सादगी में ही मनुष्य की शालीनता का निवास है

अपने जीवन को को महाविनाश के गर्त में जाने से बचाना है तो महावीर की वाणी को अमल में लाना होगा : कपिल मुनि

By: Santosh Tiwari

Published: 18 Dec 2018, 05:54 PM IST

चेन्नई. मईलापुर में वेदान्त देसिकर स्ट्रीट स्थित आलोक गोलेछा के निवास स्थान पर कपिल मुनि कहा आज विश्व ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां दो ही विकल्प है महावीर या महाविनाश। अपने जीवन को को महाविनाश के गर्त में जाने से बचाना है तो महावीर की वाणी को अमल में लाना होगा। यह वाणी प्रदर्शन से उपरत होकर आत्म दर्शन की पवित्र प्रेरणा प्रदान करती है। आडम्बर, फैशन परस्ती, दुर्व्यसन और अनाचार आदि न मालूम कितने अवगुण आज के सभ्य समाज में फैले हुए हैं ये हानिकारक हैं, इनसे आये दिन अनेकों कष्ट, मुसीबत और आपदायें मनुष्य को घेरे रहती हैं पर इनसे भी अधिक शक्तिशाली और अनेकों अवगुणों का जनक यह मिथ्या आडम्बर है।

अपनी अल्प विकसित अवस्था में भी मनुष्य सुखी रह सकता है, संतोष प्राप्त कर सकता है। किन्तु जैसे ही मिथ्या आडम्बर और अपने को बढ़ा चढ़ा कर प्रदर्शित करने की भावना मनुष्य में प्रविष्ट हुई कि उसके जीवन में दुर्दशा प्रारम्भ हुई। सामाजिक जीवन में आज जो विशृंखलता दिखाई दे रही है उसका कारण यही है कि मनुष्य अपना असली चेहरा छिपा कर नकली नकाब चढ़ाये बैठा है। लोग समझते हैं कि जितना ही अधिक अपने आप को प्रदर्शित करेंगे उतनी ही हमारी औकात बढ़ेगी, सम्मान बढ़ेगा, मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। पर यह भूल जाते हैं कि हम जिस समाज में पलकर इतने बड़े हुए उससे हमारी वस्तु स्थिति छिपी नहीं है। कदाचित ऐसा भी हो जाए तो काठ की हाँडी कितने दिन आँच सहेगी। आखिर जिस दिन टूट गई उस दिन अभी तक जितना सम्मान नहीं मिला, उससे कही अधिक लज्जा,आत्मग्लानि, अविश्वास और उपहास का सामना करना पड़ेगा। पोल खुलती है तो मनुष्य अपना मुँह छिपाने लायक नहीं रहता फिर क्या आवश्यकता है कि हम मिथ्या आडम्बर प्रदर्शित करें।

मुनि श्री ने कहा कि हमारे जीवन की दुर्दशा का कारण आज यही है कि लोग अपनी हैसियत से अधिक अपने आप को प्रदर्शित करना चाहते हैं। इसके लिये चाहे कितने अनैतिक अपराध करने पड़ें। भीतर-भीतर बढ़ते हुए इस प्रकार के अपराधों के कारण ही भ्रष्टाचार, दुराचार, और मिथ्याचार बुरी तरह बढ़ रहा है। मनुष्य की शालीनता उसकी सादगी में होती है। सद्विचार और सादगी का परस्पर का अत्यन्त निकट का सम्बन्ध होता है। जहां सादगी होगी वहीं सत्कर्म होंगे, जहाँ सत्कर्म होंगे वही सुख और सुव्यवस्था होगी। प्रेम, एकता और विकास के अनेकों साधन अपने आप मिलते चले जाएंगे।

Santosh Tiwari Desk
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