बरेठी में ताप विद्युत परियोजना के लिए अधिग्रहीत जमीन पर लगेगा 550 मेगावाट का सोलर प्लांट


ताप विद्युत परियोजना के लिए अधिग्रहीत 1148 हेक्टेयर जमीन में लगाया जाएगा पहला प्लांट
सोलर प्लांट की दूसरी यूनिट के लिए बिजावर के पुरवा में अधिग्रहीत होगी 1400 हेक्टेयर जमीन

By: Dharmendra Singh

Published: 21 Jul 2021, 08:02 PM IST

छतरपुर। जिले में सोलर पावर परियोजना के तहत 2 सोलर पावर प्लांट लगाने की कवायद तेज हो गई है। ताप विद्युत परियोजना के लिए बरेठी में अधिग्रहीत जमीन पर 550 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा। वहीं बिजावर के पास पुरवा में 950 मेगावाट की यूनिट लगाई जाएगी। अब इस दिशा में आगे बढऩे के लिए राज्य सरकार ने बरेठी की अधिग्रहित जमीन का उपयोग बदलने की अनुमति दे दी है। इसके बाद जिले में सबसे पहले सोलर प्लांट बरेठी में शुरु होने की संभावना भी बढ़ गई है। एनटीपीसी नबंवर तक प्लांट के लिए टेंडर की प्रक्रिया करने की तैयारी में है। वहीं बिजावर में 950 मेगावाट की दूसरी यूनिट के लिए अभी 1400 हेक्टेयर जमीन का चिंहाकन हो गया है। अधिग्रहण की प्रक्रिया की जानी है।


बरेठी में 1148 हेक्टेयर जमीन का होगा उपयोग
केन्द्र सरकार के उपक्रम एनटीपीसी लिमिटेड ने बरेठी जिला छतरपुर में 3960 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजना प्रस्तावित की थी। इस परियोजना के लिए एनटीपीसी के पास 1148.192 हेक्टेयर यानि 2839 एकड़ भूमि उपलब्ध है। ताप विद्युत परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति एवं कोल लिंकेज प्राप्त नहीं होने के कारण एनटीपीसी द्वारा उपलब्ध भूमि पर 550 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना के लिए राज्य सरकार से भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति ली गई है।

बिजावर में 1400 हेक्टेयर में लगेगा प्लांट
सोलर प्लांट के लिए बिजावर के झरकुंआ पंचायत के पुरवा गांव के पास 1400 हेक्टेयर जमीन का चिंहाकन प्लांट लगाने के लिए किया है। इस जमीन पर 950 मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन करने के प्लान पर एनटीपीसी काम कर रहा है। सरकारी जमीन का आवंटन, सीमांकन एवं आधिपत्य का कार्य पूर्ण हो चुका है। निजी भूमि का अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरु होनी है। वर्ष 2023 तक सौर-ऊर्जा संयंत्र की स्थापना का कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

पर्यावरण मंजूरी में अटक गया था थर्मल पावर प्लांट
छतरपुर मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर ग्राम बरेठी में 28000 करोड़ की लागत से 2013 में प्रस्तावित एनटीपीसी के थर्मल पावर प्लांट के लिए 2839 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन पर्यावरण मंजूरी न मिलने कारण कोयले से बिजली बनाने के इस पावर प्लांट का वर्ष 2017 से अधर में लटक गया था। इसके बाद वर्ष 2019 में विधानसभा सत्र के दौरान विधायक आलोक चतुर्वेदी ने आवाज उठाई थी। उनके द्वारा इस पावर प्लांट को जल्द से जल्द चालू कराने के लिए विधानसभा में अशासकीय संकल्प लाया गया था। इस अशासकीय संकल्प पर प्रदेश विधानसभा के पक्ष और विपक्ष ने बिना बहस के अपनी सहमति दी और केंद्र सरकार को भेजने की मंजूरी दे दी। जिसके बाद सरकार ने इस अशासकीय संकल्प को केंद्र सरकार को भेज दिया था। विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान एनटीपीसी ने पर्यावरण दिक्कतों के कारण हो रही समस्याओं को दूर करने का सुझाव देते हुए कहा था कि यदि यहां थर्मल यानी कोयले की जगह सोलर यानी सूर्य की रोशनी से बिजली बनाने का प्लांट लगाया जाए तो एनटीपीसी द्वारा अधिगृहित की गई जमीन का इस्तेमाल भी हो जाएगा और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं भी नहीं होंगी। मध्यप्रदेश सरकार व एनटीपीसी द्वारा इस मुद्दे पर अनौपचारिक सहमति बन चुकी है। अब एनटीपीसी के इस पावर प्लांट को चालू कराने के लिए इसी सहमति के आधार पर आगे की प्रक्रिया की जा रही है।

Dharmendra Singh
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