यहां जाति फैक्टर अहम, जीत में निभाएंगे मुख्य भूमिका

यहां जाति फैक्टर अहम, जीत में निभाएंगे मुख्य भूमिका
- नाडार व थेवर समुदाय का वजूद
- तिरुनेलवेली लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा इलाकों में एआईएडीएमके व डीएमके के तीन-तीन विधायक

By: Ashok Rajpurohit

Updated: 20 Feb 2021, 07:33 AM IST

तिरुनेलवेली (तमिलनाडु). तमिरबरनी नदी के पास बसा तिरुनेलवेली में चुनावी हलचल अब धीरे-धीरे हिलोरे लेने लगी है। हर चुनाव में यहां जाति फैक्टर हावी होता रहा है। इस बार भी नाडार एवं थेवर समुदाय चुनाव में अहम भूमिका निभाएगा। जिले में नाडार समुदाय करीब 25 फीसदी है। ऐसे में हर चुनाव में नादडर समुदाय की भूमिका अहम रहती है। दलित, थेवर, पिल्ले, मुस्लिम आबादी भी अच्छी संख्या में है। ऐसे में चाहे एआईएडीएमके हो, डीएमके हो या फिर अन्य क्षेत्रीय या राष्ट्रीय दल। वे जातियों को साधने पर खासा फोकस रखते हैं। हकीकत यह है कि अमूमन हर चुनाव में राजनीतिक पार्टियां जातिगत आधार पर प्रत्याशियों के चयन को वरीयता देती रही है।
पर्यटन की विपुल संभावनाएं
हलवे के लिए खासा प्रसिद्ध तिरुनेलवेली कई ऐतिहासिक स्थलों को समेटे हुए है। यहां शिक्षा के कई संस्थान है। मणिमुथार डैम, अगस्तियार फॉल्स, कोर्टलाम फॉल्स, कोर्टलाम मंदिर समेत कई पर्यटन स्थल लोगों के आकर्षण का केन्द्र रहे हैं। पर्यटन के लिए असीन संभावनाएं होने के बावजूद अधिकांश राजनीतिक दल इस दिशा में काम करने को अधिक तरजीह नहीं देते। तिरुनेलवेली में खेती के अलावा, पर्यटन, बैंकिंग, खेती से जुड़ी मशीनरी, आईटी और शिक्षा जगत से जुड़ी सेवाओं से ज्यादातर लोग जुड़े हुए हैं। बीड़ी बनाने के काम में बड़ा समूह जुड़ा हुआ है।
गठबंधन के बाद तस्वीर होगी साफ
तिरुनेलवेली लोकसभा क्षेत्र 1951 से हैं। तिरुनेलवेली एआईएडीएमके का गढ़ रहा है। कांग्रेस भी यहां अच्छी स्थिति में रही है। यदि लोकसभा सदस्य की बात की जाएं तो एआईएडीएमके 11 तथा कांग्रेस पांच बार जीत चुकी है। 2008 में हुए परिसीमन के बाद सभी छह विधानसभा क्षेत्र तिरुनेलवेली जिले से ही है। लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में यहां अक्सर अलग-अलग परिदृश्य देखने को मिलता रहा है। इस बार कांग्रेस एवं भाजपा सरीखे राष्ट्रीय दल जिस तरह से दक्षिण तमिलनाडु में लगातार फोकस कर रहे हैं, ऐसे में क्षेत्रीय दलों की परेशानी बढ़ गई है। हालांकि यह बहुत कुछ गठबंधन पर निर्भर करेगा। अभी गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले दिनों देवेन्द्रकुल्ला वेलालर समुदाय को एक छत के नीचे लाने की घोषणा भी इस चुनाव में असर डाल सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार द्रविड़ पार्टियां खूब वादे करती है लेकिन चुनाव के बाद सब भुला दिया जाता है।
रोजगार का अभाव, ढांचागत सुविधाओं की कमी
इलाके में रोजगार का अभाव नजर आता है। पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार है। इस कारण पलायन भी बढ़ा है। इलाके में ढांचागत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। ऐसे में जिस ढंग से आगे बढ़ना था उस अनुपात में विकास नहीं हो सका है। इलाके में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां विकास की खूब गुंजाइश भी नजर आती है लेकिन राजनेताओं ने उस तरफ इतना ध्यान नहीं दिया।
मतदाताओं का रूख साफ नहीं
मौजूदा समय में तिरुनेलवेली लोकसभा क्षेत्र के अधीन आने वाले छह विधानसभा क्षेत्रों में एआईएडीएमके तथा डीएमके के तीन-तीन विधायक है। एआईएडीएमके व डीएमके के साथ ही कांग्रेस के प्रति भी वोटर्स का झुकाव रहा है। इलाके में टीटीवी दिनकरण का भी अच्छा प्रभाव है। लेकिन इस बार एआईएडीएमके व डीएमके दोनों दलों में बड़े नेता का अभाव देखने को मिल रहा है। एआईएडीएमके में जयललिता एवं डीएमके में करुणानिधि की कमी इस बार खलेगी। ऐसे में मतदाता किस तरफ रूख करता है, यह आने वाले दिनों में ही साफ हो सकेगा।
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तिरुनेलवेली लोकसभा क्षेत्र के अधीन विधानसभा क्षेत्र व मौजूदा विधायक
तिरुनेलवेली- एएलएस लक्ष्मणन (डीएमके)
पलयमकोट्टै-टीपीएम मोईदीन खान (डीएमके)
अलन्गुलम-डॉ. पुंगोदै अलादि अरुणा (डीएमके)
अम्बासमुद्रम-आर. मुरगैया पांडियन (एआईएडीएमके)
नन्गुनेरी-वी. नारायणन (एआईएडीएमके)
राधापुरम- आई.एस. इन्बादुरै (एआईएडीएमके)
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Ashok Rajpurohit
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