सुविधाओं को तरसता माधवरम मफसिल बस टर्मिनस

माधवरम मफसिल बस टर्मिनस (Bus Terminus) में बसों का संचालन पिछले एक साल से हो रहा है। सीएमडीए ने यहां खाने पीने एवं अन्य वस्तुओं की स्टालों (Terminus) के लिए आठ से अधिक दुकानें भी बनाई है लेकिन इन दुकानों (Shops) को कोई किराये पर लेने वाला कोई नहीं आया।

चेन्नई. उत्तरी चेन्नई में निर्मित माधवरम बस टर्मिनस सुविधाओं को तरसता है। सरकार ने जब निर्मित करवाया था तो इसमें सीएमबीटी जैसी सुविधाएं मुहैया करवाने की बात कही थी लेकिन अब तक एक भी सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। इस टर्मिनस से प्रतिदिन तीन सौ से अधिक बसों का संचालन होता है। यहां से आंध्रप्रदेश, तेलांगना के शहरों के लिए हजारों की संख्या में यात्री बस पकड़ते हैं। इतना ही नहीं इस बस टर्मिनस से तिरुपति तिरुमला के लिए हर पांच मिनट में बस निकलती है। इसके अलावा नेल्लोर, विजयवाड़ा, हैदराबाद, करनूल, कडप्पा, राजमुंद्री, काकीनाडा, अमरावती सरीखे शहरों के लिए भी यात्रियों को यहीं से बस पकडऩी होती है।

टर्मिनस में नहीं है एक भी स्टॉल
टर्मिनस को बने लंबा समय हो गया और यहां से हजारों बाहरी यात्रियों की प्रतिदिन आवाजाही होती है। हालांकि यहां यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन पूरे टर्मिनस में खाद्य सामग्री और चाय, कॉफी की एक भी स्टाल नहीं है। ज्ञातव्य है कि १० अक्टूबर २०१८ को जब मुख्यमंत्री एडापाडी के पलनीस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने बस टर्मिनस से बस को हरी झंडी दिखाकर इसका उद्घाटन किया था। उस समय उन्होंने वादा किया था कि इस टर्मिनस में भी वे तमाम सुविधाएं बहाल होगी जो सीएमबीटी में यात्रियों के लिए उपलब्ध हैं लेकिन दुर्भाग्य यह है कि सूबे के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के वायदे के बावजूद सालभर गुजर गया लेकिन टर्मिनस में यात्रियों के लिए एक भी स्टॉल नहीं लगी। नतीजतन यात्रियों को खाने पीने की वस्तुओं के लिए टर्मिनस से बाहर जाना पड़ता है।

खाद्य सामग्री के लिए जाना पड़ता है बाहर
यह बस टर्मिनस जिस स्थान पर बना हुआ है उस माधवरम बाइपास पर एक भी अच्छी रेस्टोरेंट नहीं है। फास्टफूड और पेय पदार्थों की भी दुकानें भी नहीं है, इसलिए लम्बी दूरी के सफर में जाने वालों को यहां भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक यात्री दिगम्बर ने बताया कि बस टर्मिनस में दुकानें नहीं होने के कारण बाइपास राउंडटाना जाना यात्रियों की मजबूरी है, लेकिन वहां भी जो होटलें हैं वहां शुद्धता और सफाई का घोर अभाव है, सड़क से उड़ती धूल इन होटलों में सीधे प्रवेश करती हैं जो खाद्य पदार्थों को दूषित बना देती है। ऐसे में बाइपास के होटलों में बिक रही खाद्य सामग्री आमजन की सेहत के लिए ठीक नहीं है।

बड़े टर्मिनस में छोटी सुविधा भी नहीं
एक महिला यात्री अरुणा कहती है कि उसकी बच्ची दो घंटे से नाश्ते में इडली के लिए रो रही है, लेकिन परिसर में कोई स्टॉल नहीं है। छोटी बच्ची को लेकर बाहर कैसे जाऊं? उन्होंने सरकार को कोसते हुए कहा कि इतना अच्छा बस टर्मिनस बना हुआ है लेकिन यात्रियों के लिए खाने पीने की दुकानों की व्यवस्था नहीं करवाई। उल्लेखनीय है कि माधवरम मफसिल बस टॢमनस में बसों का संचालन पिछले एक साल से हो रहा है। सीएमडीए ने यहां खाने पीने एवं अन्य वस्तुओं की स्टालों के लिए आठ से अधिक दुकानें भी बनाई है लेकिन इन दुकानों को कोई किराये पर लेने वाला कोई नहीं आया। सूत्र बताते हैं कि सीएमडीए ने इन दुकानों का किराया और स्टॉल लगाने की जो दर तय की है उस दर कोई दुकान लेने को तैयार नहीं है इसी का नतीजा है कि ये दुकानें अब तक किरायेदार का इंतजार कर रही हैं।

एटीएम भी अभी तक नहीं लगा
टर्मिनस में एटीएम मशीन के लिए भी एक कमरा बनाया गया है लेकिन अबतक एमटीएम मशीन लगाने को कोई एजेंसी तैयार नहीं है। यदि यात्रियों को पैसे की जरूरत पड़ती है तो उनको बाहरी इलाके में जाना पड़ता है। गौरतलब है कि माधवरम बस टर्मिनस से हर दिन १५ हजार से अधिक यात्री आवाजाही करते हैं और लगभग तीन सौ से अधिक बसें यहां से आवाजाही करती है, ऐसे में एक साल में टर्मिनस में यात्रियों की सुविधा के लिए एक भी स्टॉल नहीं होना यात्रियों के साथ ज्यादती है।

Dhannalal Sharma
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