किस खेमे में महकेगी दिण्डीगुल की फुलवारी

किस खेमे में महकेगी दिण्डीगुल की फुलवारी

Mukesh Kumar Sharma | Publish: Apr, 25 2019 12:27:55 AM (IST) Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

हिन्दू और मुस्लिम धर्मावलम्बियों के लिहाज से दिण्डीगुल लोकसभा सीट महत्वपूर्ण है। दोनों ही धर्मों के प्रमुख दर्शनीय स्थान होने के अलावा कोडैकानल...

चेन्नई।हिन्दू और मुस्लिम धर्मावलम्बियों के लिहाज से दिण्डीगुल लोकसभा सीट महत्वपूर्ण है। दोनों ही धर्मों के प्रमुख दर्शनीय स्थान होने के अलावा कोडैकानल की वजह से यह दिण्डीगुल प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। फूलों की खेती और कारोबार यहां का प्रमुख उद्योग है। इस लोकसभा सीट पर एआईएडीएमके और कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। दोनों ही दलों ने गठबंधन धर्म के तहत यह सीट छोड़ दी है। ऐसे में प्रमुख विपक्षी दल डीएमके के पास मौका है कि वह १९८० के बाद यह सीट फिर से जीत पाए।

सीट की गणित

दिण्डीगुल सीट में पलनी, ओट्टानछत्रम, आत्तूर, नीलकोट्टै (एससी), नथम और दिण्डीगुल विधानसभा क्षेत्र आते हैं। फिलहाल दिण्डीगुल विधानसभा की एकमात्र सीट सत्तारूढ़ पार्टी के पास है। नीलकोट्टै में विधानसभा उपचुनाव है। शेष चारों सीटें डीएमके के पास है।

ऐसे में डीएमके स्वयं को मजबूत मान रही है। १९५१ से २०१४ तक के १६ लोकसभा चुनाव में सात बार एआईएडीएमके ने यह सीट जीती है। वतर्मान सांसद एम. उदयकुमार हैं। जबकि कांग्रेस का उम्मीदवार यहां से ५ बार लोकसभा के लिए चुना गया। तीन बार डीएमके प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। डीएमके ने अंतिम चुनाव १९८० में जीता था।

सीट का गणित

पिछले चुनाव में डीएमके के एस. गांधीराजन ने आत्तूर विस क्षेत्र से सर्वाधिक ९३ हजार ७५१ वोट प्राप्त किए थे। शेष अन्य सभी निर्वाचन क्षेत्रों में अन्नाद्रमुक प्रत्याशी एम. उदयकुमार ने उनको भारी मतों से पछाड़ा था। डीएमडीके उम्मीदवार को ९३ हजार से अधिक वोट मिले थे।

इस बार मतों के बिखराव की स्थिति कम होने के आसार है। टीटीवी दिनकरण गुट की पार्टी नीलकोट्टै विस सीट पर अपना जलवा बिखेर सकती है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के इस सीट से दो बार सांसद रहे एनएसवी चित्तन की जमानत जब्त हो गई थी। इसी वजह से कांग्रेस को सीट देने के बजाय डीएमके खुद मैदान में उतरी है। वहीं एआईएडीएमके ने डीएमडीके का साथ होने के बाद भी यह सीट पीएमके को दी है।

गुजर-बसर

प्रमुखत: कृषि क्रियाओं व फूलों के उत्पादन के लिए मशहूर दिण्डीगुल जिले में तीर्थाटन और पर्यटन से खूब आमदनी होती है। नीलकोट्टै में तमिलनाडु का सबसे बड़ा फूलों का बाजार है। ओट्टनछत्रम में चेन्नई महानगर के कोयम्बेडु के बाद दूसरा सबसे बड़ा सब्जी व फल बाजार है। साथ ही डेयरी संबंधी व्यापार भी विकसित है।

प्रमुख समस्याएं व मांगें

नीलकोट्टै में कावेरी नदी जल आधारित संयुक्त पेयजल परियोजना शुरू करने की मांग की जा रही है। पलनी में विश्व प्रसिद्ध मुरुगन मंदिर है। सुप्रीम कोर्ट के सबरीमला में महिलाओं के दर्शन को इजाजत दिए जाने का असर यहां भी खूब दिखाई दिया।
- इत्र लगाने का कारखाना लगे
- केला अनुसंधान संस्थान स्थापित हो
- डेयरी विकास की सुविधाओं को बढ़ाया जाए
- पेयजल संकट का निवारण
- शिक्षा, चिकित्सा और बेरोजगारी

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