मानसून के सक्रिय होते ही हिलोरे मारने लगे बुंदेलखंड के झरने

रनेह फॉल और पॉडव फॉल सहित भीमकुंड, जटाशंकर क्षेत्र में प्रकृति ने किया श्रृंगार

By: Samved Jain

Updated: 20 Jul 2018, 12:47 PM IST

छतरपुर। लंबे इंतजार के बाद बुंदेलखंड के झरने पर्यटकों को लुभाने के लिए तैयार हो गए हैं। पिछले एक सप्ताह की बारिश में ही रनेह वॉटर फॉल और पॉडव फॉल सहित पहाड़ी और बरसाती झरने खिल उठे हैं। केन की वादियों में जहां-तहां बिखरे प्राकृतिक जल प्रपात देखने की इच्छा रखने वालों के लिए यही सही वक्त है। पहाड़ों, जंगलों और हरियाली से आच्छादित यहां की वादियों में पर्यटकों को प्रकृति का मनोहारी चित्रण करीब से देखने मिलेगा। दो बड़े वॉटर फॉल के अलावा पन्ना घाटी के छोटे झरने, भीमकुंड का कंचन जल और जटाशंकर का झरना लोगों के खास आकर्षण का केंद्र है। बारिश के शुरू होते ही लोग इन पर्यटक स्थलों की ओर रुख करने लगे हैं। पिछले 24 घंटे से जिले सहित पूरे बुंदेलखंड में मानसून सक्रिय हुआ है। ऐसे में जिलेभर के दर्शनीय स्थलों की रंगत लौट आई है। खासकर झरने लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहने वाले हैं।


केन की खूबसूरत वादियों में सजता है रनेह वाटरफाल :
बहुत कम लोग इस लुभावनी जगह के बारे में जानते हैं जो खजुराहो की निकटता के लिए लगभग १९ किमी और छतरपुर जिला मुख्यालय से 60 किमी तथा पन्ना के जिला मुख्यालय से 44 किमी दूर है। यह खूबसूरत जल प्रपात केन नदी पर स्थित है, और मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर जिले के अंतर्गत आता है। मध्यप्रदेश में खजुराहो के नजदीक स्थित रनेह वॉटर फाल को देश के पसंदीदा वॉटर फॉल के श्रेष्ठ हॉलीडे अवार्ड-2017 से भी नवाजा गया है। नई दिल्ली में एक समारोह में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को यह अवार्ड देश के जाने-माने ट्रेवल एवं इंफॉर्मेशन पोर्टल हॉलीडे आईक्यू द्वारा दिया गया था। विश्व प्रसिद्ध हेरिटेज खजुराहो से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर रनेह-फॉल स्थित है।

 

खजुराहो के मंदिर जहाँ मानव निमिज़्त शिल्प के अदभुत उदाहरण हैं, वहीं विशाल रनेह-फॉल की बहुरंगी शुद्ध क्रिस्टल ग्रेनाइट, लाइम-स्टोन, काग्लोमरेट, बेसाल्ट तथा डोलोमाइट की परतदार चट्टानों का अप्रतिम सौन्दर्य पर्यटक को अवाक कर देता है। यही कारण है कि इसकी अदभुत छटा को निहारते विदेशी पर्यटक अक्सर रनेह-फॉल की तुलना उत्तरी अमेरिका के सुप्रसिद्ध केन्यन से करते मिल जाएंगे। बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक इस अदभुत प्राकृतिक सौन्दर्य का लुत्फ उठाने प्रतिवर्ष यहाँ आते हैं। बरसात के समय रनेह जल-प्रपात की सुन्दरता देखते ही बनती है।

 

बारिश के दौरान यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ जाती है। पन्ना टाइगर रिजर्व के मुहाने पर स्थित रनेह-फॉल देश के ग्रेन्ड केन्यन के रूप में भी जाना जाता है। केन नदी का यमुना से मिलन खूबसूरत रनेह-फॉल बनाता है। केन नदी के जल-प्रपातों ने 5 किलोमीटर लम्बी और 98 फीट गहरी बुन्देलखण्ड ग्रेनाइट तथा विंध्ययन परतदार चट्टानों से केन्यन का निर्माण किया है। गुलाबी, लाल, ग्रे, हरे रंग की विशाल चट्टानों पर पड़ती डूबते सूर्य की किरणें और इनके बीच में हरित नील आभा लिए पानी पर्यटक को किसी दूसरी ही दुनिया में पहुंचा देती है। यहीं केन घडिय़ाल अभयारण्य भी है। केन नदी के किनारों पर मगर और घडिय़ालों को धूप सेंकते देखा जा सकता है। कुलाँचे भरते हिरण, नील गाय, सांभर, चीतल और रंग-बिरंगी चिडिय़ा पर्यटकों का मन मोह लेती है।


