स्टालिन ने साकार किया पिता करुणानिधि का सपना

  • करुणानिधि ने कहा था स्टालिन ही पार्टी का भविष्य हैं

By: Ram Naresh Gautam

Published: 08 May 2021, 06:10 PM IST

चेन्नई. डीएमके के दिवंगत संरक्षक एम. करुणानिधि ने करीब छह वर्ष पहले पार्टी की एक बैठक में कहा था कि 'स्टालिन ही पार्टी का भविष्य हैं।'

तब पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे एम. के. स्टालिन ने शुक्रवार को जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उनके पिता करुणानिधि का सपना साकार हो गया।

द्रमुक 2016 में सत्ता में नहीं आ सकी लेकिन स्टालिन ने एआईएडीएमके से राज्य विधानसभा के अंदर और बाहर लड़ाई अनवरत जारी रखी जिससे एक दशक बाद उनको फोर्ट सेंट जॉर्ज में सीएम के पद पर आसीन होने का अवसर मिला।

2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान हालांकि करुणानिधि ने डीएमके को जनादेश मिलने पर स्टालिन के मुख्यमंत्री बनने की संभावना से इनकार किया था और कहा था कि अगर 'प्रकृति' ने उनके साथ कुछ किया तभी ऐसा हो सकेगा, लेकिन स्टालिन पार्टी की सफलता के लिए पहले की तरह काम करते रहे।


पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर स्थिति मजबूत हुई
वे कई मुद्दों को लेकर राज्य में एआईएडीएमके और केंद्र में भाजपा सरकार को निशाना बनाते रहे और 2017 की शुरुआत में जब वे कार्यकारी अध्यक्ष बने तो पार्टी के अंदर भी उनकी स्थिति मजबूत हुई। इसके अगले वर्ष करुणानिधि के निधन के बाद उनको पार्टी अध्यक्ष का पद मिला।

स्टालिन ने अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत किशोर के तौर पर की थी और पार्टी के अंदर उनका कद धीरे-धीरे बढ़ता चला गया।

करुणानिधि जब 2006-11 तक मुख्यमंत्री थे तो सरकार में उनको जिम्मेदारियां भी क्रमिक रूप से मिलती गईं।

मदुरै में रह रहे अपने भाई एम. के. अलगिरी की तरफ से पेश चुनौतियों से भी उन्होंने सफलतापूर्वक पार पाया और नीचे से लेकर ऊपर तक पूरा संगठन उनके साथ हो चला।

उन्होंने अपने पिता की तरह 'सीधे पार्टी कार्यकर्ताओं को पत्र लिखनेÓ की शैली अपनाई ताकि उनमें उत्साह भर सकें।
कावेरी डेल्टाई जिलों में चाहे हाइड्रोकार्बन उत्खनन परियोजना का विरोध करना हो या संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन चलाना हो अथवा सीएए के खिलाफ 'दो करोड़' दस्तखत जुटाने की बात हो; स्टालिन ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरना जारी रखा और साथ ही पार्टी की चुनावी संभावनाओं को भी मजबूत करते रहे।

केन्द्रीय कानूनों का विरोध भी रहा सहायक
केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध और सरकारी स्कूली छात्रों को मेडिकल में नामांकन में साढ़े सात फीसदी आरक्षण के राज्य के विधेयक पर राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित द्वारा हस्ताक्षर करने के लिए पिछले वर्ष अक्टूबर में राजभवन के पास रैली आयोजित करने से लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश गया और छह अप्रैल को अगली सरकार के चयन के लिए हुए मतदान में इसका असर भी दिखा।

उनके नेतृत्व में 2019 के लोकसभा चुनाव में डीएमके ने राज्य में 39 में से 38 सीटों पर जीत पाई।

विधानसभा चुनाव में भी डीएमके ने इसी तरह की जीत हासिल की जब पार्टी एवं इसके सहयोगियों ने 234 में से 159 सीटों पर अपना परचम लहराया। एआईएडीएमके और उसके घटक दलों को केवल 75 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।

Ram Naresh Gautam
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned