scriptAngry woman farmer tried to hang her due to non-availability of manure | खाद न मिलने से नाराज महिला किसान ने गोदाम पर फांसी लगाने की कोशिश की, अन्य किसानों ने बचाया | Patrika News

खाद न मिलने से नाराज महिला किसान ने गोदाम पर फांसी लगाने की कोशिश की, अन्य किसानों ने बचाया


सोसायटियों से नहीं मिला किसानों को बीज,205 मीट्रिक टन आई डीएपी, लेकिन नहीं मिलेगा नकद
डीएपी की ज्यादा मांग, स्टॉक बचा केवल 340 मीट्रिक टन, यूरिया की मांग नहीं पर 6330 मीट्रिक टन का भंडार

छतरपुर

Published: October 29, 2021 06:46:13 pm

छतरपुर। डीएपी खाद नहीं मिलने से परेशान एक महिला ने छतरपुर के पन्ना रोड स्थित सरकारी गोदाम में फांसी लगाने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद अन्य किसानों ने महिला को समझा-बुझाकर उसकी जान बचाई। महिला की पहचान चौका गांव निवासी जीरा बाई के रूप में हुई है। पिछले कुछ दिनों से रोज गोदामआ रही हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिली। गुरुवार को परेशान होकर महिला ने अपने बेटे से रस्सी मंगवाकर गोदाम की छत के सहारे फंदा डाल लिया और फांसी लगाने की कोशिश करने लगी। महिला को ऐसा करते देख वहां हड़कंप मच गया और मौके पर मौजूद किसानों ने महिला को फंदे के पास से हटाया और समझाबुझाकर उसे फंासी लगाने से रोका।
दो दिन में दो बोरी डीएपी का दिया आश्वासन
दो दिन में दो बोरी डीएपी का दिया आश्वासन
दो दिन में दो बोरी डीएपी का दिया आश्वासन
जीरा बाई का कहना है कि उसके पास करीब 10 एकड़ जमीन है। वह हर सुबह खाद लेने के लिए कतार में खड़ी रहती थी और उसे हर दिन यह कहकर घर वापस भेज दिया जाता था कि वहां खाद उपलब्ध नहीं है। महिला ने ये भी आरोप लगाया कि सरकारी गोदाम से अवैध रूप से खाद बेची जा रही है। खाद नहीं मिलने के कारण वह पिछले कई दिनों से लाइन में खड़ी थी। वहीं कुछ को आसानी से खाद मिल गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन भी न तो किसानों की सुन रहा है और न ही इस पर कोई कार्रवाई कर रहा है। हंगामें के दौरान गोदाम प्रभारी विशाल शर्मा भी मौके पर पहुंचे और महिला को एक बोरी यूरिया दी और दो दिन में डीएपी आने पर दो बोरी देने का आश्वासन देकर समझाया। हालांकि गोदाम प्रभारी का कहना है महिला पहली बार ही आई थी, जिसने किसान नेता के कहने पर हंगामा किया।
सोसायटियों से नकद खाद न मिलने से बढ़ी परेशानी
इस साल भी किसानों को सोसायटियों से नकद खाद नहीं मिल पा रहा है। पुराना हिसाब चुकता करने पर ही किसानों को सोसायटी से खाद मिल पाएगी। ऐसे में डिफाल्टर किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। वहीं, रबी सीजन के लिए अब सोसायटियों में डीएपी पहुंची है, हालांकि मात्रा के लिहाज से ऊंट के मुंह जीरा साबित हो रही है। छतरपुर जिले की 113 सोसायटियों के लिए 1300 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराई गई, लेकिन उसमें से मात्र 205 मीट्रिक टन डीएपी की स्टॉक है। हालांकि यूरिया 690 मीट्रिक टन है। लेकिन वर्तमान में सबसे ज्यादा डीएपी की मांग होने के वाबजूद जिले में सरकारी, निजी, सोसायटी, मार्कफेड को मिलाकर डीएपी का मात्र 340 मीट्रिक टन स्टॉक बचा है। जबकि यूरिया की मांग कम होने पर भी सभी गोदामों में 6330 मीट्रिक टन यूरिया का भंडार रखा है।
घाटा लगा तो मांग घटाई, लेकिन फिर भी सोसायटियों में नहीं पहुंचा बीज
इधर किसानों को इस बार सोसायटियों से बीज उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। किसानों को खाद बीज उपलब्ध कराने वाली सोसायटियां ही इस बार खाद बीज उपलब्ध कराने में नाकाम हो रही है। जिले के किसानों को पिछले साल 33250 क्विंटल बीज वितरित किया गया था, जिसमें से 7 हजार क्विंटल बीज सोसायटियों से किसानो को दिया गया। लेकिन पिछले साल सोसायटियों को बीज देर से मिलने के चलते सोसायटियों में काफी बीज बच गया, जिससे उन्हें घाटा भी लगा। इसलिए इस बार सोसायटियों के लिए बीज की मांग एक तिहाई कर दी गई और केवल 2400 क्विंटल बीज की मांग भेजी गई, हालांकि अभी भी सोसायटियों को बीज का एक दाना भी नहीं मिला है। ऐसे में छोटे किसान सोसायटियों से उधार बीज-खाद नहीं मिल पाने से से मुसीबत में है। उन्हें नकद में खाद-बीज बाजार से खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है। वहीं, जिला सहकारी बैंक की 113 सोसायटियां अपना मूल काम नहीं कर पा रही हैं।

डीएपी न मिलने पर यूरिया और सुपर फास्फेट के इस्तेमाल की सलाह
एसडीओ कृषि बिजावर व सहायक संचालक डॉ. बीपी सूत्रकार ने किसानों को सलाह दी कि डीएपी न मिलने पर यूरिया और सुपर फास्फेट का उपयोग कर खाद की आवश्यकता की पूर्ति करें। डीएपी में मिलने वाले नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की मात्रा की पूर्ति यूरिया तथा सुपर फास्फेट खाद से हो जाएगी साथ ही सल्फर तत्व भी मिल जाएगा।
फैक्ट फाइल
खाद की मांग- 78200 मीट्रिक टन
डीएपी की मांग-35 हजार मीट्रिक टन
अबतक उपलब्धता- 17 हजार मीट्रिक टन
यूरिया की मांग- 41 हजार मीट्रिक टन
यूरिया की उपलब्धता- 11 हजार मीट्रिक टन
बीज की मांग- 47215 क्विंटल
किसान- 3 .77 लाख
सोसायटियां- 113
इनका कहना है
समितियों का मुख्य काम ही किसानों को खाद बीज उपलब्ध कराना है, लेकिन समितियां उत्पादक नहीं है, एंजेसियों को मांग भेजी जाती है। खाद-बीज मिलने पर किसानों को तुरंत वितरित किया जाता है। उपलब्धता के अनुसार ही समितियां कार्य कर रही हैं।
के एल रायकवार, महाप्रबंधक, जिला सहकारी बैंक

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