नवकार में छिपा है व्यवसाय की सफलता का राज

नवकार में छिपा है व्यवसाय की सफलता का राज

Ritesh Ranjan | Publish: Sep, 12 2018 11:07:56 AM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

जब अपने से जुड़े लोगों को सहयोग और सहायता नहीं करोगे और प्रतिस्पर्धा करते रहोगे तो सफल नहीं हो पाओगे। जो दूसरों को सुरक्षा का आश्वासन देता है वह स्वयं सुरक्षित हो जाता है। प्रतिस्पर्धा से अकेले रह जाओगे, दुश्मनी, टेंशन और नकारात्मकता की भावना ही आएगी और नकारत्मक व्यक्तित्व के साथ कोई भी कार्य कारोगे तो सफल होने की संभावना कम हो जाएगी।

 

 

चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एमकेएम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने कहा परमात्मा ने जैन धर्म में सर्वज्ञ बनना अनिवार्य किया गया है। ऐसी बातें जिन्हें पुण्य-पाप की कसौटी पर नहीं कसा जा सके उनका समाधान भी तीर्थंकर प्रभु ने दिया है।
भगवान महावीर ने कहा है बिजनेस की सफलता से पहले बिजनेसमैन का व्यक्तित्व, चरित्र और प्रतिभा का विकास होना जरूरी है।
जब अपने से जुड़े लोगों को सहयोग और सहायता नहीं करोगे और प्रतिस्पर्धा करते रहोगे तो सफल नहीं हो पाओगे। जो दूसरों को सुरक्षा का आश्वासन देता है वह स्वयं सुरक्षित हो जाता है। प्रतिस्पर्धा से अकेले रह जाओगे, दुश्मनी, टेंशन और नकारात्मकता की भावना ही आएगी और नकारत्मक व्यक्तित्व के साथ कोई भी कार्य कारोगे तो सफल होने की संभावना कम हो जाएगी। जीवन में यह सूत्र साकार होगा तो उन्नति के रास्ते मिलेंगे। इसलिए अपने समाज में छिपी प्रतिभाओं का मूल्यांकन करें और अधिक से अधिक सहयोग करें। तीर्थंकर प्रभु ने नमस्कार महामंत्र में व्यापार की सफलता का राज बताया।
उन्होंने कहा जो जीरो से शुरुआत कर उत्कर्ष पर पहुंचे हैं उन्हें नमन करें, उनसे सीख लें। अपने बल पर जिन्होंने दुनिया निर्माण की उनका अनुसरण करें। सफल लोगों के पास जाने और रहने से बहुत-कुछ सीख जाओगे। जो अपने किसी भी रहस्य को छिपाते नहीं हैं उनको खोजना चाहिए। बिजनेस करके रिटायर होने वालों को सारी परिस्थितियों का ज्ञान है। उनके पास जाकर बैठोगे तो व्यापार में खतरों के बारे में जानकारी मिलेगी। जो द्रव्य काल, भाव, परिस्थिति के अनुसार समाधान देते हैं ऐसे अनुभवी को खोजें। जो प्रेक्टिकल न करते हुए केवल साइंस, विज्ञान और कंसल्टिंग करता है और थ्योरी पर रिसर्च करता है वे उपाध्याय है। ऐसे लोगों के पास जाकर उनसे शिक्षा ग्रहण करें। साधु का मूल चरित्र है- सहयोग देता भी है और ले भी सकता है। जो दोनों पक्षों को स्वीकारे उसी से जुड़ें।
इस प्रकार ये पांच नमस्कार आपके बिजनेस के सभी पापों और बाधाओं का नाश कर देंगे। इन्हें अपने जीवन में अपनाएं और सफल हो सकते हैं। तीर्थेशऋषि ने अंतगड़ सूत्र वाचन किया। धर्मसभा
बुधवार को प्रवर्तक पन्नालाल की जन्म-जयंती मनाई जाएगी। प्रवचन के बाद आचार्य शुभचंद्र की गुणानुवाद सभा हुई जिसमें उनके आदर्शों एवं जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

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