स्टालिन, कनिमोझी, तिरुमावलवन सहित 3 हजार से भी अधिक गिरफ्तार

Mukesh Sharma

Publish: Jun, 14 2018 10:52:00 PM (IST)

Chennai, Tamil Nadu, India
स्टालिन, कनिमोझी, तिरुमावलवन सहित 3 हजार से भी अधिक गिरफ्तार

तुत्तुकुड़ी हिंसा में हुई१३ लोगों की मौत की आलोचना और राज्य के मुख्यमंत्री एडपाडी के. पलनीस्वामी के इस्तीफे की मांग को लेकर...

चेन्नई।तुत्तुकुड़ी हिंसा में हुई१३ लोगों की मौत की आलोचना और राज्य के मुख्यमंत्री एडपाडी के. पलनीस्वामी के इस्तीफे की मांग को लेकर डीएमके के नेतृत्व में शुक्रवार को राज्यभर में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में डीएमके के अलावा कांग्रेस, आईयूएमएल, एमडीएमके, वीसीके, सीपीआई, सीपीआई-एम और एमएमके सहित कई अन्य पार्टी पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। राज्य सरकार की विफलता की आलोचना करते हुए सईदापेट और एगमोर सहित राज्य के अन्य इलाकों में प्रदर्शन किया गया। चेन्नई के पूर्व मेयर और डीएमके नेता एम. सुब्रमण्यम, पार्टी राज्यसभा सांसद कनिमोझी, वीसीके प्रमुख तिरुमावलवन, एमएमके नेता एम.एच. जवाहिरुल्लाह सहित अन्य उच्च पदाधिकारियों ने प्रदर्शन कर सरकार की आलोचना की।

मदुरांतकम में प्रदर्शन करने के आरोप में पुलिस ने डीएमके कार्यकारी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। इसी प्रकार सईदापेट में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कनिमोझी और तोल तिरुमावलवन सहित ३ हजार से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्त में ले लिया। इसी प्रकार विपक्षी दलों द्वारा महानगर में ३० से अधिक जगहों पर प्रदर्शन किया गया।

संवाददाताओं बातचीत में कनिमोझी ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार अपने मतलब का काम कर रही है ऐसे में पलनीस्वामी को तुत्तुकुड़ी हिंसा का जिम्मेदार ठहराना चाहिए। उन्होंने कहा हिंसा के बावजूद स्टरलाइट के सीइओ ने प्लांट बंद नहीं करने का दावा किया है लेकिन सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया।


पुलिस अधिकारियों ने बताया कि महानगर में बंद का ज्यादा असर नहीं दिखा। होटल और अन्य दुकानें सामान्य रूप से संचालित हुई। एमटीसी सहित लंबे सफर पर जाने वाली बसों को सामन्य रूप से संचालित किया गया। विपक्षी दलों के प्रदर्शन को गंभीरता से लेते हुए राज्य की एआईएडीएमके सरकार द्वारा पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए २० हजार से भी अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। मरीना बीच, डीजीपी कार्यालय और राज्य सचिवालय के पास भी सुरक्षा बढाई गई थी।

डीएमके विधायकों की बैठक २८ को

विधानसभा सत्र को गंभीरता से लेते हुए डीएमके ने २८ मई को पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई है। बैठक में सत्र के दौरान उठाए जाने वाले सवालों पर चर्चा की जाएगी।

इंटरनेट बैन होने से बढ़ी लोगों की परेशानी

जिले में स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद लगाई गई धारा 144 के साथ ही बुधवार से तीन जिलों में पांच दिन के लिए इंटरनेट बैन कर दिया गया था। हालांकि शुक्रवार को कन्याकुमारी तथा तिरुनेलवेली जिले में इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई। यह मामला हाईकोर्ट में भी पहुंचा था जिसके बाद सरकार ने यह फैसला किया है। तुत्तुकुडी में अभी भी ये सेवाएं बंद हैं।

हालांकि बंद की वजह से राज्य सरकार डिजीटाइजेशन के विकास की दिशा में जो कार्य कर रही थी, इस एक फैसले से उसे झटका लगा है। जिले में इंटरनेट बैन के साथ ही यहां के लोग राज्य को दो दशक पिछड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भडक़ाऊ संदेश और अफवाहें फैलने के चलते अपर मुख्य सचिव ने बुधवार को पांच दिन के लिए तुत्तुकुड़ी, तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी जिलों में इंटरनेट सर्विस बैन करदी थी। सरकार के इस फैसले से सडक़ों पर अब जरूर सन्नाटा पसरा है लेकिन घरों में कैद लोग नाराज हैं। सेवानिवृत्त पीडब्ल्यूडी इंजीनियर कुमार मुत्तुस्वामी अपनी पत्नी के लिए मदुरै से चेन्नई के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट बुक कर रहे थे लेकिन इंटरनेट बैन होने के चलते उनकी सारी कोशिश बेकार हो गई। इंटरनेट बैन के फैसले पर झल्लाते हुए वे कहते हैं, गुरुवार को मेरी पत्नी को हांगकांग से डेढ़ बजे चेन्नई पहुंचना था।

फ्लाइट में तकनीकी रूप से खामी आने की वजह से फ्लाइट करीब सवा चार बजे चेन्नई के बजाय मदुरै एयरपोर्ट पर लैंड हुई। उन्होंने बताया कि अगली फ्लाइट काफी लेट थी और इंटरनेट सर्विस न होने की वजह से मैं ऑनलाइन फ्लाइट बुक नहीं कर सका। ऐसे में कन्याकुमारी निवासी मुत्तुस्वामी ने आखिरकार चेन्नई में अपने दोस्त को कॉल कर टिकट बुक करने को कहा। सरकार एक ओर कैशलेस इकोनामी पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर इंटरनेट बैन कर जनता की परेशानी बढ़ा रखी है। इंटरनेट के अभाव में कार्ड स्वाइपिंग मशीनें काम नहीं कर रही हैं, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन भी फेल हो रहा है।

तिरुनेलवेली में रिटायर्ड स्कूल टीचर 62 वर्षीया शिवगामी का कहना है मुझे चेन्नई में अपनी बहन को तुरंत पैसे भेजने थे। यूएस में रह रहे उनके बच्चों ने बैंक की लंबी लाइन में लगने के बजाय ऑनलाइन बैंकिंग सिखाई थी लेकिन इंटरनेट न होने की वजह से उसे अपना डेबिट कार्ड देकर पैसे निकालकर बहन के खाते में जमा करने के लिए पड़ोसी पर निर्भर होना पड़ा।

स्टूडेंट्स को भी इंटरनेट बैन की वजह से दिक्कतें आ रही हैं। एमएस यूनिवर्सिटी के एक रिटायर्ड प्रोफेसर डी. षणमुगनाथन कहते हैं, हमारे स्टूडेंट्स को भी इंटरनेट बैन होने के चलते परेशानी झेलनी पड़ रही है क्योंकि हमारी तथाकथित लोकतांत्रिक सरकार केस दर केस गलत सूचना फैलाने वाले को पकडऩे में असमर्थ है इसलिए उसने इंटरनेट बैन का सहारा ले लिया।

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