नियमों का उल्लंघन हुआ तो सरकार रियायतों को कर देगी खत्म: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोमवार को कहा कि अगर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया तो पिछले कुछ दिनों से

By: Vishal Kesharwani

Published: 14 Jun 2021, 03:36 PM IST


चेन्नई. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोमवार को कहा कि अगर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया तो पिछले कुछ दिनों से जारी लॉकडाउन में सोमवार से दिए गए रियायत को कभी भी वापस ले लिया जाएगा। अगर राज्य की जनता संयम से काम करते हुए नियमों का उचित पालन करेगी तो आने वाले दिनों में सरकार द्वारा सार्वजनिक सेवाओं और स्कूल व कॉलेज को खुलने की भी अनुमति दे दी जाएगी। यहां जारी एक वीडियो संदेश में स्टालिन ने पिछले कुछ सप्ताह से नियमों का सही से पालन करने को लेकर जनता का आभार जताया। नियमों का सही से पालन करने की वजह से ही पिछले कुछ दिनों में कोरोना के नए मामलों में काफी हद तक कमी दर्ज की गई है।

 


कुछ सप्ताह पहले राज्य भर में दैनिक आधार पर नए मामलों की संख्या 36 हजार के आस पास थी और विशेषज्ञों का मानना था कि यह संख्या 50 हजार के आसपास भी पहुंच सकती है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने राज्य भर में पूर्व लॉकडाउन करने का तय किया था। सरकार के प्रयासों और जनता की सहायता से कोरोना के नए मामले 15 हजार के आसपास पहुंच गए हैं। स्टालिन ने कहा लॉकडाउन के माध्यम से कोरोना के नए मामलों पर नियंत्रण हुआ है, लेकिन इस पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया गया है। राज्य की जनता अगले कुछ दिनों तक कोविड मानंदडों का पालन करने में ढील ना दे।

 


-धीरे धीरे प्रदान की जा रही रियायत
स्टालिन ने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए जारी लॉकडाउन में धीरे धीरे रियायत प्रदान की जा रही है। इस रियायत का लोगों को दुरुपयोग नहीं करना चाहिए, बल्कि सामाजिक दूरी और अन्य मानदंडों का सख्ती से पालन जारी रखना चाहिए। चाय की दुकान खुल गई है, इसलिए लोगों को चाय की दुकानों पर भीड़ लगाने से बचना चाहिए। वहीं अनावश्यक रूप से बाहर जाने से भी बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा सख्ती से विरोध करने के बावजूद सरकार ने शराब की दुकानों को खुलने की अनुमति दी, क्योंकि सरकार नहीं चाहती है कि शराब पीने के आदतन लोग अरक का उपयोग करें और राज्य में शराब की तस्करी बढ़े।

 


उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी के बीच राज्य सरकार द्वारा शराब की दुकानों को खुलने की अनुमति देने को लेकर पीएमके और भाजपा समेत राज्य के कई अन्य विपक्षी दलों द्वारा डीएमके सरकार की निंदा की जा रही है। पीएमके संस्थापक एस. रामदास ने रविवार को कहा था कि कोरोना महामारी को रोकने के लिए जारी लॉकडाउन के बीच शराब की दुकानों को खुलने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। मुख्यमंत्री का शराब की दुकानों को खोलने को लेकर दिया गया स्पष्टीकरण स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री को अच्छे से पता है कि अगर शराब की दुकाने खोली गई तो मामलों में एक बार फिर से तेजी से वृद्धि होगी। पिछले साल जून में शराब की दुकानों को खोलने के विरोध में स्टालिन ने स्वयं ही प्रदर्शन किया था। मै जानना चाहता हूं कि क्या मुख्यमंत्री पर शराब की दुकानों को खोलने को लेकर दबाव डाला गया?

Vishal Kesharwani
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