प्रतिबंधित जाल से मछली पकडऩे के आरोप में कड्लूर के 166 मछुआरों को नोटिस

जिला मछुआरा विभाग ने प्रतिबंधित जाल से मछली पकडऩे के आरोप में जिले के चार तटिय बस्तियों के 166 मछुआरों को कारण बताओं नोटिस जारी किया है

By: Vishal Kesharwani

Published: 15 Jun 2021, 04:27 PM IST


कड्लूर. जिला मछुआरा विभाग ने प्रतिबंधित जाल से मछली पकडऩे के आरोप में जिले के चार तटिय बस्तियों के 166 मछुआरों को कारण बताओं नोटिस जारी किया है। विभाग ने नोटिस जारी कर मछुआरों से पूछा कि वे बताएं कि तमिलनाडु समुद्री मत्स्य पालन विनियमन अधिनियम 1983 का उल्लंघन करते हुए प्रतिबंधित जाल का उपयोग करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों ना की जाए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया जिला प्रशासन ने मछुआरों को प्रतिबंधित जाल का उपयोग करने से बचने की चेतावनी दी थी, क्योंकि वे अत्यधिक हानिकारक और पारिस्थितिक रूप से अस्थिर होते हैं।

 

साथ ही मछुआरों को ऐसा करने पर उनके मछली, जाल और नाव को जब्त करने के साथ ही उनके नाम को कल्याणकारी योजनाओं से हटा देने की चेतावनी भी दी गई थी। अधिकारियों द्वारा किए गए प्रारंभिक जांच से पता चला है कि देवानामपट्टिनम, नल्लावेडु, रसापेट्टै और सोतिकुप्पम के 166 मछुआरों ने नियम तोड़ते हुए मछली पकड़ा है।

 


जारी हुए नोटिस पर मछुआरों से स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन बार बार मछुआरों को आगाह करता रहा है कि प्रतिबंधित नेट के इस्तेमाल पर तमिलनाडु मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत कैच को भी जब्त किया जा रहा है। विभाग की ओर से किसी प्रकार का कसर नहीं छोड़ा जा रहा है और विभाग ने इस प्रथा को खत्म करने के लिए मछुआरों के साथ लगभग 60 बैठकें भी की थी। लेकिन फिर भी मछुआरों का एक वर्ग लगातार प्रतिबंधित नेट का उपयोग करना जारी रखा है।

 


उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले ही जिला प्रशासन ने मछुआरों को मछली पकडऩे के लिए राज्य द्वारा प्रतिबंधित नेट का उपयोग करने के खिलाफ गंभीर कानूनी परिणाम के अलावा नावों को जब्त करने और कल्याणकारी योजना को रोकने की चेतावनी दी थी। एक विज्ञप्ति में जिला कलक्टर के. बालसुब्रमणिमय ने कहा था कि मत्स्य पालन विनियमन अधिनियम 1983 के तहत राज्य सरकार ने पर्स सीन नेट पर प्रतिबंध लगाया है, क्योंकि इससे समुद्री जीवन को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचता है।

 

कई राज्यों ने इस तरह के नेट से मछली पकडऩे पर प्रतिबंध लगाया है, क्योंकि यह अत्यधिक हानिकारक होती है। ऐसी परिस्थिति में जिले के मछुआरे अपने तौर तरीके बदलें और सरकार द्वारा समर्थित विकल्पों का उपयोग करें। अगर मछुआरे नियम का उल्लंघन करते हैं तो नाव को जब्त करने के साथ ही उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Vishal Kesharwani
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