इस्पात नगरी में कांटे की टक्कर

दक्षिण की इस्पात नगरी के नाम से मशहूर सेलम का पश्चिमी तमिलनाडु की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण स्थान है। राजनीतिक तौर पर पश्चिमी तमिलनाडु...

कोयम्बत्तूर।दक्षिण की इस्पात नगरी के नाम से मशहूर सेलम का पश्चिमी तमिलनाडु की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण स्थान है। राजनीतिक तौर पर पश्चिमी तमिलनाडु को सत्तारूढ़ एआईएडीएमके का मजबूत गढ़ माना जाता है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद बदले सियासी परिदृश्य का असर यहां भी दिख रहा है। चतुष्कोणीय मुकाबले में कांटे की टक्कर है।

मुख्यमंत्री ई. पलनीस्वामी का गृह क्षेत्र होने के बावजूद यहां उनकी पार्टी की राह आसान नहीं दिख रही है। वैसे तो यहां चुनावी मुकाबला प्रतिद्वंदी द्रविड़ दलों एआईएडीएमके और डीएमके बीच है लेकिन एआईएडीएमके से अलग हुए टीटीवी दिनकरण की पार्टी एएमएमके और अभिनेता कमल हासन की पार्टी मक्कल नीदि मय्यम के मैदान में होने के कारण मुकाबला काफी रोमांचक है।

हालांकि, गौंडर समुदाय बहुल इस क्षेत्र में एआईएडीएमके जातीय समीकरणों व विकास कार्यों के सहारे चुनावी वैतरणी पार लगाने की कोशिश कर रही है लेकिन दिनकरण की पार्टी दोनों द्रविड़ दलों की मुश्किलें बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सेलम में २२ उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं जिनमें एएमएमके उम्मीदवार सहित १५ निर्दलीय हैं।

एआईएडीएमके पिछले दो चुनावों में लगातार यहां से जीती लेकिन पार्टी ने मौजूदा सांसद वी. पलनीस्वामी का टिकट काट कर जोनल सचिव के. आर. एस. सरवणन को मैदान में उतारा है। डीएमके ने पूर्व विधायक एस आर पार्तिबन को उतारा है जबकि एएमएमके से दो बार विधायक रह चुके के. एस. सेल्वम और एमएनएम से प्रबंधन स्नातक पी. मणिकंठन मैदान में हैं। इस क्षेत्र में ६ विधानसभा सीटों में से पांच सीटों पर एआईएडीएमके का कब्जा है जबकि एक सीट पर पिछले चुनाव में डीएमके जीती थी। इस क्षेत्र में तीन सीटें सेलम शहर की हैं। मुख्यमंत्री का गृह और चुनाव क्षेत्र एडपाडी भी इसमें शामिल है।

१६ से में ९ बार चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को पिछली बार मुश्किल से ४ फीसदी मत मिले थे। कांग्रेस की सहयोगी डीएमके इस बार भाजपा और एआईएडएमके विरोधी लहर के सहारे जीतने की कोशिश कर रही है। एआईएडीएमके सडक़ों के विकास, फ्लाईओवर और पुलों के निर्माण के सहारे जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश कर रही है। एआईएडीएमके के उम्मीदवार सरवणन पिछले विधानसभा चुनाव में सेलम उत्तर सीट पर हार गए थे लेकिन मुख्यमंत्री पलनीस्वामी के करीबी होने के कारण उन्हें फिर से टिकट मिल गया है। पलनीस्वामी के गृह क्षेत्र होने के कारण एआईएडीएमके यहां जीत की उम्मीद कर रही है।

सरवणन की तुलना में डीएमके ने सियासी तौर पर बाहरी उम्मीदवार को उतारा है। पार्तिबन मेट्टूर से २०११ में डीएमडीके के विधायक रह चुके हैं और बाद में डीएमके में आ गए थे। पार्तिबन सेलम की राजनीति में नए चेहरे नहीं हैं लेकिन मेट्टूर की तरह यहां उनकी राजनीतिक पकड़ नहीं है। हालांकि, पार्तिबन डीएमके का बड़ा चेहरा नहीं होने के बावजूद एआईएडीएमके को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवार में कांटे की टक्कर को रोमांचक बनाने के लिए एएमएमके के सेल्वम कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दो बार वीरपंडी से विधायक रह चुके सेल्वम पहले एआईएडीएमके में भी रह चुके हैं और इसी कारण वे दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

सीट का इतिहास


यह सीट कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ हुआ करता था। पहले तीन आम चुनावों में कांग्रेस यहां जीती लेकिन १९६० के दशक के बाद राज्य की राजनीति में द्रविड़ दलों की पकड़ मजबूत होने के साथ ही कांग्रेस अपने इस गढ़ को नहीं बचा पाई। हालांकि, करीब तीन दशक बाद कांग्रेस ने १९८४ के आम चुनाव में फिर से इस सीट पर कब्जा कर लिया और लगातार पांच चुनावों में कांग्रेस यहां जीती। लेकिन, १९९९ के चुनाव में कांग्रेस कब्जा बनाए नहीं रख पाई और करीब दो दशक बाद एआईएडीएमके ने इस सीट पर वापसी की।

२००४ के चुनाव में कांग्रेस ने फिर यह सीट एआईएडीएमके से छीन ली लेकिन २००९ और २०१४ में इस सीट पर एआईएडीएमके ने जीत हासिल की। १९५२ से अब तक हुए १६ आम चुनाव में कांग्रेस ९, डीएमके तीन और एआईएडीएमके ४ बार जीती है। इसी सीट से कांग्रेस के दो नेता जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। कांग्रेस के एस वी रामास्वामी १९५२ से १९६७ तक पहली तीन लोकसभा के सदस्य रहे जबकि कांग्रेस के ही रंगराजन कुमारमंगलम १९८४ से १९९६ तक आठवीं, नौंवी और दसवीं लोकसभा के सदस्य रहे। इसके बाद क्षेत्र से कोई नेता दूसरी बार सांसद नहीं चुने गए।

विस क्षेत्र


इस क्षेत्र में ६ विधानसभा सीटें-एडापाडी, वीरपंडी, ओमलूर, सेलम उत्तर, सेलम दक्षिण, सेलम पश्चिम हैं। वर्ष २०१६ में हुए विधानसभा चुनाव में सेलम उत्तर को छोडक़र बाकी सभी एआइएडीएमके का कब्जा है। सेलम उत्तर पर डीएमके जीती थी।

मुकेश शर्मा Reporting
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