विद्यार्थियों कहते हैं, किसी अन्य स्थानीय भाषा से अधिक सहायक होगी हिन्दी: मंत्री

सेंटर के विद्यार्थी जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, गुवाहाटी विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय तथा देश भर के अन्य विश्वविद्यालय में काम कर रहे हैं। इन विद्यार्थियों के लिए केवल तमिल जानना पर्याप्त नहीं है।

चेन्नई.

राज्य के तमिल संस्कृति मंत्री के.पाडियराजन ने कहा कि विद्यार्थियों का कहना है कि हिन्दी किसी स्थानीय भाषा से अधिक सहायक है। वे हिन्दी सीखने को लेकर उत्सकु हैं। इन्टरनेशनल तमिल रिसर्च सेंटर में हिन्दी सहित अन्य अतिरिक्त भाषाओं के शिक्षण को न्यायोचित बताते हुए मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि अन्य भाषाओं के सीखने से विद्यार्थियों को मदद मिलेगी। विद्यार्थियों कहते हैं कि हिन्दी उनकी किसी अन्य स्थानीय भाषा से अधिक सहायता करेगी।
डीएमके ने मंगलवार को एमफिल के विद्यार्थी एवं रिसर्च स्कालर को छह लाख रुपए के आवंटन के लिए तमिल संस्कृति विभाग की आलोचना की थी। यह आवंटन इन्टरनेशनल तमिल रिसर्च सेंटर में हिन्दी सीखने के लिए किया गया है। डीएमके नेता तंगम तेन्नारसू ने कहा था कि पांडियराजन ने अपने मत्रालय को तमिल डिस्ट्रक्शन मिनिस्ट्री में बदल दिया है।
तेन्नारसू के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डीएमके नेताओं के राज्य भर में कई सीबीएसई स्कूल चल रहे हैं। इन सभी स्कूलों में हिन्दी पढ़ाई जाती है। लेकिन डीएमके नेता इस भाषा को सीखने वाले दूसरों की आलोचना करते हैं। पांडियराजन ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जे.जयललिता ने 2014 में एक पालिसी की शुरुआत की थी जिसके तहत अतिरिक्त भाषाएं-एक स्थानीय भाषा एवं एक विदेशी भाषा इन्टरनेशनल तमिल रिसर्च सेंटर में पढ़ाई जाती है।
उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी अपना कोर्स पूरा करने के बाद देश भर के कई स्थानों पर कार्य करते हैं। सेंटर के विद्यार्थी जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, गुवाहाटी विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय तथा देश भर के अन्य विश्वविद्यालय में काम कर रहे हैं। इन विद्यार्थियों के लिए केवल तमिल जानना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अतिरिक्त सेकेंड लैंग्वेज सीखने की जरूरत है।
मंत्री ने कहा कि इस साल एम.फिल स्टुडेंट तथा रिसर्च स्कालर एडिशनल लैंग्वेज के रूप में फ्रेंच या हिन्दी का चुनाव कर सकते हैं। मंत्री ने कहा कि हमने उन्हें हिन्दी चुनने के लिए नहीं कहा लेकिन विद्यार्थियों ने स्वयं हिन्दी एवं फ्रेंच चुना। इस साल हिन्दी एवं फ्रेंच है। अगले साल से विद्यार्थी तेलुगु या बंगाली तथा जर्मन या कोई और विदेशी भाषा भी एडिशनल लैंग्वेज के रूप में सीख सकते हैं।

Santosh Tiwari
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