अजा-जजा आयोग ने थुराठी कांड पर लिया संज्ञान, एसपी पहुंचे गांव एक घंटे की पड़ताल

- थुराटी गांव में दलित युवक द्वारा दो बच्चों को जहर देकर मारने क बाद आत्महत्या कर लेने का मामला

By: Unnat Pachauri

Published: 07 Jul 2019, 05:00 AM IST

छतरपुर/लवकुशनगर। जिले के लवकुशनगर थाना क्षेत्र के थुराटी गांव में सात माह पहले एक दलित युवक द्वारा दो बच्चों की जहर देकर हत्या करने के बाद खुद आत्महत्या कर लेने के चर्चित मामले में पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेने हुए कलेक्टर छतरपुर को तलब किया है। इस मामले की जांच में एसपी सहित एसडीओपी की संदिग्ध भूमिका और अब तक आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण पुलिस पर आयोग का शिकंजा कसा है। आयोग के सख्त होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। शनिवार को एसपी तिलक सिंह ने थुराटी गांव पहुंचकर सभी पक्षों से चर्चा कर मामले की पड़ताल की। वहीं एसडीओपी कार्यालय पहुंचकर उन्होंने पूरे मामले में तीन घंटे तक पड़ताल की। एसपी अपने साथ इस मामले में आरोपित एसडीओपी लवकुशनगर केसी पाली को नहीं ले गए थे। गौरतलब है कि थुराटी गांव के बलराम अहिरवार की पत्नी के साथ उसके ही भाई ने दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर दी थी। इस मामले में न्याय की उम्मीद लेकर बलराम लगातार एसडीओपी केसी पाली सहित तत्कालीन टीआई के पास बार-बार जाता रहा, लेकिन पुलिस ने उसकी कोई मदद नहीं की। उल्टा उसे एसडीओपी ने डांट-डपटकर भगा दिया था। इससे आहत होकर बलराम ने अपने दोनों मासूम बच्चों को जहर खिलाकर मौत की नींद सुला दिया था और फिर खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के पहले बलराम ने अपने साले से जो बातचीत की थी, उसका ऑडियो वायरल हो जाने के बाद पूरा मामला उजागर हुआ था।
एसडीओपी पाली के खिलाफ जांच ही चलती रही, हुआ कुछ नहीं :
बलराम और उसके बच्चों की मौत के मामले से जुड़ा ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने मामले में गंभीरता तो दिखाई और एसडीओपी के खिलाफ जांच बैठा दी। लेकिन जांच पूरी नहीं हुई। यह मामला जब सुर्खियों में आया तो राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने संज्ञान लिया है और कलेक्टर को पत्र भेजकर मामले की रिपोर्ट तलब की है। इसी के चलते शनिवार को पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह थुराटी गांव पहुंचे और स्थानीय लोगों से बात कर मामले की जानकारी जुटाई। वहीं एडीएम पीएस चौहान ने बताया आयोग द्वारा मामले में संज्ञान लिया गया है और मामले की संपूर्ण जानकारी मांगी गई है जिसको लेकर उन्होंने एसपी को पत्र लिखकर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
बलराम का पूरा परिवार हो गया था खत्म :
ग्राम थुराटी गांप मृतक बलराम अहिरवार दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था। उसके दो बच्चे और पत्नी गांव में रहते थे। 19 सितंबर २०१८ को बेहद रहस्यमय परिस्थितियों में फांसी लगने से बलराम की पत्नी की मौत हो गई थी। उसका शव घर के एक कच्चे कमरे में पाया गया था। बाहर से ताला लगा था। उस समय मृतिका के भाई राजू अहिरवार ने आरोप लगाया था कि उसकी बहन के साथ उसके ही देवर 22 वर्षीय राजेंद्र अहिरवार ने दुष्कर्म किया था। जब बहन ने उसके बारे में पति और परिजनों को बताने की धमकी दी तो उसने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी और फिर बाहर से कमरे का ताला लगाकर भाग गया था। बाद में आरोपी ने खुद गांव के लोगों के सामने पंचायत में अपराध स्वीकार किया था कि उसने शराब के नशे में गलती की है और उसकी माफी मांगी थी। इस मामले की पूरी जानकारी लवकुशनगर एसडीओपी केसी पाली को थी और वही मामले की जांच कर रहे थे। लेकिन पुलिस जांच के नाम पर समय बिताती रही और बलराम पुलिस के चक्कर लगाता रहा। बलराम के साथ २ जनवरी को उसके भाई और पिता ने मारपीट की और इसकी शिकायत करने और आरोपी पर कार्रवाई करने के लिए बलराम एसडीओपी केसी पाली के कार्यालय पहुंचा और बताया कि आरोपी राजेंद्र गांव में है उसे गिरफ्तार कर लें। इस पर एसडीओपी द्वारा बलराम को कार्यालय से भगा दिया गया और दुबारा आने पर थाना में बंद करने की धमकी दी गई। जिससे बलराम आहत हो गया और रात में ही उसने 5 साल की बेटी नीलम और 8 साल के बेटे रंजीत उर्फ इंद्रजीत को जहर दिया और खुद फंदे पर झुलकर आत्महत्या कर ली। सुबह लोगों ने देखा तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई। मौके से पुलिस को पलंग से एक सुसाइड नोट भी मिला था। लेकिन इसे भी पुलिस ने गायब कर दिया था।
इनका कहना है
थुराटी गांव में हुई घटना को लेकर गांव में गया था और वहीं पर मृतक के परिजनों से बात की है। मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
- तिलक सिंह, एसपी, छतरपुर

Unnat Pachauri
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