प्रभावी निगरानी की खास आवश्यकता

- मेट्रो शटल सेवा

By: Santosh Tiwari

Updated: 07 Jan 2019, 01:37 PM IST

चेन्नई. चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड संभवत: इस वर्ष अपना पहला चरण पूरा कर लेगा। एजी-डीएमएस से लेकर तिरुवत्तीयूर तक को जोडऩे के लिए निर्माण कार्य त्वरित गति से चल रहा है। फिलहाल इसे सेंटल मेट्रो तक जोडऩे की कवायद तेजी से चल रही है। पूर्व की तुलना में मेट्रो यात्रियों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। कहना नहीं होगा कि इसमें सीएमआरएल की प्रभावी विपणन और प्रचार योजनाओं का भी बराबर का योगदान है।
मेट्रो को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रबंधन ने कई कदम उठाए हैं जिनमें इनकी शटल सेवा भी प्रमुख है। अब आपको मेट्रो स्टेशन से तीन से चार किमी की दूरी के लिए एसी कार में १० रुपए ही खर्च करने पड़े तो इससे सस्ता सौदा और क्या हो सकता है भला? जबकि शेयर ऑटो का भाड़ा तो महज ५ रुपया है। लिहाजा यात्रियों की संख्या बढऩे लगी।
मेट्रो रेल के एक अधिकारी के अनुसार पहले यह भाड़ा क्रमश: १५ और दस रुपए था जिसे पांच-पांच रुपया घटाया गया। इसके बाद तो यात्रियों की संख्या लगभग दुगुनी हो गई जो कि अच्छा संकेत है। शटल के अलावा कुछ चुनिन्दा स्टेशनों पर भाड़े पर साइकिलें भी उपलब्ध हंै। इनका भी उपयोग हो रहा है।
नंगनल्लूर रोड से नंदनम रोजाना सफर करने वाले एक यात्री के अनुसार नंदनम से उनका ऑफिस दो किमी की दूरी पर है। पहले मेट्रो स्टेशन से उनके ऑफिस तक जाने के लिए ऑटो में साठ रुपए लग जाते थे। साठ रुपए से ज्यादा ऑटो चालकों से सुबह के वक्त मोलभाव करने में जो समय व्यर्थ जाता वह खटकता था। अब घर से ऑफिस तक की यात्रा मेट्रो और शटल सेवा की वजह से आरामदायक और कम खर्चीली हो गई है।
शटल सेवा के उपयोगकर्ता
सीएमआरएल के दावे कि शटल सेवा के उपयोगकर्ताओं की संख्या दुगुनी हुई है में एक सवाल यह उठता है कि क्या वाकई मेट्रो रेल सेवा के यात्री ही इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं? मेट्रो स्टेशन पर शटल सेवा में चढऩे वाले यात्रियों की कोई पड़ताल नहीं होती कि अमुक व्यक्ति क्या मेट्रो ट्रेन का यात्री है? ऐसे में अगर सामान्य यात्री इस सेवा का लाभ ले रहे हैं तो उससे सीएमआरएल को कोई ज्यादा फायदा नहीं होने वाला है। सीएमआरएल को इसकी भली-भांति जांच करनी होगी कि शटल सेवा के उपयोग का लाभ उसके यात्रियों को मिले।
कुछ मार्ग पर शटल सेवा के चालक यात्रियों को टोकन भी नहीं देते। एक यात्री ने बताया कि वह एजी-डीएमएस से स्पेंसर प्लाजा के लिए शटल कार में चढ़ा। उसने दस रुपए चालक को दिए लेकिन बदले में टोकन नहीं दिया गया। चालक का कहना था कि जब तक सवारी मांगेगी नहीं वे नहीं देंगे। ऐसे में सही आंकड़ों का पता नहीं चलता।
रखते हैं निगरानी
सीएमआरएल के एक अधिकारी से जब इस बारे में पूछा गया तो वे बोले कि कार व ऑटो चालकों पर निगरानी रखी जाती है। कभी-कभार तो अधिकारी स्वयं यात्री बनकर इन सेवाओं में सफर कर हकीकत की जांच करते हैं। मेट्रो स्टेशन के बाहर लगे कैमरों से भी यह देखा जाता है कि इन सेवाओं में चढऩे वाले यात्री कौन हैं? जल्द ही शटल चालकों को हैंड डिवाइस देने की भी योजना है। अधिकारी का यह दावा भी हवा ही लगता है क्योंकि मेट्रो स्टेशन से बाहर आकर भी शटल में चढ़ा जा सकता है। इससे बेहतर यह होगा कि मेट्रो स्टेशन के भीतर से ही उनको टोकन दिया जाए।

 

Santosh Tiwari Desk
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