साल दर साल घट रही कृषि उपज, किसान चिंतित

सरकारी योजनाएं नाकाम

By: Samved Jain

Published: 15 Nov 2018, 11:27 AM IST

उन्नत पचौरी छतरपुर। सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बावजूद खेती का रकबा साल दर साल घटता जा रहा है। जिससे हर वर्ष किसानों को खासी चिंता हो रही है। वहीं सरकार द्वारा चालाई जा रही कई सारी योजनाओं का लाथ सभी किसानों को समय पर नहीं मिल पा रहा है। जिससे किसान परेशान हैं। लेकिन इसके वाबजूद किसान की सुनने वाला कोई नहीं। हमारे देश में किसानों को अन्नदाता व देश की रीढ़ कहा जाता है। लेकिन यह अब सिर्फ बातों तक ही सीमित रह गया है। फिर भी जिले अधिकांस आबादी खेती किसानी से जुड़ी है।
किसानों को राहत व खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारों ने बहुत सी स्कीमें चलाईं व उन में पानी की तरह पैसा बहाया, खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र व राज्यों में मंत्रालय, महकमे, बहुत से रिसर्च सैंटर, कृषि विश्वविद्यालय व निगम आदि चल रहे हैं। इनके जरीए खर्च करने के लिए भारीभरकम बजट और अफसरों व मुलाजिमों की फौज है। इस के बावजूद हैरत की बात तो यह है कि देश में खेती का जिले का रकबा व फसलों की पैदावार लगातार घट रही है।

बेपरवाह है प्रतिनिधि अफसर :
जिले और क्षेत्र में रहने वाले नेता अफसर रकबे, पैदावार व उपज की घटत से बेपरवाह, बेखबर व बेफिक्रदिखते हैं। खेती का रकबा घटने की अहम वजह यह है कि ज्यादातर किसानों के बच्चे खेती में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। वह किसानी के काम से अपना मुंह मोड़ कर शहरों का रुख कर रहे हैं।

खेती में लगातार घाटा :
शहर के नजदीक मऊसहानियां में रहने वाले किसान लोचल कुशवाहा ने बताया वह बचपन से खेती किसानी करता आ रहा है। उसने बताया कि खेती में लगातार बढ़ती लागत व सही दाम न मिलने से खेती अब घाटे का सौदा बन गई है। गुजारा करना भी अब टेढ़ी खीर लगती है। लिहाजा काफी मुश्किलों का सामना करने के लिए अब खेती के दायरे से बाहर निकल कर दूसरा काम करना जरूरी हो गया है।

घटती खेती बढ़ता कर्ज :
जिले में कई वर्षों से घटती जा रही खेती और सरकार द्वारा समय पर मदद नहीं करने से किसानों को खेती में साल दर साल घाटा लग रहा है। जिससे अधिकांस किसान बैंकों और गांव में लोगों से कर्ज लेकर खेतों की बुवाई करते हैं और इस तरह किसान कर्ज की जकडऩ में जकड़ता ही जाता है।

बुआई क्षेत्र के आंकडे (हजार/ हैक्टेयर में)
फसल २०१३-१४ २०१४-१५ २०१५-१६ २०१६-१७ २०१७-१८
गेंहू १८३.४० १२१.६० १२६.१२ १८४.८० १७५.०२
जौ १८.५४ १४.४७ १५.४० २६.५१ १२.४६
चना ८९.४० ८३.०० ४८.१० ८१.९२ ५०.५०
मटर २३.६० १२.०० ८.१७ १०.४६ ०८.१४
मसूर ९.९० ९.०० ५.०७ ६.४६ ५.८५
राई सरसों २१.६३ ३०.०० १३.१२ १६.१० १८.०२
अलसी ८.६० ७.४० ५.३१ १.८८ ६.२०
गन्ना ०.३० ०.३० ०.२७ ०.७६ ०.२०

Samved Jain
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