जिला अस्पताल के सेंट्रल लैब में शुरु हुई 1 करोड़ की जांच मशीनें, हो रही 104 जांचे


डेढ़ सौ रूपए से लेकर 3 हजार रूपए तक के खर्च वाली जांचों हो रही निशुल्क
पीपीपी मोड पर 6 आधुनिक मशीनों से हो रही रोजाना 100 से 150 मरीजों की जांचे

By: Dharmendra Singh

Published: 11 Sep 2021, 05:59 PM IST


छतरपुर। जिला अस्पताल के सेंट्रेल लैब में 1 करोड़ रुपए की लागत से आई 6 बड़ी और आधुनिक मशीनों से जांच शुरु हो गई है। इन मशीनों से 104 तरह की जांचों की सुविधा जिला अस्पताल में मिलने लगी है। मशीनों के शुरु होने से जिला अस्पताल के 100 से 150 मरीजों की जांचे रोजाना होने लगी हैं। इन जांचों में 150 रुपए से लेकर 3000 कीमत की विभिन्न जांचे हैं, जो मरीजों को निशुल्क मिल रही हैं। हालांकि पैथलॉजिस्ट डॉक्टर की अभी भी कमी है।


हो रही डी डायमर जांच
जिला अस्पताल में पीओएईटी साइंस हाउस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के द्वारा 6 मशीनों को स्थापित किया गया है। इन मशीनों में से एक एडवियासीपी मशीन हार्मोंस से संबंधित जांचें करती है। इसमें टी 3, टी 4, टीएसएच और विटामिन डी सहित 12 प्रकार की जांचें की जाती हैं। इसी तरह सिपमेक्स मशीन के द्वारा शरीर की कोशिकाओं की गणना, डब्ल्यूबीसी, स्नेगियो से जुड़ीं लगभग 20 जांचें की जाती हैं। डी टेन नामक मशीन तीन माह का एवरेज शुगर लेबल निकालती है तो वहीं बच्चों के हीमोग्लोबिन और कुपोषण से जुड़ीं जांचें भी करती हैं। इसी तरह यूरन एनेलाइजर मशीन के द्वारा पेशाब से जुड़ीं 10 से अधिक जांचें की जाती हैं इससे ग्लूकोज, प्रोटीन, पीलिया और पस सेल की जांचें भी हो सकेंगी। इसी तरह बीए-400 मशीन के द्वारा लीवर, किडनी के फंकक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, सोडियम और पोटिशयम की जांचें की जाती हैं। 6वीं मशीन एसटेबो है जिसके द्वारा कोरोना बीमारी के दौरान खून से जुड़ीं डी डायमर जैसी महंगी जांच हो रही है।

ये सुविधाएं पहले से मौजूद
सेंट्रल लैब में बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर, हेमेटोलॉजी एनालाइजर, यूरिन एनालाइजर, एचपीएलसी मशीन, इम्युनोएसी एनालाइजर , कोगुलोमीटर मशीनें लाई गई हैं। पूरी रह से हाईटेक नई लैब में सभी प्रकार की मशीनें पूरी तरह से ऑटोमेटिक हैं। एक बार सैंपल लगाने के बाद जैसे ही मशीन में सैंपल जाएगा कुछ समय बाद सीधे जांच रिपोर्ट बाहर निकलेगी। यह जांच रिपोर्ट निजी लैबों की तरह कम्प्यूटराइज्ड रहेगी। यह जांच प्रक्रिया बार कोड की मदद से पूरी होगी। इस व्यवस्था से किसी भी तरह की गड़बड़ी होने की संभावना न के बराबर रहेगी।

ग्रामीण अंचल से भी सैंपल लाने की है योजना
ग्रामीण अस्पतालों में गुणवत्ता जांच की सुविधा मुहैया कराने के लिए रनर रखे जाने की भी योजना है। इनका काम पीएचसी व सीएचसी स्तर पर लिए गए सैंपलों को लैब तक लाने का होगा। ऐसे में आम लोगों को जांच के लिए बाहर ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने होंगे। रिपोर्ट के लिए मरीजों को अस्पताल आना नहीं होगा। जैसे ही उनके द्वारा दिए गए सैंपलों की जांच हो जाएगी, अपने आप पूरी रिपोर्ट मरीज द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर भेज दी जाएगी। हालांकि जिले में इस सुविधा की व्यवस्था फिलहाल नहीं की जा रही है। जिला अस्पताल के भर्ती मरीजों को ही इस सुविधा का लाभ मिलेगा।

स्टाफ बढ़ाने की जरूरत
जिला अस्पताल में महंगी जांचों की सुविधा तो उपलब्ध हो गई है लेकिन इन मशीनों को संचालित करने के लिए फिलहाल दो शासकीय और एक अशासकीय टैक्रीशियन ही उपलब्ध हैं। डॉ. आरती बजाज इस लैब की प्रभारी हैं। हालंाकि अस्पताल में पैथालॉजिस्ट डॉक्टर का अभाव हो चुका है। ऐसे में जब सरकार मशीनों पर पैसा खर्च कर रही है तब स्टाफ बढ़ाने की दिशा में भी काम करने की जरूरत है। मशीनों के रखरखाव के लिए कंपनी ने दो सुपरवाईजर तैनात कर रखे हैं।

Dharmendra Singh
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