नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एसीटी स्कैन के तहत कोरोना मरीजों का ना हो इलाज

राज्य की स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों से सिर्फ सीटी स्कैन की रिपोर्ट के आधार पर कोरोना मरीजों का इलाज नहीं करने का आग्रह किया।

By: Vishal Kesharwani

Updated: 22 Oct 2020, 05:15 PM IST


-सरकार ने डॉक्टरों से किया आग्रह
ेचेन्नई. राज्य की स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों से सिर्फ सीटी स्कैन की रिपोर्ट के आधार पर कोरोना मरीजों का इलाज नहीं करने का आग्रह किया। राज्य के स्वास्थ्य सचिव जे. राधाकृष्णन ने कहा सेप्टिक सदमे सहित गंभीर जटिलताओं के साथ रोगियों को सरकारी अस्पतालों में ले जाया जा रहा है, क्योंकि निदान और उपचार में देरी हो रही है। इसके अलावा बुखार, गले में खरास, कोल्ड और अन्य लक्षण वाले लोगों का आरटी पीसीआर परीक्षण करने के बजाय सीटी स्कैन के आधार पर कोरोना का इलाज किया जा रहा है।

 

आइसोलेट होने से बचने और दूसरों के ताने सुनने से बचने के लिए काफी मरीज लक्षण होने के बावजूद परीक्षण कराने से इंकार करते हैं। परीक्षण नहीं होने पर बीमारी का पता करना मुश्किल होता है। राजीव गांधी सरकारी जनरल अस्पताल के डीन डॉ तेरानी राजन ने कहा परीक्षण और इलाज में देरी होने की वजह से खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। अस्पताल में अधिक मौते इस लिए हो रही हैं, क्योंकि परीक्षण में अनावश्यक रूप से देरी की जा रही है। वृद्ध समेत काफी लोग आइसोलेट होने के डर से परीक्षण से पीछे भागते हैं। उम्र और अवसाद समेत अन्य बीमारी की वजह से कोरोना में मौत हो रही है।

 

हमने कैंसर, किडनी और हार्ट की बीमारी वाले कई मरीजों को बचाया है। हम सीटी स्कैन के आधार पर मरीजों का इलाज नहीं करते हैं, बल्कि शारीरिक परीक्षण, रोगी का इतिहास और लैब रिपोर्ट को भी महत्व दिया जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी डिप्टी डायरेक्टर डॉ प्रभदीप कौर ने बताया सीटी स्कैन मरीजों को विकिरण के लिए उजागर करता है। यह उन मरीजों के लिए जरूरी है जो इसे चाहते हैं। लेकिन काफी मरीजों को यह पता नहीं होता है कि अनावश्यक जोखिम से कैंसर भी हो सकता है। पिडेमियोलॉजी डिप्टी डायरेक्टर डॉ। प्रभदीप कौर

Vishal Kesharwani
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