ईमानदारी, सहनशीलता व मेहनत ही सीरवी समाज का धर्म, इन्हीं उसूलों का पांच सौ साल से पालन

ईमानदारी, सहनशीलता व मेहनत ही सीरवी समाज का धर्म, इन्हीं उसूलों का पांच सौ साल से पालन
- देश में सात सौ से अधिक आईमाता वढेर
- सीरवी समाज के धर्मगुरु दीवान माधोसिंह की राजस्थान पत्रिका के साथ विशेष बातचीत

By: Ashok Rajpurohit

Published: 01 Mar 2021, 07:55 PM IST

चेन्नई. ईमानदारी, सहनशीलता मेहनत, धर्म के प्रति आस्था तथा मां-बाप का आशीर्वाद। इन्हीं पांच गुणों को अंगीकार करते हुए सीरवी समाज आगे बढ़ रहा है। आईपंथ के अनुयायी सीरवी समाज के लोग आज करीब आधे भारत में फैले हुए हैं। देशभर में आईमाता की सात सौ वढ़ेर (मंदिर) है।
सीरवी समाज के धर्मगुरु दीवान माधोसिंह ने राजस्थान पत्रिका के साथ विशेष बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पांच गुण सीरवी समाज की पहचान है। इनका पालन समाज के लोग निरन्तर कर रहे हैं। सीरवी समाज का धर्म यही सिखाता है और इन्हीं उसूलों पर समाज के लोग चलने का प्रयास करते हैं। पांच सौ साल से सीरवी समाज को यही पांच बातें सिखाई गई।
बिना पढ़ाई व बिना तजुर्बे के बावजूद आगे बढ़े
दीवान ने कहा कि सीरवी समाज के लोग बिना पैसे, बिना पढ़ाई एवं बिना तजुर्बे के दक्षिण भारत में आए और बिजनस के क्षेत्र में सफलता हासिल की। समाज में ऐसे गुण पैदा होने का ही यह परिणाम रहा कि वे सफलता के पायदान पर चढ़ पाए। हमें लोगों को कामयाबी की राह पर ले जाना है। व्यापार के क्षेत्र में आज समाज आगे बढ़ रहा है। इसी गुण को अपनाकर न केवल बिजनेस में सफलता हासिल हो सकती है बल्कि राजनीति या अन्य क्षेत्र में भी यह गुण काफी मायने रखते है। यदि आई पंथ के गुण देश के हर व्यक्ति में आ जाएं तो देश को बहुत आगे ले जाया जा सकता है।
सामूहिक योगदान की भावना
सीरवी समाज के धर्मगुरु दीवान माधोसिंह ने कहा कि जहां भी सीरवी समाज के लोगों की 15-20 दुकानें हुईं। वहां जमीन लेकर वढ़ेर का निर्माण करवाया जाता है। यह परम्परा वर्षों से चल रही है। यही वजह है कि देश में आज सात सौ से अधिक आई माता वढ़ेर बन चुकी है। यह सिलसिला लगातार जारी है। यह एक तरह का वेजेटेरियन क्लब की तरह है। सभी वढेर में सामूहिक योगदान रहा है। पांच सौ वर्ष से धर्म के लिए लोग योगदान करते रहे हैं। आई माता आगे बढ़ने का रास्ता अपने आप बनाती है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिन्हें हम कुरीतियां कह रहे हैं वे उस समय की रीति थी। वे उस समय की जरूरत थी। समय के अनुसार सामाजिक परिवर्तन अपने आप आ रहा है। किसी बंधन में बंधे नहीं हैं।
वर्षों तक राजनीति में भी रहे सक्रिय
दीवान माधोसिहं ने बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल की। बाद में कुछ समय तक जापान में रहे। राजस्थान की राजनीति में लम्बे समय तक सक्रिय रहे। पांच बार विधायक रहे। यानी 25 वर्ष तक विधायक रहे। राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। अब गृहस्थी जीवन जीते हुए समाज को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रतिष्ठा को कभी आंच नहीं आने दी। माता के सेवक के रूप में काम कर रहे हैं। हरेक के लिए सुझाव खुले हैं।

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Ashok Rajpurohit
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