थम गया एंटी माफिया अभियान, फरवरी में नहीं हुई एक भी कार्रवाई

Dharmendra Singh

Updated: 15 Feb 2020, 06:00:00 AM (IST)

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। प्रदेश में एंटी माफिया अभियान के तहत भले ही कार्रवाई लगातार जारी है। लेकिन छतरपुर जिले में एंटी माफिया अभियान थम गया है। फरवरी माह में अभियान के तहत जिला प्रशासन ने एक भी कार्रवाई नहीं की है। २२ जनवरी को कृषि उपज मंड़ी के गेट और महाराजा कॉलेज के पास सरकारी जमीन में बनाई गई दुकानों को तोडऩे की कार्रवाई के बाद से एक भी कार्रवाई नहीं हुई है। सरकारी जमीनों को अवैधानिक तरीके से निजी लोगों के नाम चढ़ाने और बेचने के मामलों में जमीन को सरकारी घोषित करने के साथ ही एफआइआर के आदेश कोर्ट ने दिए थे। लेकिन हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआइआर के पुराने आदेशों का पालन नहीं किया गया है। इतना ही नहीं पूर्व कलेक्टर राहुल जैन द्वारा वर्ष 2011-12 में सदर बाजार मामले में एफआइआर के आदेश का पालन नहीं किया गया। शहर के किशोर सागर समेत अन्य तालाबों पर अतिक्रमण के मामले में भी कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, एंटी माफिया सेल के समन्वयक अपर कलेक्टर प्रेम सिंह चौहान अब भी यही कह रहे हैं, कि एंटी माफिया अभियान जारी रहेगा। लेकिन कार्रवाई थम जाने से एंटी माफिया अभियान को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
11 कानून तोडऩे पर ढहाया था सदर बाजार, नहीं हुई एफआइआर
बस स्टैण्ड के पास पर होटल जटाशंकर पैलेस के सामने सदरबाजार के प्रोजेक्ट पर काम करने नगर निवेश कार्यालय एवं नगर पालिका परिषद सहित नजूल, पीडब्ल्यूडी, पीएचई, एसडीएम के यहां से आवासीय स्वीकृति लेकर व्यवसायिक रूप में सैकडों दुकानों का निर्माण करवाया गया। खसरा नम्बर में 229, 231, 232, 233, 234, 290,291,293,287,306,307 और 308 में सदर बाजार के प्रोजेक्ट पर आवासीय निर्माण न करके व्यावसायिक निर्माण करने के मामले में नीलेश दुबे की याचिका पर हाईकोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। जिस पर वर्ष 2011-12 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, नजूल, राजस्व समेत 11 कानून का उल्लंघन करने पर तात्कालीन कलेक्टर राहुल जैन ने सदर बाजार को तोडऩे और एफआइआर के आदेश दिए। प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर सदर बाजार को तोड़ दिया गया, लेकिन एफआइआर आज तक नहीं हो पाई है। जबकि कलेक्टर ने एसडीएम, सहायक संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को इस मामले में दंडात्मक व वैधानिक कार्रवाई करने के लिखित आदेश दिए थे। लेकिन अब तक कार्रवाई न होने से गिराए गए सदर बाजार में फिर से निर्माण होने लगा है।
सजा का प्रावधान, फिर भी कार्रवाई नहीं
हाईकोर्ट में गोविन्द शुक्ला द्वारा वर्ष 2011 में लगाई गई जनहित याचिका में बताया गया कि, शहर के राव सागर तालाब, ग्वाल मंगरा तालाब, प्रताप सागर, रानी तलैया, किशोर सागर, सांतरी तलैया, विंध्यवासनी तालाब और हनुमान टौरिया के पीछे वाली तलैया के ग्रीन बेल्ट में मकान बना लिए गए हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में वर्ष 2014 में तात्कालीन कलेक्टर छतरपुर मसूद अख्तर को आदेश देते हुए कहा कि, एक वर्ष के अंदर सभी तालाबों के सीमांकन कराकर, अतिक्रमण के प्रकरण दर्ज किए जाएं। कलेक्टर ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर सभी तालाबों के सीमांकन कराकर तहसील न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराए। हाईकोर्ट के आदेश पर ही तात्कालीन कलेक्टर राहुल जैन ने वर्ष 2012 में तालाबों के सीमांकन कराकार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरु की थी, लेकिन उनके जाने के बाद कार्रवाई ठप हो गई। तहसील कार्यालय व ग्राम एंव नगर निवेश कार्यालय में तालाबों के अतिक्रमण के प्रकरण बनाए गए, लेकिन उन प्रकरणों को आज तक कोर्ट में पेश नहीं किया गया। जबकि नगरपालिका एक्ट 1961 की धारा 339 के अनुसार बिना विभिन्न विभागों की अनुमति लिए निर्माण कराए जाने पर 7 साल साल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा ऐसे अतिक्रमण हटाने के आदेश होने के बाद सहायक संचालक ग्राम एंव नगर निवेश विभाग व तहसीदार द्वारा कार्रवाई न करने पर ग्राम एंव नगर निवेश एक्ट 1973 की धारा 7 में ऐसे अधिकारियो के खिलाफ अभियोजन के प्रावधान हैं, जिसमें 6 माह तक की सजा व 2 हजार रुपए का जुर्माना होता है।
बिजावर नाका की जमीन शासकीय हुई, एफआइआर नहीं
शहर के बगौता पटवारी मौजा के खसरा नबंर 594, 595, 596, 597, 598, 599, 600, 601, 602, 603, 604 और 784 कुल रकबा लगभग 36 एकड़ जमीन, सन 1943-44 के बंदोबस्त के समय शासकीय रिकॉर्ड में मध्यप्रदेश शासन की जमीन दर्ज थी। इस जमीन को तत्कालीन पटवारी ने 1952-53 में अपने और अपने परिजनों के नाम बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर ली। इस मामले में वर्ष 2011 में जनहित याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई। जिस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 2015 में फैसला देते हुए मध्यप्रदेश शासन के नाम भूमि दर्ज करने और अतिक्रमण हटाने और एफआइआर के आदेश दिए। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व छतरपुर ने हाईकोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए इस जमीन को 31 दिसंबर 2019 को शासकीय घोषित कर दिया, 4 जनवरी को प्रशासन ने कब्जा भी ले लिया। लेकिन शासकीय जमीन को खुर्द-बुर्द करने वालों के खिलाफ एफआइआर नहीं कराई गई।
शासन के नाम नहीं चढ़ी भूमि
सटई रोड पर गुलाब मैरिज हाउस से लेकर ग्रीन एवेन्यू कॉलोनी तक शासकीय जमीन खसरा नबंर 1822, रकबा 26 एकड़ 80 डिसीमल जमीन वर्ष 1960-61 में निजी लोगों के नाम चढ़ा दी गई। इसके अलावा मध्यप्रदेश शासन की जमीन खसरा नबंर 1874, रकबा 19 एकड़ में से 10 एकड़ 1955-56 में बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के पटवारी ने निजी लोगों के नाम दर्ज कर दी। खसरा नबंर 1822 के मामले में हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर वर्ष 2004 में फैसला सुनाते हुए अतिक्रमण हटाने और जमीन को शासकीय दर्ज करने के आदेश दिए थे। वहीं खसरा नबंर 1874 को निजी जमीन दर्ज करने के मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका क्रमांक 3386 वर्ष 2009 में लगाई गई थी। जिस पर कोर्ट ने 11 जुलाई 2014 को फैसला सुनाते हुए अतिक्रमण हटाने और जमीन को मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज करने के आदेश दिए। कलेक्टर राहुल जैन ने वर्ष 2012 में एसडीएम केपी माहेश्वरी से जांच कराने के बाद इन जमीनों को शासकीय घोषित करने के आदेश दिए थे, लेकिन ये जमीन अभी निजी लोगों के नाम चढ़ी हुई है।

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