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Ukraine : मेडिकल की सस्ती पढ़ाई Indian छात्रों को करती आकर्षित

Ukraine : यूक्रेन में २० विश्वविद्यालय हैं। छह साल के मेडिकल कोर्स के लिए सालाना तमिलनाडु से ही १२०० से १५०० विद्यार्थी जाते हैं। यूक्रेन में मेडिकल में दाखिला न केवल आसान है बल्कि सस्ता भी है।

चेन्नई

Updated: February 24, 2022 07:32:55 pm

- पी. एस. विजयराघवन

Ukraine : यूक्रेन में तमिलनाडु सहित देशभर के बड़ी संख्या में विद्यार्थी फंसे हैं। मेडिकल की सस्ती पढ़ाई की वजह से यूक्रेन विद्यार्थियों को आकर्षित करता है। पेशेवर पाठ्यक्रमों की बात की जाए तो सर्वाधिक दाखिले वहां मेडिकल कोर्स में होते हैं। युद्ध भूमि बने यूक्रेन में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु के करीब ५ हजार लोग फंसे हैं। अनाधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो लगभग ८ हजार लोग वहां हैं जो लौटने को बेताब हैं।
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वॉर इज वेरी क्लोज...
यूक्रेन के विश्वविद्यालयों में मेडिकल कोर्स के लिए विद्यार्थियों को दाखिला दिलाने वाली निजी कंपनी माय एब्रॉड माय स्टडी के संस्थापक और सीईओ आर. जी. वेंकट ने राजस्थान पत्रिका को खार्किव (यूक्रेन का शहर) स्टेट जू वेटनेरी एकैडमी के डीन डा. एलेक्जेंडर के हवाले से बताया कि वहां शहर में युद्ध का प्रवेश होने वाला है। डीन का भेजा संदेश इस प्रकार था, 'वॉर इज वेरी क्लोज, आलमोस्ट इन टाउन।Ó यह संदेश स्पष्ट कर देता है कि वहां क्या हालात बन चुके हैं।
हर साल १५०० विद्यार्थी जाते हैं यूक्रेन
उन्होंने बताया कि यूक्रेन में २० विश्वविद्यालय हैं। छह साल के मेडिकल कोर्स के लिए सालाना तमिलनाडु से ही १२०० से १५०० विद्यार्थी जाते हैं। यूक्रेन में मेडिकल में दाखिला न केवल आसान है बल्कि सस्ता भी है। वे बताते हैं कि ६ साल के कोर्स का प्रति विद्यार्थी खर्चा सब मिलाकर ३५ से ५० लाख रुपए तक आता है। इसमें आवाजाही, शिक्षण शुल्क, आवास और खाना-पीना शामिल है। जबकि भारत में मेडिकल पढ़ाई की लागत अपेक्षाकृत ज्यादा है। दीगर बात यह भी कि छात्रों को मेडिकल कोर्स में एडमिशन ही मुश्किल से मिल पाता है। उनकी संस्था के जरिए ही कई छात्रों ने वहां प्रवेश लिया है। यूक्रेन में ९० फीसदी विद्यार्थी मेडिकल स्ट्रीम के हैं।

क्रोक परीक्षा और वित्तीय संकट
रूस के साथ संबंधों में तनाव से सब वाकिफ थे लेकिन मेडिकल कोर्स में पंजीयत विद्यार्थियों को तीसरे साल के बाद क्रोक परीक्षा लिखनी होती है। यह फरवरी में हुई थी। उसमें विफल रहने वालों को मार्च में दूसरा मौका मिलता है। यह परीक्षा अनुत्तीर्ण रहने पर वे चौथे साल की पढ़ाई नहीं कर सकते। इसके बाद छठवें वर्ष में क्रोक देनी होती है। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में वहां विद्यार्थी अटक गए। इसके अलावा उन पर वित्तीय दबाव भी था। उनके कुछ छात्र पहले ही लौट आए थे। अब सरकार वापसी के प्रयास कर रही है।
- आर. जी. वेंकट, माय एब्रॉड माय स्टडी के संस्थापक और सीईओ

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