scriptTamil Nadu's packaged water units facing serious troubles | तमिलनाडु की पैकेज्ड वॉटर यूनिट्स गंभीर संकटों का कर रही सामना | Patrika News

तमिलनाडु की पैकेज्ड वॉटर यूनिट्स गंभीर संकटों का कर रही सामना

पिछले काफी सालों से तमिलनाडु, विशेष रूप से चेन्नई, ज्यादातर पैकेज्ड पेयजल पर निर्भर रहा है। पानी की उपलब्धता

चेन्नई

Updated: November 08, 2021 05:36:55 pm


-महामारी के बाद से स्थिति बदतर
चेन्नई. पिछले काफी सालों से तमिलनाडु, विशेष रूप से चेन्नई, ज्यादातर पैकेज्ड पेयजल पर निर्भर रहा है। पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता में खराब ट्रैक रिकॉर्ड वाले राज्य में पेयजल इकाइयों को एक वरदान के रूप में माना गया है। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से उद्योग अब संकट में है। ग्रेटर तमिलनाडु पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर एसोसिएशन के महासचिव ई. सरवणन ने बताया कि कोरोना महामारी से पहले एक इकाई द्वारा रोजाना 1 हजार कैन तैयार किया जाता था, लेकिन महामारी के बाद दैनिक रूप से सिर्फ 300 से 400 कैन तैयार किए जा रहे हैं। इस प्रकार से मांग में कम से कम 60 फीसदी गिरावट आई है।

तमिलनाडु की पैकेज्ड वॉटर यूनिट्स गंभीर संकटों का कर रही सामना
तमिलनाडु की पैकेज्ड वॉटर यूनिट्स गंभीर संकटों का कर रही सामना

हालांकि यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि यह कितना बड़ा है, लेकिन उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि अकेले चेन्नई का वॉटर-बॉटलिंग उद्योग दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग है। सूत्रों के अनुसार रीसाइक्लिंग, उत्पादन और आपूर्ति सहित इसकी सभी शाखाओं को ध्यान में रखते हुए बॉटलिंग सेक्टर का राजस्व लाखों रुपए में चलता है। इस प्रकार से मांगों में 60 फीसदी गिरावट आने की वजह से हजारों लोगों की आजीविका दांव पर लगी है।


-तीन वक्त का खाना मिलना हो रहा मुस्किल
सरवणन ने बताया कि एक समय था कि लोग आपूर्ति में लग कर घर खरीदने के साथ ही अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करते थे, लेकिन अब तीन वक्त का खाना जुटाने में भी असमर्थ हैं। अब पानी उद्योग को छोड़कर अधिकांश लोग शॉप्ट ड्रिंक यूनिट में जा रहे हैं। महामारी ने अकेले उद्योग को नीचे नहीं लाया है, बल्कि छोटे पानी के टैंकरों की भी भूमिका रही है। कई यूनिट मालिकों का कहना है कि इस टैंकरों को रेगुलेट किया जाना चाहिए। वे लोग पानी को शुद्ध बताकर बेचते हैं, लेकिन इसकी गुणवत्ता जांचने के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है।

एफएसएसएआई और आईएसआई अधिकारियों का कहना है कि वे खुले पानी को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उनके दायरे में सिर्फ पैकेज्ड पानी ही आता है। ग्रेटर तमिलनाडु पैकेज्ड डिं्रंकिंग वॉटर एसोसिएशन के अध्यक्ष जे. अनंता नारायण ने बताया कि पहले राज्य में केवल 12 हजार से 20 हजार लीटर के टैंकर ही चलते थे, लेकिन मांग में वृद्धि के बाद 1 और 2 हजार लीटर क्षमता के टैंकरों ने भी परिचालन शुरू कर दिया है। महामारी के बाद लगभग 50 प्रतिशत कार्यालय ने काम करना शुरू नहीं किया है और काम करने वालों में से कुछ इन टैंकरों का चयन कर रहे हैं। ऐसे में उद्योग में जारी रहना मुस्किल हो रहा है।


-डीजल की कीमतों में वृद्धि भी बन रहा कारण
उन्होंने कहा कि डीजल की कीमतों में वृद्धि, श्रमिकों की कमी और सरकारी सहायता की कमी जैसे मुद्दे भी कारण बन रहे हैं। तमिलनाडु की पैकेज्ड पेयजल पर निर्भरता आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों की तुलना में कम से कम 50 प्रतिशत अधिक है।

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