तमिल नीट अभ्यर्थियों को 196 अनुग्रह अंक देने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका

By: P S Kumar

Published: 20 Jul 2018, 06:09 PM IST

चेन्नई. एक सप्ताह पहले मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खण्डपीठ के तमिल माध्यम से नीट लिखने वाले अभ्यर्थियों को १९६ अनुग्रह अंक देने के फैसले से जहां राज्य में खुशी का माहौल था, वहीं शुक्रवार को इस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से निराशा व्याप्त हो गई।

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिल माध्यम से नीट परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को तमिल में त्रुटिपूर्ण अनूदित ४९ सवालों की एवज में 196 अनुग्रह अंक देने का सीबीएसई को आदेश देते हुए संशोधित रैंकिंग सूची जारी करने को कहा था।
मदुरै पीठ के जस्टिस सीटी सेल्वम और जस्टिस एएम बशीर अहमद ने माकपा नेता टीके रंगराजन की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया था। नीट का पेपर कुल 720 अंकों का था। करीब 24,720 प्रतिभागियों ने तमिल भाषा में नीट परीक्षा दी थी।

सीबीएसई ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश एस. ए. बोबड़े और न्यायाधीश एल. नागेश्वर राव की न्यायिक पीठ ने माना कि गलत अनूदित प्रश्नों की एवज में १९६ अंक देने से देशभर के प्रतिभावान अभ्यर्थियों को नुकसान होगा जिन्होंने आल इंडिया रैंक सूची में जगह बना ली है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर हाईकोर्ट का फैसला लागू हो जाता है कि प्रतिभावान विद्यार्थियों का क्या होगा? यह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है न कि सामान्य परीक्षा जो केवल पास होने के खातिर है। जस्टिस राव ने प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा को जवाब दिया कि हाईकोर्ट ने अनुग्रह अंक देने का निर्णय करते समय यह विचार नहीं किया कि अगर अनुवाद सटीक होता तो भी कुछ विद्यार्थी गलत उत्तर दे सकते थे।

न्यायाधीश बोबड़े ने भी मौखिल रूप में तमिल विद्यार्थियों की विडम्बना को माना कि एक प्रश्न में 'चीताÓ शब्द तमिल में 'सीताÓ लिख दिया गया। हम गलत अनुवाद की समस्या को समझते हैं लेकिन इससे विद्यार्थी गलत मार्ग पर प्रशस्त होंगे। तमिल अभ्यर्थियों को अनुग्रह अंक देने से वे अन्य राज्य के उन प्रतिभागियों से बेहतर स्थिति में पहुंच जाएंगे जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम से नीट दी। न्यायिक बेंच ने इस मामले की व्यापक सुनवाई दो सप्ताह के लिए टालते हुए सीबीएसई और अन्य पक्षकारों को ठोस उपाय के साथ आने को कहा ताकि ऐसी समस्या भविष्य में उत्पन्न नहीं हो।

पूर्व रैंक सूची के आधार पर होगी काउंसलिंग
त्रुटिपूर्ण अनूदित प्रश्नों की एवज में 196 अंक देने से देशभर के प्रतिभावान अभ्यर्थियों को नुकसान
P S Kumar
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