टीएनएजीएआर में देश का प्रथम निशुल्क नैनो आयुष स्वास्थ्य शिविर लगाया

टीएनएजीएआर में देश का प्रथम निशुल्क नैनो आयुष स्वास्थ्य शिविर लगाया

Mukesh Sharma | Publish: Jun, 14 2018 10:37:07 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

डीएनए आयुष सुविधा चेन्नई एवं अभूषा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में टी.नगर में नीलकंठ मेहता स्ट्रीट में देश का प्रथम निशुल्क नैनो आयुष...

चेन्नई।डीएनए आयुष सुविधा चेन्नई एवं अभूषा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में टी.नगर में नीलकंठ मेहता स्ट्रीट में देश का प्रथम निशुल्क नैनो आयुष स्वास्थ्य शिविर लगाया गया है जिसकी गुरुवार को शुरुआत हुई। २६ मई तक सवेरे 10.00 बजे से अपराह्न 12.00 बजे और सायं 4.00 से 7.00 बजे तक चलने वाले इस शिविर में जाने-माने आयुर्वेदिक चिकित्सक एवं एमडी (आयुर्वेद) डा. सीएम जोशी द्वारा कैंसर, संधिशोथ, सेप्सिस, ऑस्टियोपोरोसिस, निमोनिया, क्षय रोग और अन्य कई महत्वपूर्ण रोगों का निशुल्क प्राकृतिक विधि से उपचार करेंगे।

उन्नत नैनो टेक्नोलॉजी और आयुर्वेद का प्रयोग जादू नैनो डिलीवरी सिस्टम (एमएनडी) के रूप में वर्णित अद्वितीय प्राकृतिक उपचार के लिए पंजीकृत करवाना होगा। पंजीकरण पहले की चिकित्सा रिपोर्ट के साथ होना चाहिए। गौरतलब है कि धनवंतरी नैनो औषधि (डीएनए) एक ग्रीन नैनो टेक्नोलॉजी पर शोध केंद्रित अग्रणी नैनो आयुर्वेद कंपनी है जो आयुष सुविधा द्वारा संचालित होती है। इस कंपनी द्वारा उत्पादित सभी उत्पाद पूरी तरह से प्राकृतिक हैं और बिना सिंथेटिक संरक्षक के हैं। डीएनए द्वारा निर्मित सभी उत्पाद विभिन्न महत्वपूर्ण स्थितियों के इलाज के लिए जादू नैनो वितरण प्रणाली में प्रयोग में आते हैं।

अपनी संतानों को समझ दें, न कि सत्ता और संपत्ति

सईदापेट जैन स्थानक में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा गुस्सा सभी कम करना चाहते हैं लेकिन उसे पूर्ण रूप से बंद नहीं करना चाहते। संसार में भटकने का एक ही कारण है कि हम पाप कम करना चाहते हैं लेकिन बंद नहीं करना चाहते।

जितना प्रयास हम गुस्से को कम करने में लगाते हैं, उतना प्रयास यदि हम उसे बंद करने में या छोड़ देने में लगाते तो हमें इससे पूर्ण छुटकारा मिल जाता। सभी लोग कर्म करने से मुक्ति नहीं चाहते, पाप से मुक्ति चाहते हैं। जब व्यक्ति इस संसार में जन्म लेता है तो उसके पुण्य के साथ-साथ पाप कर्म भी साथ में आते हैं। पुण्य अकेला नहीं आता, वह पाप को भी साथ लेकर आता है। इसके लिए हमें स्वयं को बदलना होगा और बुराइयों को आंशिक रूप से छोडऩे का प्रयास करने के बजाय पूर्ण रूप से त्यागने का कार्य करना चाहिए।

उन्होंने अभयकुमार का उदाहरण देकर बताया कि उसके पाप कर्मों के फल के कारण उसका जन्म कसाई के घर हुआ लेकिन उसने अपने पाप कर्मों के फल को भी पुण्य में बदल दिया। अभिभावकों से कहा यदि आप अपनी संतति के लिए अभयकुमार जैसा बनकर जीएं वह चाहे जैसा पाप वह लेकर इस संसार में आया होगा, उसकी जिंदगी में उजाला हो जाएगा। तुम्हारी और अपने बच्चों की गति और मति सुधर जाएगी।
सभी माता-पिता अपनी संतति को सत्ता, संपत्ति और पैसा देते हैं लेकिन समझ नहीं देते। बिना समझ के यदि सत्ता और संपत्ति प्राप्त हो गई तो नुकसान ही नुकसान है। अपनी समझदारी का उपयोग करने वाला ही जीवन में सफल होता है।

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