विवेकानंद ने दुनिया से कराया भारतीय दर्शन का परिचय

बीजेपी नेता एल गणेशन ने आज के दौर में विवेकानंद की प्रासंगिकता विषय पर विचार व्यक्त किए

चेन्नई. रामकृष्ण मिशन चेन्नई ने 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए ऐतिहासिक भाषण की 125वीं जयंती मनाई। यह समारोह मईलापुर स्थित रामकृष्ण मिशन स्टूडेंट होम के विवेकानंदर आरंगम में आयोजित किया गया। मिशन ने इस अवसर पर विद्यार्थियों के बीच निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता कराई तथा विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया। इस दौरान मशहूर उद्योगपति की नल्ला कुप्पुस्वामी चेट्टी की अध्यक्षता में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।

संगोष्ठी का उद्घाटन मिशन के सचिव स्वामी सत्यजनानंदा ने किया। संगोष्ठी के दौरान बीजेपी नेता एल गणेशन ने आज के दौर में विवेकानंद की प्रासंगिकता विषय पर विचार व्यक्त किए। अभिनेता विवेक, तिरुपुर कृष्णन एवं इसैकवि रामानन ने भी विवेकानंद के दर्शन पर प्रकाश डाला। स्वामी सत्यजनानंदा ने विवेकानंद के शिकागो भाषण की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय दर्शन को विश्वमंच पर लाने के साथ-साथ इस तरफ पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि उनके दर्शन आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब थे।

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वीआईटी चेन्नई का दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

Vivekananda introduced Indian philosophy in the world

चेन्नई. वीआईटी चेन्नई के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग साइंस एंड इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित उन्नत कंप्यूटिंग में हालिया रुझान विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संम्मेलन का समापन समारोह मंगलवार को हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि के-7 थ्रेट कंट्रोल लैप के वाइस प्रेसिडेंट नंदी धर्म किशोर थे। अपने समापन भाषण के दौरान किशोर ने आईओटी उपकरणों में सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुरक्षा समस्याओं का हल तलाशने और उसे विकसित कर पेटेंट करने के लिए प्रतिभागियों को प्रोत्साहित भी किया। विशिष्ट अतिथि एवं मलेशिया विश्वविद्यालय कुआलालम्पुर के प्रोफेसर डॉ. शिवकुमार पलैयाहकोटे ने अपने बीज वक्तव्य में आयोजकों के प्रयास की सराहना की। वीआईटी के प्रो-वीसी डॉ. एन. संबांदम ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किया। इस दौरान वहां वीआईटी चेन्नई के अतिरिक्त कुलसचिव डॉ. पी.के. मनोहरन, डीन डॉ. वैदेही विजयकुमार, प्रोफेसर डॉ. पी. नित्यानंदनम भी मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस. गीता ने किया।

Ashok Singh Rajpurohit
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