scriptancient stories came alive with new, verse, rhythm on Muktakashi stage | मुक्ताकाशी मंच पर नव, छंद, ताल, लय से जीवंत हो गई पुरातन कहानियां | Patrika News

मुक्ताकाशी मंच पर नव, छंद, ताल, लय से जीवंत हो गई पुरातन कहानियां

 

शास्त्रीय नृत्य से शिव स्तुति, राधा कृष्ण प्रेम और राम सीता के विरह को किया साकार

मोहनी अट्टम, भरतनाट्यम और कथक में दिखा भक्ति, संगीत व नृत्य का संगम

छतरपुर

Published: February 23, 2022 01:50:53 pm

छतरपुर। विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो में चल रहे भारतीय शास्त्रीय नृत्यों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खजुराहो नृत्य समारोह की तीसरी शाम मोहनी अट्टम, भरतनाट्यम और कथक से भक्ति व संगीत का अनूठा दृश्य जींवत हो उठा। नीना प्रसाद, पाश्र्वनाथ उपाध्याय, टीना ताम्बे के क्लासिकल नृत्य से जमी महफिल में गंगा के शिव जटा में अवतरण, कृष्ण द्वारा राधा का श्रंगार सुधारने की प्रस्तुति ने रंग जमा दिया। कार्यक्रम के अंत में वनवास से लौटने के बाद राम के सीता से बिछडऩे की कहानी नृत्य के जरिए दर्शाई गई।
राम ने जीती भावनात्मक लड़ाई
राम ने जीती भावनात्मक लड़ाई
आकाश गंगा, पाताल गंगा का किया वर्णन
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध नृत्यांगना डॉ.नीना प्रसाद के मोहिनीअट्टम नृत्य से हुई। डॉ. नीना ने सबसे पहले भगवान गणेश वंदना प्रस्तुत की,जो सभी प्रकार के आयोजनों में शुभ शुरुआत के लिए बाधाओं को दूर करते हैं। इसके बाद गंगा तरंगिणी में आकाश गंगा, गंगा और पाताल गंगा का वर्णन नृत्य के रूप में किया, जो शिव के अर्धचंद्र को सुशोभित करती है। जब भगीरथ गंगा के पृथ्वी पर आने के लिए घोर तपस्या करते हैं, ब्रह्मा आकाश गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित करने का आदेश देते हैं। गंगा कहती है कि वह इतनी भारी होगी कि उसे सहन नहीं किया जा सकेगा और भगवान शिव उसे अपनी जटाओं में लेने के लिए आगे आए। अनुपल्लवी प्रस्तुति के जरिए बताया गया कि जब पार्वती शिखा पर एक अन्य महिला को देखकर क्रोधित हुईं, तो शिव पार्वती को यह देखने के लिए देते हैं कि कैसे गंगा देवी पृथ्वी पर गिरती है और भूमि और लोगों को शुद्ध करती है।
राधा कृष्ण के मिलन के बाद के दृश्य दर्शाए
इसके बाद अष्टपदी में राधा और कृष्ण एक साथ रात बिताते हैं। राधा कृष्ण को रोकती है और वह चाहती है कि रात कभी खत्म न हो। वह कृष्ण को अपनी हथेलियों से अपने स्तन पर डिजाइन बनाने के लिए कहती है जो चंदन की तुलना में ठंडे होते हैं। वह उसे काजल बनाने के लिए कहती है जो चुंबन के दौरान उसके होठों से छीन ली गई थी। वह कहती है कि, प्रेम करते समय उसके बालों को कामदेव के झंडे की तरह फैलने दो। वह अपने कूल्हों को कूल्हे की जंजीरों से सजाने का आग्रह करती है और उसे गिरे हुए कपड़ों से सजाती है।
राम ने जीती भावनात्मक लड़ाई
समारोह की दूसरी प्रस्तुति में प्रसिद्व नृत्यकार पाश्र्वनाथ उपाध्याय ने भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें रामायण का वर्णन किया गया। नृत्य में सीता का अवतार लेने वाली देवी लक्ष्मी के दृष्टिकोण से घटनाओं की पड़ताल की। जब श्री राम, सीता और लक्ष्मण 14 वर्षों के लंबे समय के बाद अयोध्या लौटते हैं तो उनके राज्य के लोग उनका तहे दिल से स्वागत करते हैं। जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, राजा राम ने लोगों द्वारा उनकी अवहेलना करने की अफवाहें सुनीं, क्योंकि सीता 4 महीने तक रावण के महल में रहीं। सीता को बिना शर्त प्यार करने वाले राम और राजा के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करने वाले राम के बीच, राजा राम भावनात्मक लड़ाई जीत जाते हैं। जैसे ही लक्ष्मण सीता को वन में ले जाते हैं, वे टूट जाते हैं। सीता क्रोधित और निराश लक्ष्मण को शांत करती हैं और कहती हैं मैं लक्ष्मी हूँ। मुझे कौन छोड़ सकता है। राम अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। अब मैं घर हूं। मत भूलो मैं धरती मां की बेटी हूँ।
माता भवानी की हुई स्तुति
समारोह की तीसरी प्रस्तुति में नृत्यांगना टीना ताम्बे ने कत्थक नृत्य से की जिसमें उन्होंने अपने कथक नृत्य से दर्शकों को मन मोह लिया। उन्होंने तीव्र गति,पद संचालन पर अपनी पहली प्रस्तुति राग अड़ाना और पखावज अंग में कहरवा ताल में माता भवानी की स्तुति की। इसके बाद ताल धमार में परंपरागत कत्थक प्रस्तुति में राग यमन तथा राग तोड़ी में उन्होंने राधा कृष्ण का श्रृंगार रस दिखाया तो वहीं मीरा की कृष्ण भक्ति भाव को कथक की 16 मात्राओं को तीन ताल में जब प्रस्तुत किया तब दर्शक वाह-वाह कह उठे।

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