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छतरपुर

प्री-मानसून व मानसून में जलभराव से रहे सावधान, पनपेंगे मच्छर, फाइलेरिया को लेकर रहे अलर्ट

इस रोग की संभावना बारिश के मौसम में बढ़ जाती है। इसलिए अब ज्यादा सावाधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि बारिश में मच्छर के काटने से हाथी पांच यानी फाइलेरिया तेजी से फैलता है।

छतरपुरJun 20, 2024 / 10:55 am

Dharmendra Singh

health

इस तरह का जलभराव मच्छरों को बढ़ा रहा

छतरपुर. जिले में फाइलेरिया के 681 सक्रिय मरीज हैं। हालांकि एक साल में 251 मरीज स्वस्थ भी हुए हैं। पिछले वर्ष 932 मरीज सक्रिय मरीज मिले थे। लेकिन मच्छर से फलेने वाले इस रोग की संभावना बारिश के मौसम में बढ़ जाती है। इसलिए अब ज्यादा सावाधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि बारिश में मच्छर के काटने से हाथी पांच यानी फाइलेरिया तेजी से फैलता है। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति को कटता है, तो वह संक्रमित हो जाता है। जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य मरीज को काटता है फाइलेरिया के विषाणु उसके रक्त के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और संक्रमित कर देते हैं।

संभाग में सबसे ज्यादा मरीज है छतरपुर जिले में


स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक फाइलेरिया बीमारी एवं इसी मच्छर से होने वाली हाइड्रोशील बीमारी के आंकड़ों के आधार पर एक सूची तैयार की गई है। जिसमें प्रदेश के 12 जिलों में सबसे ज्यादा खतरा सामने आया है। इन 12 जिलों में से 6 जिले बुन्देलखण्ड के हैं। जहां इन बीमारियों के सबसे ज्यादा रोगी हैं। छतरपुर में फाइलेरिया बीमारी के 681, टीकमगढ़ में 232, दमोह में 147, दतिया में 187, सागर में 30, पन्ना में 660 मामले हैं। इसका मतलब साफ है कि छतरपुर जिले में सर्वाधिक फाइलेरिया के मरीज मौजूद हैं।

6 साल बाद उभरते हैं लक्षण


सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ डॉ. सोनल ने बताया कि आमतौर पर रूके हुए एवं गंदे पानी में क्यूलेक्स मच्छर के लार्वा पनपते हैं। यह मच्छर जब किसी व्यक्ति को काटता है तो शुरूआती 6 से 8 साल तक फाइलेरिया और हाइड्रोशील बीमारियों का पता ही नहीं लग पाता। लगभग 6 साल बाद इन बीमारियों के लक्षण उभरते हैं लेकिन तब तक यह बीमारी लाइलाज हो जाती है। दवाइयों के जरिए इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है लेकिन जड़ से नष्ट नहीं किया जा सकता। इस बीमारी के कारण पैरों में सूजन, गठान जैसी समस्याएं हो जाती हैं जिससे पैर हाथी पांव के रूप में बदल जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस बीमारी को हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है।

लिम्फैटिक फाइलेरिया के लक्षण

लिम्फैटिक फाइलेरियासिस आमतौर पर एलिफेंटियासिस के रूप में जाना जाता है। एक परजीवी पतले कृमि (फाइलेरियल नेमाटोड) के कारण होता है जो मच्छरों के काटने से मनुष्यों को संक्रमित करता है। कीड़े शरीर में गुणा करते हैं और लिम्फैटिक तंत्र के भीतर रुकावटें पैदा करते हैं। इसके परिणामस्वरूप शरीर के विभिन्न ऊतकों में द्रव संग्रह होता है। यह गंभीर दर्द के साथ बड़े पैमाने पर सूजन की ओर जाता है और इन स्थिर तरल पदार्थों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले अन्य संक्रमणों से बार-बार बुखार का कारण बनता है। लिम्फेडेमा (सूजन) संक्रमित होने के कई सालों बाद होने लगती है। यह रोग हाइड्रोसील और घरघराहट जैसी अन्य स्थितियों के अलावा प्रभावित वयस्कों में विचित्र विकृति और विकलांगता का कारण बनता है। एक हाथी के समान होता है, इसलिए इसका नाम एलिफेंटियासिस है।

इनका कहना है


फाइलेरिया रोधी दवाएं डीईसी, एल्वेंडाजोल और आइवरमेक्टिन का सेवन करें। 2 साल से छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं इन दवाओं का सेवन नहीं कर सकते और 5 साल से छोटे बच्चों को आइवरमेक्टिन गोली नहीं दी जाती है।
डॉ. सोनल, चिकित्सक, सीएमएचओ ऑफिस

फैक्ट फाइल


मरीजों की संख्या ब्लॉक
156- गौरिहार
114- ईशानगर
81 लवकुशनगर
87 छतरपुर शहर
67 राजनगर
47 बड़ामलहरा
49 बकस्वाहा
13- नौगांव

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