वर्क फ्रॉम होम कांसेप्ट अपनाने से 70 से 80 हजार रुपए हर साल खर्च में होगी कटौती

जिला कोषालय में वर्क फ्रॉम होम की संभावना ज्यादा, बचत भी होगी ज्यादा
आदिम जाति कल्याण विभाग के कार्यालय संचालन खर्च में लाई जा सकती है कमी
वर्क फ्रॉम होम

By: Dharmendra Singh

Published: 29 Jun 2020, 08:00 AM IST

छतरपुर। शासकीय कार्यालय में काफी हद तक ऑनलाइन कामकाज होने लगा है। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम कॉन्सेप्ट को अपनाना आसान होगा। वर्क फ्रॉम होम से न केवल शासन के सालाना खर्च में कमी आएगी। बल्कि कर्मचारी के तनाव व फ्यूल खर्च में भी कमी आएगी। वहीं, वर्क फ्रॉम होम से काम की गुणवत्ता व मात्रा में गुणात्मक सुधार आएगा। छात्र-छात्राओं की आदिम जाति कल्याण की योजनाओं के संचालन का काम करने वाले जिला आदिम जाति कल्याण विभाग में खर्च की बचती की जा सकती है। वहीं सभी शासकीय अधिकारी व कर्मचारी के वेतन, भत्ते और सभी तरह के भुगतान की जिम्मेदारी संभालने वाले जिला कोषालय के कोष का हर महीने और साल होने वाला खर्च कम किया जा सकता है।


जिला कोषालय में हर साल बचाए जा सकते हैं 80 हजार से ज्यादा
कलेक्ट्रेट कैंपस में स्थित जिला कोषालाय कार्यालय में ट्रैजरी अधिकारी के साथ साथ कुल २७ लोगों का स्टाफ है। पांच अलग-अलग कमरों में कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्ता है, कार्यालय के कुल स्टाफ में २२ क्लर्क है, सभी क्लर्क कंप्यूटर पर काम करते हैं। कार्यालय का ज्यादातर काम ऑनलाइन ही है। जिसमें शासकीय विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों की वेतन, योजना, खर्च आदि के लिए राशि आबंटित जैसे काम किए जाते हैं। कार्यालय का बिजली बिल प्रतिमाह औसत ५ से ८ हजार रुपए आता है। जबकि कार्यालय संचालन व मेंटनेंस पर हर साल करीब 2 लाख रुपए खर्च होते हैं। कार्यालय के 30 फीसदी कर्मचारी यानि 7 से 8 लोग वर्क फ्रॉम होम करें तो कार्यालय के 2 कमरे का स्पेश बचाया जा सकता है। इसके साथ ही बिजली बिल में हर महीने 30 फीसदी यानि 2 से ढाई हजार रुपए बचाया जा सकता है। जो एक साल में 24 हजार से ज्यादा की राशि होगी। वहीं, कार्यालय संचालन के खर्च में हर साल 60 हजार रुपए तक की कमी आएगी। शासन के खर्च में हर साल 80 हजार से ज्यादा की बचत होगी, वहीं कर्मचारी को हर महीने 800 से 1000 रुपए तक की व्यक्तिगत बचत होगी। ऑफिस-आने जाने में लगने वाला समय बचने से कर्मचारी के कार्य की मात्रा भी बढ़ेगी।


आदिम जाति कल्याण विभाग भी बचा सकता है हर साल 70 हजार
कलेक्ट्रेट परिसर में १५ सौ वर्गफीट में बने इस कार्यालय के पास खुद का भवन है। यहां पर अधिकारी, बाबू सहित करीब १३ लोगों को स्टाफ है। इस कार्यालय से छात्र-छात्राओं के लिए आदिम जाति कल्याण की योजनाएं संचालित की जाती हैं, छात्रावासों का संचालन, प्रबंधन, कर्मचारियों की तैनाती, छात्रवृत्ति जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। कार्यायल का बिजली बिल प्रतिमाह करीब ५ हजार आता है। जबकि कार्यालय संचालन व मेंटनेंस पर हर साल 2 लाख तक का खर्च आ जाता है। विभाग की योजनाएं ऑनलाइन हैं। कुछ कर्मचारी भी ऑनलाइन काम करते हैं। ऐसे में ऑनलाइन काम करने वाले 30 फीसदी कर्मचारियों को वर्क प्रॉम होम कराया जाए तो कार्यालय में 3 से 4 लोगों के बैठने में लगने वाले जगह खाली होने से अतिरिक्त उपयोगिता में लाई जा सकती है। वर्क फ्रॉम होम से कार्यालय के बिजली बिल में भी कमी आएगी। हर महीने 1000 से 1500 रुपए तक का खर्च कम होगा, जो सालभर में 12 हजार से ज्यादा की बचत होती। इतना ही नहीं कार्यालय संचालन के खर्च में हर साल 50 से 60 हजार रुपए कम खर्च करने होंगे। कर्मचारियों को भी 800 से 1000 रुपए फ्यूल खर्च की व्यक्तिगत बचत होगी। कार्यालय बिजली बिल, संचालन- मेंटनेंस खर्च में से 70 हजार रुपए से अधिक की कमी आएगी।

Dharmendra Singh
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