अफसरों का घूस लेना भीख मांगने जैसा : हाइकोर्ट

एकतरफ किसान अपनी फसल की बिक्री नहीं कर पाने से विवश हो जाते हैं तो दूसरी तरफ उनसे खरीद के एवज में अफसर घूस लेते हैं। यह बड़ा दु:खदायी है।

By: P S Kumar

Published: 15 Oct 2020, 06:16 PM IST

मदुरै. मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने बुधवार को कहा कि अधिकारियों का सरकारी वेतन के अतिरिक्त घूस लेना भीख मांगने की तरह है।


चेन्नई निवासी सूर्यप्रकाशम ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की कि राज्य में सबसे अधिक धान का उत्पादन डेल्टाई क्षेत्रों में होता है। किसानों को उपज बेचने के लिए दस से पंद्रह दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। लिहाजा उनकी फसल के धूप और बारिश में बर्बाद होने की आशंका बढ़ जाती है। किसानों के हित में राज्यभर में धान खरीद केंद्र खोले जाने तथा उनकी फसल शीघ्र खरीदने के उपाय करने के निर्देश दिए जाएं।


न्यायाधीश एन. कृपाकरण और जस्टिस पुगलेंदी की न्यायिक पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने कहा एकतरफ किसान अपनी फसल की बिक्री नहीं कर पाने से विवश हो जाते हैं तो दूसरी तरफ उनसे खरीद के एवज में अफसर घूस लेते हैं। यह बड़ा दु:खदायी है। अधिकारियों का अपने वेतन से अधिक रिश्वत लेना भीख मांगने जैसा है।


न्यायिक बेंच ने कहा कि किसानों की उपज का एक कण भी बर्बाद होता है संंबंधित खरीद केंद्र के अधिकारी से इसकी वसूली की जानी चाहिए। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो अनाज खरीद केंद्रों का कदाचार रुक जाएगा। अब बरसात का सीजन शुरू हो चुका है तो किसानों से उपज खरीदने के त्वरित उपाय होने चाहिए थे लेकिन ऐसा लगता नहीं है।


सवालों की झडिय़ां
न्यायाधीशों ने कहा कि उपज खरीद में हो रहे विलम्ब की वजह से तमिलनाडु में किसानों का प्रदर्शन हो रहा है। सरकार से बेंच ने पूछा कि राज्य में कितने खरीद केंद्र है? खरीदे गए अनाज के बोरों को हिफाजत से रखने के क्या उपाय है? किसानों से रिश्वत लेने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई है? इन सवालों का जवाब नागरिक आपूर्ति निगम के निदेशक को बतौर शपथपत्र पेश करने के निर्देश के साथ याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी गई।

P S Kumar Editorial Incharge
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