छलनी हुई सड़कें, प्रशासन गंभीर नहीं

Ashok Rajpurohit | Updated: 20 Sep 2019, 08:52:27 PM (IST) Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

 

बारिश (Rain) के साथ बह गई सड़कें। जगह-जगह उखड़ी सड़कों ने प्रशासन (Administration) की पोल खोल दी।

चेन्नई. महानगर में कई सड़कें बारिश में बह गई। जगह-जगह उखड़ी सड़कों ने प्रशासन की पोल खोल दी। सड़क ठेकेदारों की कलई इस बरसात में खुल गई। संभवत इस मौसम की यह पहली तेज बारिश थी। हालांकि बरसात का पूरा मौसम अभी शेष हैं। ऐसे में आने वाले समय में सड़कों के क्या हालात होने वाले हैं, इसका अनुमान अभी से लगाया जा सकता है। सड़कों को लेकर प्रशासन पहले भी गंभीर नहीं रहा है। अमूमन हल्की बारिश में ही सड़कें अक्सर पहले भी टूटती रही है। हालात तो यह है कि बिन बारिश के बावजूद महानगर की अधिकांश सड़कें जर्जर हालात में ही है। ऐसे में कई सड़कों पर वाहन हिचकोले खाते हुए चलते देखे जा सकते हैं। राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजमार्गों को छोड़ दें तो अधिकांश सड़कें संतोषजनक नहीं कही जा सकती है। च
भगवान ही मालिक
चेेन्नई महानगर की यदि बात की जाएं तो सड़कों का भगवान ही मालिक है। कई अन्दरुनी इलाकों में यह पता ही नहीं चलता है कि सड़क कहां है। ऐसे में गड्डों के बीच सड़क को खोजना पड़ता है। महानगर में वार्डों में सड़कों का रखरखाव निगम के भरोसे हैं लेकिन खुद निगम नेतृत्वविहिन है। लम्बे समय से स्थानीय निकाय चुनाव न होने के चलते भी महानगर में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। लगातार स्थानीय निकाय चुनाव को टाला जा रहा है। बार-बार छह-छह महीने के विशेषाधिकारी का कार्यकाल बढ़ा दिया जाता है।
नहीं हो रही सुनवाई
यह कहने में शायद कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी है कि पिछले कुछ समय से निगम पंगु हो गया है। जनता की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आखिर जनता अपनी पीड़ा किसे कहें। कहने को निगम ने हेल्पलाइन नंबर दे रखे हैं लेकिन हेल्पलाइन नंबर रिसिव ही नहीं हो रहे हैं। हाल में हुई बारिश से महानगर के कई सड़कें छलनी हो चुकी है। इन्हें दुरुस्त करने में ही शायद लम्बा वक्त लग जाएगा।
पानी में बह गई
पिछले दिनों कई जगहों पर सीसी सड़कों का निर्माण करवाया गया लेकिन कई जगह घटिया निर्माण की शिकायतें मिलीं। शायद ही किसी ठेकेदार के खिलाफ निगम ने कोई कार्रवाई की हो या किसी जिम्मेदार अफसर के खिलाफ कोई एक्शन ही लिया गया हो। ऐसे में ठेकेदारों के साथ अफसरों के हौसले बुलंद बने हुए हैं। उनके घटियों कामों पर लगातार परदा डाला जा रहा है। जिसकी वजह से कभी मामूली बारिश में ही सड़कें बिखर जाती है।
जनता की गाढ़ी कमाई
जनता की गाढ़ी कमाई को यूं ही बारिश में धोया जा रहा है। आखिर इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा। प्रशासन को इस दिशा में तत्काल कोई कदम उठाने चाहिए। सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह आमजन के लिए मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दें। जनता की आवाज को सुना जाना चाहिए।
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कई बार हादसे
कोयलमबाक्क-मडिपाक्कम में रोड सबसे खराब है। जगह-जगह बारिश के कारण खड्डे बन चुके हैं। प्रशासन व निगम का इस ओर कोई ध्यान न हीं हैं। ऐसे में कई बार यहां दो सौ फीट रोड पर हादसे हो चुके हैं।
-नेमीचन्द चोयल, बिजनसमैन।
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अब कुछ सुधार
हम नए भारत की कल्पना में जी रहे हैं लेकिन ऐसा कहीं नजर नहीं आ रहा है। पहले मेट्रो के काम के चलतेे सड़कों की हालत खराब हो चुकी थी लेकिन हालांकि अब कुछ सुधार हुआ है।
-राजूराम सोऊ विश्नोई, बिजनसमैन।
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सड़क को दें प्राथमिकता
अडयार, तिरुवानमियूर, ईसीआर में सड़कें खस्ताहाल है। कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वाहन हिचकोले खाते हुए चलते हैं। ऐसे में कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इस दिशा में प्राथमिकता से ध्यान देने की जरूर है।
-सत्ताराम पोटलिया, बिजनसमैन।
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गडडों में पानी
कई बार पानी, बिजली व टेलीफोन महकमे की ओर से अपनी लाइनें बिछाने के लिए सड़कों को खोद दिया जाता है लेकिन उस सड़क को फिर से दुरुस्त नहीं किया जाता। यदि किया भी जाता है तो गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाता है। कई जगह सड़कों पर गड्डों में पानी जमा हो चुुका है।
-भरत चौधरी, इलेक्ट्रिकल व्यापारी।
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गुणवत्ता पर दें ध्यान
महानगर में सड़कों की हालत गांवों से भी बदतर है। रात में जो सड़कें बनती हैं वे अगले दिन टूट जाती है, कुछ ऐसे हालात बन चुके हैं। ऐसे नजारे आम हैं। सड़कों की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है।
-मोहनलाल विश्नोई, बिजनसमैन।
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