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WILDLIFE FIRE : खौफनाक और भयावह होती जंगल की आग, लापरवाही भी कारण

WILDLIFE FIRE

- वन्य आग की आवृत्तियों के होंगे दुष्परिणाम

- दावानल से बढ़ता प्रदूषण और पृथ्वी का तापमान

चेन्नई

Published: April 19, 2022 06:11:54 pm

P S VIJAY RAGHAVAN

FIRE IN FOREST

जंगल में नाचता मोर भले मनोहारी हो लेकिन उठती लपटें मानव और वन्यजीव समुदाय के अलावा जलवायु के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। दावानल की घटनाएं भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में बढ़ी हैं। मार्च महीने के अंतिम दिन जंगलों में हाहाकार वाले थे। मार्च २०२२ के आखिरी दिन तो दावानल की ३४० घटनाएं प्रकाश में आईं। एक अंदेशा यह है कि ऑस्ट्रेलिया के 2019-2020 ब्लैक समर के समान जंगल की आग की घटनाएं भविष्य में 31-57 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। भारत में इस प्रवृत्ति के संकेत देखने में आने लगे हैं जो कि चिंता का विषय है।
WILDLIFE FIRE : खौफनाक और भयावह होती जंगल की आग, लापरवाही भी कारण
WILDLIFE FIRE : खौफनाक और भयावह होती जंगल की आग, लापरवाही भी कारण

मार्च २०२२ की समाप्ति तक देश में राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व, ओडिशा के सिमिलीपाल वन्यजीव अभयारण्य, मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के लडकुई जंगलों और सतना जिले के मझगवां क्षेत्र के वन क्षेत्रों के अलावा तमिलनाडु के दिंडीगुल जिले में कोडैकानल पहाडिय़ों के पास पेरिमलमलै के वन्य क्षेत्रों में आग लगने के दृष्टांत सामने आए हैं।

१.३६ लाख फायर प्वाइंट
भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) के अनुसार, पिछले सात-आठ दिनों से 1,141 बड़े जंगल में आग (एलएफएफ) के साथ मार्च के आखिरी दिन में लगभग 340 (शाम 4 बजे) आग की घटनाएं हुईं। 1 जनवरी से 31 मार्च 2022 तक देश में 136,604 फायर पॉइंट थे। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट, स्प्रेडिंग लाइक वाइल्डफायर : द राइजिंग थ्रेट ऑफ एक्स्ट्राऑर्डिनरी लैंडस्केप फायर, ने जंगल की आग पर खतरे की घंटी बजा दी है।

५७ प्रतिशत तक बढ़ेगी घटनाएं
रिपोर्ट में सतर्क किया गया है कि आग का स्वरूप बदल रहा है क्योंकि हम उन परिस्थितियों को बदल रहे हैं जिनकी वजह से ये घटनाएं होती थीं। पृथ्वी का तापमान बढऩे के लिए जिम्मेदार ग्रीनहाउस गैसों के नियंत्रण के ठोस उपाय करने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया के ब्लैक समर अथवा विशाल आर्कटिक आग के समान दावानल घटनाएं 31 से 57 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। ब्लैक समर दावानल में ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में महीनों आग जलती रही जिसके कारण २६ से अधिक लोग जलकर मारे गए तो करीब २५०० घर तबाह हो गए थे।

फैक्ट शीट : भारत में दावानल आशंकित क्षेत्र
- लगभग 20,074 वर्ग किमी वन क्षेत्र (लगभग 2.8 प्रतिशत) अत्यधिक आग आशंकित क्षेत्र है
- 56,049 वर्ग किमी (7.85 प्रतिशत) आग की अत्यधिक आशंका वाले क्षेत्र
- लगभग 82,900 वर्ग किमी (11.61 प्रतिशत) अधिक आशंका वाले क्षेत्र
- भारत में वन क्षेत्र का लगभग 22 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक और अधिक आग की आशंका वाले क्षेत्र में आता है
स्रोत : एसओएफआर 2021 के अनुसार

वज्रपात और मानवीय लापरवाही
जंगलों में आग की दो बड़ी वजहों में आकाशीय बिजली और मानवीय लापरवाही शामिल है। लेकिन दावानल की उग्रता की आग में घी डालने के घटक बनते हैं मानवजनित जलवायु परिवर्तन, भूमि-उपयोग परिवर्तन और खराब भूमि और वन प्रबंधन। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार जंगल की आग उन जगहों पर लंबे समय तक और प्रचंड हो रही हैं जहां उनकी अक्सर पुनरावृत्ति होती रहती है। ऐसी जगहों पर भी आग लगने लगी हैं जिनके बारे में कल्पना तक नहीं की जा सकती थी।

आग बुझाने में प्रौद्योगिकी का सहयोग
जंगलों में जाने वाले आम लोगों व कर्मचारियों की लापरवाही आग लगने का कारण बनती है। तमिलनाडु में दिण्डीगुल और कोडैकानल को छोड़ फिलहाल दावानल के बड़े दृष्टांत सामने नहीं आए हैं। एफएसआई से मिलने वाली सैटेलाइट इमेज से आग की लपटों व धुआं उठने वाले स्थानों का समय रहते पता चल जाता है जिससे इनको काबू करने में मदद मिल जाती है। जमीनी आग को बुझाने में हम बड़े स्तर पर सफल रहते हैं।
- डा. शेखर कुमार नीरज, सदस्य सचिव टीएनबीबी

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