आचार्यों, उपाध्याय प्रवर व उपप्रवर्तकों की अनूठी पहल

संतों ने कहा समाज के गणमान्य लोगों को समाज सुधार में आगे आना चाहिए

By: Santosh Tiwari

Published: 20 Jul 2018, 05:25 PM IST

चेन्नई. जैन समाज के चारों संप्रदायों के बीच चल रही बिखराव की स्थिति को मिटाने एवं पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोने के अलावा समाज की एकता व इसकी ज्वलंत समस्याओं के निराकरण को लेकर गुरुवार को संतों के बीच धर्म चर्चा हुई। जैन महासंघ और एएमकेएम मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम मेमोरियल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण, आचार्य पुष्पदंतसागर, आचार्य तीर्थभद्रसूरीश्वर, आचार्य जिनपूर्णानंदसागर सूरीश्वर, आचार्य जगच्चन्द्रसूरीश्वर, उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि, उपप्रवर्तक विनयमुनि व उपप्रवर्तक गौतममुनि के बीच संयुक्त धर्म चर्चा हुई। इन संतों ने समाज की कुरीतियों एवं ज्वलंत समस्याओं के निराकरण पर विस्तार से चर्चा हुई।

उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने कहा जैन धर्म की आचार संहिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए जैन धर्मानुयायी परिवार अण्डा, मांस-मछली एवं शराब का सेवन न करें। समाज का सबसे घृणित अपराध है भू्रण हत्या, यह घृणित पाप भी है। समाज के हर व्यक्ति को भू्रण हत्या से बचना चाहिए। जैन दर्शन के अनुरूप संस्कारों से बच्चों को संस्कारित करने वाले सुविधापूर्ण जैन शिक्षण संस्थानों में का निर्माण एवं संचालन का प्रयास किया जाए एवं जैन परिवार अपने बच्चों को जैन स्कूलों एवं कॉलेजों में ही पढ़ाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा सामूहिक समारोह एवं शादी-विवाह में रात्रि भोज पर रोक लगाई जाए तथा भोजन में जमींकंद का प्रयोग न किया जाए।
आचार्य पुष्पदंतसागर ने कहा व्यसन चाहे कोई सा भी हो जिंदगी का सबसे बड़ेे दुश्मन हैं। इनमें प्रमुख दुश्मन है अहंकार, सभी को इसका त्याग कर देना चाहिए क्योंकि यह व्यक्ति को आगे नहीं बढऩे देता। साथ ही उन्होंने कहा रात्रि आहार का त्याग भी जरूरी है। इससे स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। समाज के गणमान्य लोगों को आगे आना चाहिए।
आचार्य महाश्रमण ने कहा जैन परम्परा में जन्म लेने वाले व्यक्ति को व्यसनों खासकर शराब का त्याग कर देना चाहिए। चाहे किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा लें शराब से दूर रहें। यह हिंसा की प्रतीक है। उन्होंने कहा अपने बच्चों को जैन शिक्षण संस्थानों में शिक्षा दिलाएं ताकि उनमें जैन संस्कार आएंगे। इससे समाज सुधार हो सकता है।

आचार्य तीर्थभद्रसूरीश्वर ने कहा आज जो समाज के विकास से कोई भी संतुष्ट नहीं है। बदलाव आज के समय की मांग है इसलिए और भी कुछ करना है। सभी को मिलकर समाज को जोडऩे एवं एकता का प्रयास करना चाहिए इसी से समाज आगे बढ़ सकेगा। आचार्य जिनपूर्णानंदसागर सूरीश्वर ने कहा महानगर में संतों का समागम हमारे एवं आपके लिए हर्ष का विषय है। संतों एवं आप दोनों को आपस में बहुत अपेक्षा है। समाज संतों एवं संत समाज से अलग नहीं हो सकता। सभी आपस में सहयोगी बनें। आचार्यों द्वारा किए गए निर्णय का क्रियान्वयन तो समाज को ही करना होगा तभी समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा। आगे भी ऐसी ज्वलंत समस्याओं पर विचार होता रहेगा। समाज की इन समस्याओं की जिम्मेदारी आपकी ही है। आचार्य जगच्चन्द्रसूरीश्वर ने कहा आज समाज कुरीतियों का शिकार हो रहा है, इनसे बचना जरूरी है। चातुर्मास शुरू हो रहा है, इस दौरान बहने वाली ज्ञानगंगा से आमजन में परिवर्तन अवश्य आएगा। यदि उसे अपनाया तो यह अविस्मरणीय होगा। समाज के सभी लोग मिलकर आगे बढ़ेंगे तो समाज आगे बढ़ेगा और समाज आगे बढ़ेगा तो सस्कृति सुधरेगी। उन्होंने कहा सभी को शादी-विवाहों में होने वाले अंधाधुंध खर्च पर रोक लगानी चाहिए एवं भोजन में जूठन तो कतई नहीं छोडऩी चाहिए। साथ ही कहा भ्रूण हत्या कर सांस्कृतिक नियमोल्लंघन न करें। समाज की कुरीतियों पर चलना बंद करें ताकि समाज आगे बढ़े।

Santosh Tiwari Desk
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