script7 cases of death were reported during corona , no one was helped | कोरोना सेवा के दौरान मौत के 7 मामले सामने आए, मदद के लिए 3 चुने गए, सहायता किसी को नहीं | Patrika News

कोरोना सेवा के दौरान मौत के 7 मामले सामने आए, मदद के लिए 3 चुने गए, सहायता किसी को नहीं


झुनझुना साबित हो रहा कोरोना योद्धाओं की मदद का सरकारी वादा
कोरोना योद्धा की मौत पर मिलने थे 50 लाख, 7 महीने बाद भी नहीं मिली फूटी कौड़ी

छतरपुर

Published: November 19, 2021 03:39:43 pm

छतरपुर। जानलेवा कोरोना महामारी के दौरान आम जनता की हिफाजत में जिन कोरोना योद्धाओं ने अपने प्राणों की आहूति दे दी उनकी मदद के लिए सरकार द्वारा किए गए वादे कोरी घोषणा साबित हो रहे हैं। इन कोरोना योद्धाओं को 7 महीने बाद भी सरकार से फूटी कौड़ी नहीं मिली है। जिले में 7 कोरोना योद्धाओं की मौत के मामले सामने आए थे। इनमें से तीन लोगों को पात्रता नियमों के मुताबिक 50 लाख की सहायता हेतु चुना गया लेकिन इन तीन मृतकों के परिवारों को भी आज तक कोई सहायता नहीं मिली है।
जिला प्रशासन का राहत विभाग सहायता के लिए खानापूर्तियों के तमाम दस्तावेज भोपाल की राहत शाखा को भेज चुका है लेकिन यहां से कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
 झुनझुना साबित हो रहा कोरोना योद्धाओं की मदद का सरकारी वादा
झुनझुना साबित हो रहा कोरोना योद्धाओं की मदद का सरकारी वादा
हर महीने यहां से दस्तावेजों को पूरा करने संबंधी नए पत्र भेज दिए जाते हैं जिनके जवाब पिछले 7 महीने से भेजे जा रहे हैं। कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इन कोरोना योद्धाओं के परिवारों को मदद देने से कतरा रही है। इन मामलों को लगातार उलझाया जा रहा है। वैसे तो कई कोरोना योद्धा लोगों की मदद के लिए न सिर्फ स्वयं संक्रमित हुए बल्कि बीमारी के कारण उनके या उनसे परिवार के अन्य व्यक्ति की जानें भी गईं लेकिन सरकार ने मदद के लिए नियमों को इतना जटिल बना दिया है कि पूरे जिले से सिर्फ 3 लोग ही इस मदद हेतु चिन्हित हुए। इन लोगों को भी राशि न देनी पड़े इसके लिए विभाग के द्वारा लगातार नए-नए दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
इन परिवारों को आज तक नहीं मिली मदद
छतरपुर जिले में कोरोना महामारी में शासन के निर्देश अनुसार विभिन्न सुरक्षा इंतजामों में प्रत्यक्ष रूप से अपनी सेवाएं देने वाले तीन शासकीय अधिकारी, कर्मचारियों की मौत के मामले चिन्हित किए गए हैं। इनमें पूर्व एसडीएम संतोष सिंह चंदेल, स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता रंजोड़ी अहिरवार और छतरपुर नगर पालिका में पदस्थ रहे कृष्णदत्त पाठक का नाम शामिल है। इन तीनों की मौत कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमित होने के बाद हो गई थी। जानकारी के मुताबिक अप्रैल और मई के महीने में मौत के बाद इनके दस्तावेज राहत शाखा छतरपुर के माध्यम से भोपाल जा चुके हैं लेकिन अब तक किसी को कोई मदद नहीं मिली है। इतना ही नहीं कोरोना योद्धा के दायरे में आने वाले 7 लोगों ने मदद के लिए आवेदन किया था जिनमें से 4 आवेदनों को नियमों की आड़ में खारिज कर दिया गया।
इनका कहना है
छतरपुर से सहायता राशि के लिए दस्तावेज और मांग पत्र भेजा जा चुका है। शासन स्तर पर मामले क्यों अटके हैं इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता।
आरडीएस अग्रिवंशी, एसडीएम, छतरपुर

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