यह है पहुंचने का सुगम मार्ग :
रनेह वॉटर फॉल खजुराहो से १९ किमी की दूरी पर है, इसलिए किसी को खजुराहो हवाई अड्डे पर पहुंचना है जो खजुराहो नगर से केवल 3 किमी दूर है, और कोई भी आकर्षक खजुराहो मंदिरों पर विस्तृत रूप से देखने के बाद रनेह फॉल को देख सकता है। सड़क मार्ग से रनेह फॉल जाने के लिए टैक्सी ही सुगम विकल्प है। ट्रेन द्वारा रनेह फाल पहुंचने के लिए यहां से 22 किमी दूर है। सड़क से एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक गंतव्य होने के नाते खजुराहो में सार्वजनिक और निजी बसों की व्यापक कनेक्टिविटी है, कोई भी निजी टैक्सी या कार किराए पर ले सकता है, जो कि रनेह फॉल तक पहुंचने के लिए किराए पर ले सकता है, वहां कई बस ऑपरेटर हैं जो विभिन्न शहरों से खजुराहो में डीलक्स एसी और गैर एसी बसें हैं।


पांडव फॉल में है कुदरत की खूबसूरत कारीगरी :
छतरपुर-पन्ना रोड पर स्थित पांडव वाटर फॉल इस क्षेत्र में लोकप्रिय झरना है। खजुराहो से निकट होने के कारण, इसे खजुराहो पर्यटक आकर्षण भी माना जाता है। जो लोग मध्य प्रदेश के पानी के झरनों में रुचि रखते हैं, वे पांडव को यात्रा के लिए एक दिलचस्प जगह के रूप में देख सकते हैं। यह खजुराहो से महज २५ किमी दूर स्थित है। यह पन्ना नेशनल पार्क के अंदर स्थित है लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग के बहुत करीब है। मानसून के दौरान भी आसानी से सुलभ है। यह एक बारहमासी झरना है लेकिन बारिश के दिनों में यह पूरे शबाव पर होता है।

 

आसपास बिखरी हरियाली के बीच से झरना शानदार दिखता है। झरने के नीचें कुछ प्राचीन गुफाएं हैं जो पानी के एक बड़े पूल को देखती हैं। झरने की ऊंचाई लगभग 30 मीटर है। हालांकि वे बहुत अधिक नहीं हैं, झील की गहराई 100 फीट तक पहुंच जाती है। केन नदी नदी की एक सहायक नदी से यह झरना तैयार होता है। ऊपर से एक महान छलांग लेते हुए यह सहायक नदी नीचे केन नदी में शामिल हो जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि पौराणिक महाकाव्य प्रसिद्धि महाभारत के पांडव, फॉल्स के पास स्थित पांडव गुफाओं में रहते थे। माना जाता है कि उन्होंने अपने निर्वासन काल या अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र का दौरा किया है। पांडवों और मंदिरों द्वारा देखी गई गुफाओं के अवशेष गिरने के अंत में बने जल पूल के पास देखे जा सकते हैं।


यह है पहुंचने का आसान मार्ग :
पांडव फॉल पन्ना टायरशिप से दूर पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में है। इस पानी के झरन पर जाने के लिए, पर्यटकों को अपना वाहन (टैक्सी कैब या व्यक्तिगत वाहन) रखने का सुझाव दिया जाता है। यह छतरपुर से केवल 40 किमी दूर है और खजुराहो होटल में रहने के दौरान इसकी दूरी २५ किमी है। यह पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंदर स्थित है, इस प्रकार टैक्सी कैब या निजी वाहन का उपयोग करके सड़क विकल्प द्वारा अंतिम यात्रा संभव है। यह उड़ान, ट्रेन और सड़क विकल्पों द्वारा पहुंचा जा सकता है। उड़ान द्वारा पांडव फॉल से निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो से केवल २५ किमी दूर है। यह विश्व धरोहर खजुराहो मंदिरों के नजदीक है। यह स्थान सड़क विकल्प से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह खजुराहो-बंधवगढ़ मार्ग या पन्ना-झांसी मार्ग से थोड़ी सी मोड़ पर है। बस सेवा इस मार्ग पर उपलब्ध है। लेकिन सड़क से वास्तविक झरने की साइट तक वाहन की आवश्यकता होती है। इसके आस-पास के शहर पन्ना, खजुराहो, छतरपुर, सतना इत्यादि हैं।

Samved Jain
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned