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छतरपुर

आचार संहिता खत्म होते ही छतरपुर को नगर निगर बनाने की कवायद होगी तेज

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी घोषणा सबसे पहले की थी। हालांकि उसके बाद शासन की ओर से कोई प्रक्रिया नहीं हुई। लेकिन अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव छतरपुर को नगर निगम बनाने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में आचार संहिता के बाद निगम बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

छतरपुरJun 03, 2024 / 10:32 am

Dharmendra Singh

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नगरपालिका छतरपुर

छतरपुर. लोकसभा आचार संहिता इसी सप्ताह खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही छतरपुर नगर पालिका को नगरनिगम बनाने की कवायद भी तेज हो जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी घोषणा सबसे पहले की थी। हालांकि उसके बाद शासन की ओर से कोई प्रक्रिया नहीं हुई। लेकिन अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव छतरपुर को नगर निगम बनाने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में आचार संहिता के बाद निगम बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। शासन से कलेक्टर को पत्र आएगा, जिसके बाद राजस्व की टीम नगरनिगम सीमा के लिए सर्वे करेगी। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम की सीमाएं तय की जाएंगी।

नगरनिगर बनने से शहरी सरकार की शक्तियों में होगा इजाफा


नगरपालिका के नगरनिगम बनने से छतरपुर नगरीय निकाय के शक्तियां बढ़ जाएगी। नगर निगम शहरी सरकार की तरह काम करती है। निगम बनने के बाद हमारी भूमिका एक सरकार की तरह रहेगी। हमें एमओयू साइन करने का अधिकार रहेगा। उदाहरण के तौर पर जानिए, यदि शहर में सिटी बसों का संचालन करना है, तो इसके लिए निगम खुद सक्षम होगा। अभी नपा में 40 बार्ड हैं। निगम बनने पर बाड़ों की संख्या 50 से 60 हो सकती है। नए बड़ों का परिसीमन होगा। इससे शहर से सटे कई गांव शहर में सम्मिलित किए जाएंगे। निगम के कर्मचारियों का अलग कैडर होता है। उनका तबादला निकायों में नहीं होता है। वे निगम के कर्मचारी ही होते हैं।

बजट बढऩे से विकास कार्यो की रफ्तार बढ़ेगी


सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री एलएल तिवारी बताते हैं कि नगर निगम बनने से शहर में विकास कार्यों में बजट की रुकावट नहीं आएगी। मसलन छत्तरपुर नगर पालिका का फिलहाल 290 करोड़ का बजट है, निगम बनने पर यह बढक़र 900 करोड़ तक पहुंच जाएगा। निगम बनाने के लिए तोन लाख की आबादी होना अनिवार्य है। 2011 की जनगणना में शहर की आबादी एक लाख 48 हजार थी वर्तमान में आबादी बढक़र दो लाख से अधिक हो चुकी है।

11 सदस्यीय काउंसिल होगी


नगर पालिका में अध्यक्ष का निर्वाचन होता है, जबकि नगर निगम में महापौर। यदि सब कुछ ठीक रहा ते अगली बार शहर की जनता महापौर को चुनेगी। अध्यक्ष का चयन निर्वाचित पार्षद करेंगे। नगर निगम में प्राशासनिक भूमिका में आयुक्त रहेगा। आयुक्त आईएएस को बनाया जाता है। महापौर का अपना मंत्रिमंडल होता है। इसमें वह खुद सभापति होते हैं, जबकि मेयर इन काउंसिल में अधिकतम 11 सदस्यों को शामिल किया जा सकता है, जिन्हें विभिन समितियों का प्रभारी बनाया जाता है। आबादी बढ़ाने दो दर्जन गांव शहर में होंगे शामिल नगर निगम में शहर से सटे गांवों को शहर में शामिल किया जएगा। इससे न सिर्फ गांव का तेजी विकास हो सकेगा, बल्कि वह शहरी परिवेश में आने लगेंगे।

इनका कहना है


छतरपुर नगरपालिका को नगर निगम बनाया जाना है। नगर निगम बनाने के संबंध में शासन से पत्र आने पर ही आगे की प्रक्रिया नियमानुसार की जाएगी।
माधुरी शर्मा, सीएमओ, छतरपुर

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