Patrika News

टिप्पणीः चावल तस्करों से निपटना चुनौती

चावल तस्करों से निपटना चुनौती
टिप्पणी

चेन्नई

Updated: December 18, 2021 11:19:14 pm

चेन्नई. सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए जरूरतमन्द लोगों को दिया जाने वाला चावल गरीबों का निवाला न बनकर तस्करों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन चुका है। तमिलनाडु में गरीबों के लिए शुरू की गई निःशुल्क व सस्ती चावल उपलब्ध कराने की योजना तस्करों की जेबें भर रही है। ऐसे कई तस्कर गिरोह सक्रिय है जो रेल व सड़क मार्ग से चावल का परिवहन कर रहे हैं। कोरोना काल में चावल की खूब तस्करी हुई। हाल ही कर्नाटक में तस्करी कर लाए करीब 10 टन राशन का चावल जब्त किया। पुलिस को मौके पर लगभग 400 बैग राशन चावल तस्करी के लिए तैयार रखा मिला। यह चावल 100 बैगों पर अलग-अलग लेबलों के साथ उच्च कीमत पर बेचने के लिए ब्रांडेड किया गया था। पुलिस ने कुछ महीने पहले ही गोदाम के मालिक को राशन चावल की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। हाल ही में वह जेल से रिहा हुआ औऱ फिर से तस्करी के काम में लग गया। पुलिस ने पिछले दिनों कई इलाके में चावल की जब्ती तो की लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए ही। तमिलनाडु में जयललिता सरकार जब सत्ता में आई थी तब जनहित में पहला कदम निःशुल्क चावल वितरण का उठाया था। तब प्रदेश के 1.84 करोड़ राशनकार्ड धारकों को प्रति माह बीस किलो निःशुल्क चावल देने की योजना को मूर्त रूप दिया गया। इसके साथ ही करीब 18.62 लाख अन्त्योदय अन्न योजना कार्ड धारकों (गरीबों में सबसे गरीब) को प्रति माह 35 किलो चावल निःशुल्क देना शुरू किया लेकिन अब यही चावल सरकार के लिए गले की फांस बन गया है। भारत में हर साल 11 करोड़ टन चावल का उत्पादन होता है। पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओड़िसा, असम एवं पंजाब में चावल बहुतायत में होता है। चावल निर्यात में भारत अग्रणी देश है। आन्ध्रप्रदेश के साथ ही केरल व कर्नाटक तक तस्करी का चावल पहुंचाया जा रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों का चावल बिचौलियों के मार्फत ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। बंदरगाह के मार्फत चावल अफ्रीकी देशों में भेजे जाने की खबरे भी सामने आती रही है। जरुरत इस बात की है कि पुलिस, रसद एवं अन्य महकमे संयुक्त रूप से तस्करों के खिलाफ अभियान छेड़ें ताकि चावल जरूरतमन्द लोगों को मिल सकें।
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