तमिलनाडु हो अथवा लंदन बजते हैं हिन्दी गीत : आच्छा

Mukesh Sharma

Publish: Oct, 13 2017 08:31:16 (IST)

Chennai, Tamil Nadu, India
तमिलनाडु हो अथवा लंदन बजते हैं हिन्दी गीत : आच्छा

यदि देश की क्षेत्रीय भाषाओं का सहकार हिन्दी के साथ हो तो दक्षिण में लोग हिन्दी को पूरी तरह अपनाएंगे। हर राज्य भले ही अन्य भाषा अपनाए लेकिन हिन्दी को प

चेन्नई।यदि देश की क्षेत्रीय भाषाओं का सहकार हिन्दी के साथ हो तो दक्षिण में लोग हिन्दी को पूरी तरह अपनाएंगे। हर राज्य भले ही अन्य भाषा अपनाए लेकिन हिन्दी को प्रमुखता दे तो अंगे्रजी को लोग भूलने में समय नहीं लगाएंगे। यह कहना था लेखक एवं व्यंग्यकार बी. एल. आच्छा का। वे यहां टी. नगर स्थित शसुन जैन महिला महाविद्यालय में गुरुवार को आयोजित हिन्दी संगोष्ठी में बतौर विशिष्ट अतिथि वक्तव्य दे रहे थे। लाइफसेल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और राजस्थान पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘कैसे हुआ गत डेढ़ सौ साल में हिंदी का विकास और विस्तार तथा देश-विदेश में हिंदी की क्या स्थिति है?’

विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा हिन्दी के विकास एवं विस्तार में योगदान जितना फिल्म जगत का रहा उतना किसी का नहीं रहा। क्योंकि हिन्दी फिल्मों के संवाद, गाने व धारावाहिकों की लोकप्रियता देश-विदेश में है जिससे लोगों में हिन्दी सीखने के प्रति ललक बढ़ती है। किसी न किसी रूप में हिन्दी ने अपनी क्षेत्रीयता को बरकरार रखा है। क्षेत्रीय भाषाओं का भी हिन्दी के विस्तार में महती योगदान है। उन्होंने कहा विदेशों में भी लोग अपने कार्यक्रमों में हिन्दी गाने अपनाते हैं जिनमें बैंड भी स्थानीय होता है। साथ ही आच्छा ने बताया कि विश्व के १३२ देशों में हिन्दीभाषी प्रवासित हैं, इनमें १५ से २० देशों में हिन्दी बोली जाती है जबकि फीजी में तो यह राष्ट्रभाषा के समान स्थान है।

संगोष्ठी की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं नवकार मंत्र से हुई। स्वागत भाषण कॉलेज प्राचार्य बी. पूर्णा ने दिया। राजस्थान पत्रिका चेन्नई के संपादकीय प्रभारी पी. एस. विजयराघवन ने अतिथियों का परिचय दिया। माम्बलम जैन संघ के उपाध्यक्ष डा. उत्तमचंद गोठी ने हिन्दी को लेकर अपने अनुभव भी बांटे।

लाइफसेल इंटरनेशनल के चेयरमैन अभयकुमार श्रीश्रीमाल ने अध्यक्षीय भाषण में कहा, हिन्दी साहित्य का ज्ञान न होते हुए भी उनकी रुचि सदैव उसमें बनी रही। आज भारत में ही नहीं विदेशों में हिंदी की बढ़ती मांग इस बात को दर्शाती है कि आने वाला समय हिन्दी का ही होगा। उन्होंने कहा राजस्थान पत्रिका हिन्दी के क्षेत्र में अनेक सराहनीय कार्य कर रहा है।

मुख्य अतिथि प्रसिद्ध नृत्यांगना श्रीमती सरस्वती ने कहा हिन्दी दुनिया भर में बोली जाने वाली भाषा है। यह मीठी एवं सरल भाषा है जिससे सोच एवं विचारों का आदान-प्रदान आसानी से हो सकता है। हिन्दी ऐसी भाषा है जिसमें अनेक भाषाओं के शब्दों ने भी स्थान पाया है। उन्होंने कहा यदि प्रयास करें तो हम देश में हिन्दी को अच्छा स्थान दिलाने में सफल हो सकते हैं।
भाषाओं का होता विकास

विशिष्ट अतिथि गुरु नानक कॉलेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष स्वाति पालीवाल ने कहा भाषाओं का जन्म नहीं विकास होता है जो समाज और संस्कृति से होता है। उन्होंने कहा मीडिया, फिल्मों, धारावाहिकों का हिन्दी भाषा के विस्तार में खास योगदान है। संप्रेषण में महत्वपूर्ण योगदान भाषा का ही है। महात्मा गांधी ने देश को जोड़े रखने के लिए हिन्दी को महत्वपूर्ण कड़ी बताया तथा कहा कि हिन्दी सीखना हर भारतीय का धर्म है।

हिन्दी को अनेक साहित्यकारों ने पुष्पित-पल्लवित किया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भी अपना व्यवसाय जमाने के लिए हिन्दी का सहारा लिया था। हिन्दी लगातार व्यापक रूप में फल-फूल रही है। यह एक ऐसा बहता हुआ नीर है जिसमें अनेक भाषाएं समाहित हैं।

हिन्दी अवश्य अपनाएं

राजस्थान पत्रिका के जोनल प्रबंधक जोस पी. ने कहा बोलचाल की भाषा में हिन्दी का विस्तार आसानी से होता है। यह सबसे सरल भाषा है जिसे हर कोई सीख सकता है।
भले अनेक भाषाएं सीखें एवं किसी भी राज्य में रहें लेकिन हिन्दी अवश्य अपनाएं। हिन्दी ने चेन्नई ही नहीं बल्कि पूरे तमिलनाडु में प्रसार पाया है। राजस्थान पत्रिका हिन्दी के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राजस्थान पत्रिका यहां समाज के हर कार्यक्रम की खबर जनता तक पहुंचाता रहा है और रहेगा। साथ ही कहा हिन्दी को प्राथमिकता देने के साथ ही अन्य भाषाएं भी सीखें। इस मौके पर अतिथियों का सम्मान किया गया।

संगोष्ठी का संचालन शसुन कॉलेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. हर्षलता शाह ने किया। इस दौरान ‘अंतिम तीन दशक के हिन्दी नाटक’ पुस्तक का विमोचन भी हुआ।

संगोष्ठी में ये भी थे उपस्थित

प्रयास संस्था के प्रमुख गौतम खारीवाल, करुणा इंटरनेशनल के दुलीचंद जैन, महावीर इंटरनेशनल दिवा की उपाध्यक्ष सुनिता खारीवाल, माम्बलम संघ के कोषाध्यक्ष राजमल नाहटा, मंत्री महेंद्र गादिया, ज्ञानचंद कोठारी, हिन्दी विभाग की डा. सरोज सिंह, डा. कुलजीत कौर, डा. ज्योति एवं बड़ी संख्या में कॉलेज छात्राएं उपस्थित थी।

 

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