वीरांगना दुर्गावती की भूमि पर किसने सुनाई छत्रसाल की गौरव गाथा, जानिए देश प्रेम का रंग

संस्कारधानी में गरजे महाबली छत्रसाल

By: Samved Jain

Published: 13 Mar 2018, 11:06 AM IST

छतरपुर। महाराज छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान के तत्वावधान में छतरपुर के कलाकारों द्वारा बुन्देल केसरी महाबली छत्रसाल के जीवन चरित्र पर आधारित नाटक का मंचन देश की राजधानी और फिर संस्कारधानी में भी सम्पन्न हुआ। जबलपुर में पूर्व छात्र परिषद द्वारा मानस भवन में आयोजित इस मंचन के दौरान नगर की गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं जिन्होंने मुक्तकंठ से नाटक की सराहना की। नाट्य मंचन के पूर्व एक वृत्तचित्र के माध्यम से शोध संस्थान के कार्यों और महाराजा छत्रसाल की जीवनी प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में अतिथियों के तौर पर डॉ. श्यामदेवाचार्य, मप्र उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता पुरूषेन्द्र कौरव, समाजसेवी डॉ. कैलाश गुप्ता, रादुविवि के पूर्व कुलपति डॉ. सुरेश्वर शर्मा, मप्र लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विपिन बिहारी, जेएनके विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रदीप बिसेन, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति आरएस शर्मा मौजूद रहे। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में डॉ. श्यामदेवाचार्य ने महाराजा छत्रसाल के लिए कहा कि जो चरित्रवान हो, स्वाभिमानी हो, देश की संस्कृति एवं अखण्डता की रक्षा हेतु खुद की आहुति दे दे, वही वास्तविक नायक है।
कलाकारों के संवाद और वेशभूषा बनी आकर्षण का केन्द्र -
मानस भवन में आयोजित नाट्य मंचन में छतरपुर के कलाकारों ने बुन्देली बोली के संवादों से दर्शकों को खूब लुभाया। महाराजा छत्रसाल के ओज भरे बुन्देली संवादों ने लोगों को बार-बार तालियां बजाने पर मजबूर किया। वहीं वस्त्रविन्यास और वेशभूषा की तारीफ यहां पर मौजूद दर्शकों ने बार-बार की। गौरतलब है कि महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान के तत्वावधान में इस नाटक का यह सातवां सफल मंचन है।
प्रतिमा के अनावरण का किया आव्हान :
शोध संस्थान के अध्यक्ष भगवत अग्रवाल और सचिव राकेश शुक्ला राधे ने मंच से दर्शकों को जानकारी देते हुए बताया कि विद्या भारती के डॉ. पवन तिवारी की प्रेरणा से छतरपुर के मऊसहानियां में महाराजा छत्रसाल की 52 फिट ऊंची भव्य प्रतिमा का निर्माण जन-जन के सहयोग से कराया गया है जिसका अनावरण 21 मार्च को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहनराव भागवत द्वारा किया जाएगा। बुन्देल केसरी महाराजा छत्रसाल को देश के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने के उद्देश्य से शोध संस्थान द्वारा पिछले दो वर्षों से लगातार कार्य किया जा रहा है। इस दौरान साहित्यिक, सांस्कृतिक गतिविधियों, रैली, जन जागरण, प्रतियोगी परीक्षाएं और नाट्य मंचन के माध्यम से लोगों को उनके गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी पहुंचाई गई। इतना ही नहीं संस्थान के प्रयासों से महाराजा छत्रसाल की जीवनी को मप्र पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा पाठ्यक्रम में स्थान भी दिया गया है। ऐसे महापुरूष की प्रतिमा के अनावरण अवसर पर जबलपुरवासियों से भी शामिल होने की अपील की गई है।
इनकी रही अहम भूमिका :
नीरज खरे एवं शिवेन्द्र शुक्ला द्वारा लिखित इस नाटक के प्रमुख किरदारों में छत्रसाल की भूमिका में अंकुर यादव, बाल छत्रसाल जयदित्य प्रताप, औरंगजेब देवेन्द्र कुशवाहा, प्राणनाथ वीरेन्द्र खरे अकेला, शिवाजी और बाजीराव की भूमिका में राहुल नामदेव ने अपनी अभिनय प्रतिभा से नाटक में रोमांच भर दिया। तो वहीं अन्य भूमिकाओं में रामकृपाल यादव, सर्वेश खरे, सुभाष अहिरवार, प्रांजल पटैरिया, अभिदीप सुहाने, नवदीप पाटकार, सौरभ सोनी, उपासना तोमर, कल्पना भास्कर, सीताराम अहिरवार, मुकेश रजक, रवि अहिरवार, विकास चौबे, सिद्धार्थ शुक्ला प्रमुख रहे। रूप सज्जा अनिरूद्ध मिस्त्री की रही। नाटक का निर्देशन रंगकर्मी एवं शिवेन्द्र शुक्ला ने किया। कार्यक्रम का संचालन सुमित मिश्र एवं राघवेन्द्र शुक्ल एवं आभार कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमित झा ने किया।

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