दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की शतमानोत्सव व्याख्यान शृंखला शुरू

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की शतमानोत्सव व्याख्यान शृंखला शुरू

Mukesh Kumar Sharma | Publish: Apr, 15 2018 11:01:06 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा द्वारा शतमानोत्सव वर्ष 2018 का पहला कार्यक्रम शतमानोत्सव व्याख्यान शृंखला का आरम्भ पद्मभूषण डॉ. यार्लगड्डा...

चेन्नई।दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा द्वारा शतमानोत्सव वर्ष 2018 का पहला कार्यक्रम शतमानोत्सव व्याख्यान शृंखला का आरम्भ पद्मभूषण डॉ. यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद (पूर्व सांसद) राजभाषा की संसदीय समिति के पूर्व उपाध्यक्ष तथा आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी के अध्यक्ष ने किया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि बचपन में ही सभा की प्रारंभिक परीक्षाएं पास की हैं। हिंदी के विकास के लिए सभा के प्रचारकों और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए उन्होंने जयशंकर प्रसाद की कविता बढे चलो!
बढे चलो का नारा दिया और हिन्दी को राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए आवश्यक बताया। इस अवसर पर राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता और हिंदी विषय पर अपना विद्वत्ता पूर्ण प्रथम व्याख्यान भी दिया। प्रचार सभा के कोषाध्यक्ष सीएनवी अन्नामलै ने मुख्य अतिथि का सम्मान किया।

सभा के पूर्व प्रधान सचिव और सभा के इतिहास लेखन में महत्वपूर्ण योगदान करनेवाले वीएस राधाकृष्णन ने सभी को शतमानोत्सव की ओर प्रेरित करते हुए हिंदी प्रचार को एक व्रत की तरह मनाने का आह्वान किया। सभा की शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एस पार्थसारथी ने उनका सम्मान किया।

प्रधान सचिव एस जयराज ने तमिल और हिंदी में अपना स्वागत भाषण देते हुए सभा के इतिहास में आज के दिन के इतिहास के बारे में बताया। ज्ञातव्य हो कि 29 मार्च 1918 को ही प्रथम बार इंदौर में महात्मा गांधी ने यह प्रस्ताव पारित करवाया था कि दक्षिण भारत के निवासियों को हिंदी पढ़ाने और दक्षिण में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से एक संस्था का गठन किया जाए।


उसके अनुसार दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की गई और चेन्नई के गोखले हॉल में प्रथम वर्ग 17 जून 1918 को चलाया गया। प्रथम प्रचारक बने देवदास गांधी जो महात्मा गांधी के छोटे पुत्र थे। इस वर्ग की अध्यक्षता एनी बेसेंट ने की थी। सभा आज सौ वर्ष बाद देश में सबसे बड़ी हिंदी संस्था है। जिसके द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख छात्र हिंदी परीक्षाओं में भाग लेते हैं।

इंदौर, जहां 100 वर्ष पूर्व आज के ही दिन सभा की प्रस्तावना रखी गयी थी, वहां की पत्रिका वीणा के नवीनतम अंक, जिसमें सभा के शतमानोत्सव के सन्दर्भ में लेख प्रकाशित हुआ है, के लेखक डॉ बी. एल. आच्छा ने वीणा का अंक सभी अतिथियों को प्रदान किया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा ने दिया।

समारोह के दूसरे सत्र में कलाक्षी स्कूल ऑफ डांस की नृत्यांगनाओं द्वारा भारत नाट्यम की सुन्दर प्रस्तुति दी गई। स्कूल की प्रधान रंजना विनोद कुमार का और उनके डांस स्कूल का परिचय जनसंपर्क अधिकारी ईश्वर करुण ने दिया तथा सम्मान प्रधान सचिव एस. जयराज ने किया। सहभागी नृत्यांगनाओं का सम्मान किया गया।

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