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तीन में से एक ग्रामीण छात्र के पास स्मार्टफोन नहीं

कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा को जारी रखने के लिए सरकार ने ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कराया, लेकिन

चेन्नई

Published: November 18, 2021 03:38:09 pm


-शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के बीच बढ़ रहा शिक्षा का अंतर
चेन्नई. कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा को जारी रखने के लिए सरकार ने ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कराया, लेकिन जिन बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं थे वे ऑनलाइन कक्षा में शामिल नहीं हो पाए। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में काफी हद तक शिक्षा का अंतर सामने आया है। एक सर्वेक्षण से पता चला है कि ग्रामीण तमिलनाडु में तीन छात्रों में से एक छात्र के पास स्मार्टफोन नहीं है। 2021 की शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर) में इस तत्थ्य की पुष्टि हुई है। हालांकि राज्य में स्मार्टफोन का स्वामित्व 2018 में 40 प्रतिशत से बढ़कर 2021 में 66.१ प्रतिशत हो गया था, लेकिन यह दक्षिणी राज्यों में सबसे कम है।

तीन में से एक ग्रामीण छात्र के पास स्मार्टफोन नहीं
तीन में से एक ग्रामीण छात्र के पास स्मार्टफोन नहीं

तमिलनाडु में स्मार्टफोन रखने वालों में से केवल 26.८ प्रतिशत लोग ही पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं और 13.७ फीसदी ने कहा कि वे फोन का उपयोग नहीं कर सकते हैं। जबकि अन्य विद्यार्थियों का कहना है कि उनके पास कभी कभी स्मार्टफोन आता है, तो ऑनलाइन कक्षा में शामिल हो जाते हैं। एएसईआर 2021 एक फोन आधारित सर्वे था, जिसमें चेन्नई को छोड़कर सभी जिलों में 5,122 ग्रामीण परिवार शामिल थे और सितंबर-अक्टूबर के दौरान 5 से 16 आयु वर्ग के 3,923 बच्चों तक भी पहुंचे थे।


-काल्वी टीवी पर अधिक ध्यान दिया गया
सर्वेक्षण में शामिल जी. कुमारण नामक अधिकारी ने बताया कि एक तिहाई घरों में एक भी स्मार्टफोन नहीं होने के कारण छात्र शायद ऑनलाइन कक्षाओं से बाहर रह गए हैं। इसी कारण राज्य सरकार ने महामारी के दौरान काल्वी टीवी पर अधिक ध्यान केंद्रीत किया था। सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि सरकारी स्कूलों में नामांकित छात्रों का प्रतिशत 2018 की तुलना में 2021 में लगभग 10 प्रतिशत बढ़ कर 76.३ प्रतिशत हो गया। महामारी की वजह से उत्पन्न आर्थिक संकट और नौकरियों के नुकसान के कारण कई अभिभावकों ने इस साल अपने बच्चों को निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया। महामारी के पहले सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या काफी कम थी। अचानक से हुई वृद्धि से स्कूलों को कक्षाओं और शिक्षकों की संख्या में वृद्धि करनी पड़ी।

स्कूलों में नामांकित 6 से 14 आयु वर्ग के छात्रों का प्रतिशत 2020 में 6.२ से घटकर 2021 में 1.३ हो गया। राज्य में स्कूल फिर से खुलने के बाद लॉकडाउन के दौरान घर पर सहायता प्राप्त करने वाले छात्रों का प्रतिशत 68 से घटकर 56 हो गया है। ट्यूशन के लिए जाने वाले छात्र भी 2018 में 14 प्रतिशत से थोड़ा बढ़कर 2021 में 17 प्रतिशत हो गए। सरकारी स्कूलों के केवल 23 प्रतिशत छात्र सीखने की गतिविधियों के लिए ऑनलाइन उपयोग करते हैं, जबकि निजी स्कूलों में यह संख्या 42 प्रतिशत है। इस प्रकार से सर्वे शहरी और ग्रामीण छात्रों के बीच एक डिजिटल विभाजन को दर्शाता है।


-अंतर को पाटने की जरुरत
सामाजिक शिक्षा संस्थान के निदेशक जे. श्याम सुंदर ने कहा कि पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों के अधिकांश छात्र तालाबंदी के दौरान किसी भी ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल नहीं हुए। सरकार को डिजिटल उपकरणों, नेटवर्क और प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने के लिए ज्ञान तक समान पहुंच प्रदान करके इस अंतर को पाटना चाहिए।

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