महाराजा कॉलेज के कैंपस में विश्वद्यिालय के संविलियन से शुरु होंगे 14 रोजगार मूलक कोर्स

लेकिन खत्म हो जाएगा जिले के सबसे पहले कॉलेज का नाम, इसलिए हो रहा विरोध
महाराजा कॉलेज में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के संविलियन को मंजूरी

By: Dharmendra Singh

Published: 13 Sep 2021, 09:57 PM IST


छतरपुर। उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव के छतरपुर प्रवास के दौरान दिए गए निर्देश पर दिसंबर 2020 में भेजे गए संविलियन के प्रस्ताव को कैबिनेट ने पास कर दिया है। महाराजा कॉलेज में संचालित महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में अब कॉलेज का संविलियन किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालय को भवन व संसाधन मिलेगें, जिससे नए कोर्स शुरु हो सकेंगे। हालांकि जिले के सबसे पहले और वर्ष 1949 में स्थापित महाराजा कॉलेज का अब नाम खत्म हो जाएगा। विश्वविद्यालय के विकास के लिए कॉलेज के संविलियन का स्थानीय लोगों ने सोमवार को विरोध किया। जिसमें कॉलेज के छात्र, पूर्व छात्र, स्थानीय लोग शामिल रहे।

संविलियन के ये होंगे फायदे
कॉलेज को विवि में मर्ज करने के फायदे भी होंगे। वर्ष 1949 में कॉलेज के रुप में स्थापित हुए वर्ष 1865 के मदरसे के परिसर को विश्वविद्यालय को दिए जाने से विवि की गतिविधियां तेज होंगी। वैसे भी पिछले 9 साल से विवि का प्रशासनिक कामकाज कॉलेज परिसर में संचालित है। पूरे कैंपस को विवि घोषित किए जाने से एमएसी कंप्यूटर साइंस, माइक्रोबॉयोलॉजी, एमए चित्रकला और संगीत की पढ़ाई शुरु हो सकेगी। इसके अलावा 14 रोजगार मूलक पाठ्यक्रम भी शुरु हो सकेंगे। जिसमें माइनिंग साइंस में यूजी-पीजी डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा इन टरिज्म, यूजी डिप्लोमा इन कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियरिंग, यूजी डिप्लोमा इन इंटीरीयर डिजाइनिंग, यूजी डिप्लोमा इन इंटरनेट ऑफ थिंग्स, यूजी डिप्लोमा इन परफॉर्मिंग आर्टस, यूजी डिप्लोमा इन बेब डिलाइनिंग एंवड डेवलमेंट, सर्टीफिकेट कोर्स इन कम्यूनिकेशन स्किल्स, सर्टीफिकेट कोर्स इन डेस्कटॉप पब्लिशिंग, एमएस ऑफिस सर्टीफि केश प्रोग्राम, सर्टीफिकेट कोर्स इन फोटोशॉप, सर्टीफिकेट कोर्स इन नेटवर्किंग, सर्टीफिकेट कोर्स इन कंप्यूटर एडेड डिजाइन एंड ड्राइंग, सर्टीफिकेट कोर्स इन डिजीटल मार्के टिंग शुरु होंगा। इसके साथ ही कृषि संकाय शुरु करने की प्रक्रिया होगी। सरकार ने अगले सत्र से मेडिकल कॉलेज, पैरा मेडिकल कॉलेज, डिग्री इन नर्सिंग, पर्यटन संस्थान, बीपीएड, बी लिब शुरु करने की भी योजना बनाई है।

इसलिए हो रहा विरोध
पिछले लगभग 9 वर्षों से स्वयं के भवन की बाट जोह रहे विश्वविद्यालय को कॉलेज परिसर में स्थाई रुप से संचालित करने का फैसला लिया गया है। सरकार महाराजा कॉलेज का यूनिवर्सिटी में विलय कर रही है जिससे कि महाराजा कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियां यूनिवर्सिटी की गतिविधियां कहलाने लगें। इस तरह महाराजा कॉलेज का वर्षों पुराना अस्तित्व विश्वविद्यालय में विलीन हो जाएगा। इसी बात को लेकर सोमवार को स्थानीय नागरिकों ने विरोध जताया। महाराजा कॉलेज के पूर्व छात्रों, वर्तमान छात्रों, कांग्रेस के युवा नेताओं और नगर के लगभग दो सौ लोगों ने इस फैसले का विरोध करते हुए मोर्चा खोला दिया। विरोध करने वाले महाराजा कॉलेज के सामने एकत्रित हुए और रैली निकालते हुए पहले यूनिवर्सिटी पहुंचे। यहां कुलसचिव जेपी मिश्रा को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इस निर्णय का विरोध जताया गया। बाद में विरोध कर रहे लोगों ने कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली लेकिन भारी भीड़ के कारण ट्राफिक जाम होने की स्थिति निर्मित हो गई थी जिसके चलते तहसीलदार अभिनव शर्मा मौके पर पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन हासिल कर गुस्साए लोगों को समझाईश दी गई कि उनका ज्ञापन सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

Dharmendra Singh
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