गरीबों के आंसू पोछने से बड़ा कोई पुण्य नहीं होताः राज्यपाल

-महावीर अवार्ड वितरण समारोह
-8 संस्थाओं एवं दो व्यक्तियों को दिया गया महावीर अवार्ड

By: Santosh Tiwari

Published: 30 Jan 2021, 02:03 PM IST

चेन्नई.
भगवान महावीर फाउंडेशन की ओर से रविवार को भवन्स राजाजी विद्याश्रम में महावीर अवार्ड वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गरीबों के आंसू पोछने से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। जिन संगठनों को यहां पुरस्कार दिया गया है, ऐसी संस्थाओं के पहचान का कार्य बड़ा कठिन है। ये संगठन समाज के राल माडल है। इनसे बहुत लोगों को समाज की निःस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरणा मिलेगी। इन्होंने समाज सेवा का बड़ा कार्य किया है। उन्होंने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। राज्यपाल ने संग्रह न करने एवं साधारण जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए कहा कि अहिंसा परम धर्म है। पूरा देश अहिंसा से स्वतंत्र हुआ है। भगवान महावीर ने हमें जीओ और जीने दो की शिक्षा दी। यही हर समस्या का समाधान है। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेबी के पूर्व चेयरमैन डी.आर.मेहता ने की। उन्होंने अवार्ड विजेताओं की बधाई देते हुए उनके सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये सभी विशेष एवं अलग लोग हैं। इनमें सेवा का भाव है।
इससे पहले प्रबंध न्यासी प्रसन्नचंद जैन ने सभी का स्वागत किया। ट्रस्टी प्रमोद जैन ने भगवान महावीर फाउंडेशन की गतिविधियों पर रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन ने 26 साल पूरा किया है, अब तक 76 महावीर अवार्ड दिए जा चुके हैं। प्रतीक जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इन्हें दिया गया पुरस्कार
समारोह में 21 वें महावीर अवार्ड के तहत शिक्षा के लिए आनन्द कुमार, 22 वें महावीर अवार्ड के तहत शाकाहार के लिए फेडरेशन आफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन आरगेनाइजेशन, शिक्षा के लिए श्री पंचमहल अनुसूचित जाति एजुकेशन ट्रस्ट, मेडिसिन के लिए जीवोदया पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्ट, सामाजिक सेवा के लिए ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान एवं वूमन सोशियल एन्टरप्रेनियर के तहत श्यामलता मोहन राज को दिया गया। 23 वें महावीर अवार्ड के तहत शाकाहार में बाबा पल्ला सिंह गोशाला, शिक्षा में मानव कल्याण ट्रस्ट, मेडिसिन में पेन एंड पलिएटिव केयर सोसायटी तथा सामाजिक सेवा के लिए सेवाधाम आश्रम को दिया गया।
गौरतलब है कि भगवान महावीर फाउंडेशन की स्थापना 1994 में एन सुगलचंद जैन द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार अहिंसा और शाकाहार, शिक्षा, चिकित्सा और सामुदायिक और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में मानवीय प्रयासों में उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है। पुरस्कारों में प्रत्येक को स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र के साथ 10 लाख रुपए की राशि दी गई।
ये थे उपस्थित
इस मौके पर पूर्व चुनाव आयुक्त टी.एस.कृष्णमूर्ति, तुगलक पत्रिका के संपादक एस.गुरुमूर्ति, सुगालचंद जैन, कैलाशमल दुगड़, कमल लुणावत एवं दिलीप कुमार समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

Santosh Tiwari Desk
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