एटी-केटी आने से दुखी छात्राएं न्यायाधीशों के सामने बिलख पड़ी

एटी-केटी आने से दुखी छात्राएं न्यायाधीशों के सामने बिलख पड़ी

Neeraj soni | Publish: Aug, 12 2018 12:28:51 PM (IST) Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

शासकीय कॉलेज की छात्राओं को कैमिस्ट्री में आई एटीकेटी

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल विश्व विद्यालय के द्वारा हाल ही में जारी रिजल्ट एक बार फिर विवादों में घिर गया है। पिछले एक सप्ताह से खराब रिजल्ट को लेकर एक तरफ जहां छात्र संगठन लगातार विश्वविद्यालय के खिलाफ धरना-प्रदर्शन और घेराव कर रहे हैं, वहीं कई छात्र-छात्राएं मानसिक अवसाद से जूझ रहे हैं। शनिवार को शासकीय गल्र्स कॉलेज में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में दो महिला न्यायाधीश भी थी। शिविर के दौरान जैसे ही छात्राओं को उनके सवालों और जिज्ञासाओं के बारे में पूछने के लिए कहा गया तो एक साथ कई छात्राएं खड़ी होकर रोने लगी। छात्रा पूनम ने बताया कि उसके कैमिस्ट्री में 42 नंबर है, लेकिन उसकी एटी-केटी लगा दी गई है। अन्य छात्राओं ने भी खड़े होकर अपनी पीड़ा बताई। कुछ छात्राएं रोने तक लगी। इस दौरान कार्यक्रम के प्रभारी वीके प्रजापति ने छात्राओं को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे लगातार यह कहते हुए अपनी बात पर अड़ी रहीं कि यह भी तो उनके साथ अन्याय है। छात्राओं की पीड़ा सुनते ही न्यायाशीधों ने उनकी पूरी बात सुनी और फिर उन्हें भरोसा दिया कि वे शिकायत करें, कानूनी रूप से उन्हें न्याय दिलाया जाएगा। गल्र्स कॉलेज की छात्र संघ अध्यक्ष रक्षा तिवारी ने भी बताया कि इस बार रिजल्ट भी देरी से आया और ऊपर से उन्हें एटी-केटी दे दी गई है। न्यायाधीशों ने कॉलेज प्रबंधन को इस बारे में गंभीरता से कार्रवाई करके विश्वविद्यालय को अवगत कराने का भी सुझाव दिया।
गल्र्स कॉलेज के प्रभारी वीके प्रजापति ने बताया कि इस बार यूनिवर्सिटी ने बीएससी के चौथे सेमेस्टर का रिजल्ट जारी किया है। इसमें अधिकांश बच्चों की कैमिस्ट्री विषय में एटी-केटी दी गई है। यह विवि स्तर का मामला है। फिर भी कॉलेज प्राचार्य के माध्यम से छात्राओं की शिकायत के आधार पर विश्वविद्यालय से पत्राचार किया जा रहा है।
मनमाने ढंग से मार्जन रखकर लगा देते हैं एटी-केटी :
विश्वविद्यालय में पिछले तीन सालों से एटी-केटी लगाने खेल मनमाने ढंग से चल रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी होने वाले रजिल्ट में छात्र-छात्राओं को लगातार एक-दो विषयों में एटी-केटी दी जा रही है, भले ही वे कितने ही होशियार क्यों न हो। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में जहां 33 प्रतिशत अंक का मार्जन एटी-केटी के लिए रखा गया है, लेकिन महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय में मनमाने ढंग से एटी-केटी के लिए मार्जन तय किए जा रहे हैं। पूर्व छात्र जेके आशु ने बताया कि एलएलएम करने के दौरान उनके साथ भी यही हुआ था। उन्हें दो विषय में एटी-केटी दे दी गई थी। इस पर उन्होंने आपत्ति लेते हुए विश्वविद्यालय में शिकायत की। इस पर उन्होंंने बताया गया था कि बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के अनुसार यहां पर मार्जन तय किया गया है। इसके बाद जब उन्होंने नियम पता किया और शिकायत की, तब कहीं उन्हेंं लाभ मिल पाया और वे एटी-केटी के चक्कर से बच पाए।
विवि में कमाई का स्त्रोत बना एटी-केटी :
महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय में एटी-केटी अब कमाई का बड़ा जरिया बन गया है। मनमाने ढंग से सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं को एटी-केटी दी जा रही है। बैक लगने के कारण छात्र-छात्राओं को २५० रुपए से लेकर ५०० रुपए तक का शुल्क जमा करके फार्म भरना पड़ता है। विश्वविद्यालय इसी शुल्क से लाखों रुपए कमाने की व्यवस्था कर रहा है। इसके अलावा विश्वविद्यालय में इन दिनों दलालों के जरिए एटी-केटी वाले छात्रों को पास कराने के लिए ठेके लिए जा रहे हैं। यहीं कारण है कि महाराजा कॉलेज के जो प्रोफेसर डेढ़ लाख रुपए की सैलरी पर रिटायर हुए थे, वे यहां पर महज १५ हजार रुपए के मासिक वेतन पर बाबूगिरी का काम कर रहे हैं।
रिजल्ट में कोई गड़बड़ी नहीं, सब नियम से हुआ है :
-विश्वविद्यालय से रिजल्ट सही जारी हो रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी किसी छात्र-छात्रा के रिजल्ट में गड़बड़ी हुई है तो वह विवि में संपर्क करके नियमानुसार जांच करा सकता है। किसी को जानबूझकर एटी-केटी नहीं दी जाती है। छात्र-छात्राएं जो लिखते हैं, उसी के अनुसार ही उन्हें अंक दिए जाते हैं।
- एसएल सोलंकी, रजिस्ट्रार, विश्वविद्यालय

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