scriptCaught 5 trucks in Parai, illegal mining resumed in Harai | परेई में रेत से भरे 5 ट्रक पकड़ाए, छतरपुर प्रशासन के लौटते ही हरई में अवैध उत्खनन फिर शुरु | Patrika News

परेई में रेत से भरे 5 ट्रक पकड़ाए, छतरपुर प्रशासन के लौटते ही हरई में अवैध उत्खनन फिर शुरु


नदी के अंदर ही लगाए रेत छानने के बड़े बड़े दो प्लांट, 30 से 40 फीट के बनाए पत्थर (बटलोई) के ढेर
केन नदी की धार के बीच बड़े उद्योग जैसा नजारा, फिर भी कुछ नहीं कर पा रहा छतरपुर प्रशासन

छतरपुर

Published: November 15, 2021 05:58:50 pm

छतरपुर। यूपी के माफिया केन नदी में छतरपुर जिले की सीमा से अवैध उत्खनन कर रहे हैं। खनिज व पुलिस की टीम ने सोमवार की सुबह गौरिहार थाना इलाके के परेई तिराहे पर अवैध रेत से भरे 5 ट्रक पकड़े। ट्रक के जरिए अवैध रेत यूपी ले जाई जा रही थी। वहीं, वंशिया थाना इलाके के हरई से छतरपुर प्रशासन व पुलिस की टीम के लौटते ही दोबारा अवैध उत्खनन शुरु हो गया है। जबकि लवकुशनगर एसडीएम व बांदा के एसडीएम व सीओ की मौजूदगी में यह बात तय हुई थी कि मंगलवार को सीमांकन होने तक किसी भी तरह का उत्खनन बंद रहेगा। लेकिन यूपी के ठेकेदार ने प्रशासन के हटते ही धड्डले से मशीनों से उत्खनन शुरु कर दिया है।
हरई में उतारी आधा दर्जन मशीनें
हरई में उतारी आधा दर्जन मशीनें
हरई में उतारी आधा दर्जन मशीनें
केन नदी में हरई व बिलहरका रेत खदान में आधा दर्जन से अधिक हैवी मशीनें उतारी गई है। नदी में ही रेत छानने के दो प्लांट लगाए गए हैं। नदी से रेत निकालने के लिए नदी की जलधारा तक को कई जगह मोड़ दिया गया है। हरई व बिलहरका रेत खदान का नजारा किसी बड़े उद्योग जैसा है, जहां हैवी मशीनें दिन रात नदी को छलनी कर रही है। नदी में पानी कम ही नजर आ रहा है, बल्कि हैवी मशीनें, ट्रक डंफर ज्यादा नजर आ रहे हैं। नदी से रेत निकालने के संबंध में एनजीटी के मापदंडो का पालन भी कहीं नजर नहीं आ रहा है।
नदी में लगा रहे बटलोई के ढेर
हैवी मशीनों से नदी की तलहटी से बटलोई युक्त रेत निकालकर दो बड़े छन्नों के माध्यम से रेत छानी जा रही है। रेत को ट्रकों-डंफरों के माध्यम से यूपी सप्लाई किया जा रहा है, वही, बचे हुए बटलोई का विशाल ढेर नदीं में ही छोड़ दिया जा रहा है। वंशिया इलाके में हरई रेत खदान और बांदा जिले की बिलहरका रेत खदान की सीमा पर 30 से 40 फीट उंचे और 50 फीट तक चौड़े ढेर लगा दिए हैं। नदी के सीने में 20 से 30 फीट गहरे दर्जनों गड्ढे कर दिए गए हैं। नदी की तलहटी के नीचे से भी माफिया रेत निकाल रहे हैं।
सीमा विवाद के बहाने बढ़ा अवैध उत्खनन
वंशिया थाना इलाके में केन नदी की यूपी व एमपी की सीमा को लेकर दो साल से विवाद चल रहा है। यूपी प्रशासन रेत ठेकेदार को नदी के उस हिस्से में उत्खनन का पट्टा दे देता है, जिसे एमपी प्रशासन अपना हिस्सा बता रहा है। ऐसे में यूपी के ठेकेदार व रेत माफिया पट्टा के बहाने छतरपुर जिले की सीमा में ही हैवी मशीनों से रेत निकालने लगते हैं। एमपी प्रशासन कार्रवाई करता है, तो सीमा विवाद की बात कहकर अवैध उत्खनन पर कार्रवाई नहीं करने दी जाती है।
इसी साल फरवरी में चली थी गोलियां
रेत खदान के सीमा विवाद को लेकर 16 फरवरी 2021 को गोलियां तक चल गई थी। जिसमें बांदा के बिदकी गांव का एक युवक घायल हुआ था। चार पहिया वाहनों में सवार लोगों ने रात में गोलीबारी की थी। दरअसल यूपी के खनिज विभाग ने 26 करोड़ रुपए रायल्टी जमा कराकर मध्यप्रदेश में खदान आवंटित कर दी। छतरपुर की वंशिया पुलिस ने 7 फरवरी 2021 को ठेकेदार की 2 हैवी मशीनें अवैध उत्खनन करते पाए जाने पर जब्त कर ली। लेकिन इस बार अवैध उत्खनन पर छतरपुर प्रशासन कार्रवाई नहीं कर सका है।
एमपी जमीन के आधार पर, यूपी पानी से करना चाहता है बंटवारा
केन नदी पर छतरपुर जिले की ओर बंंिसया थाना की हर्रई रेत खदान है। वहीं, दूसरी ओर बांदा जिले की नरैनी तहसील की बिलहरका खदान है। यूपी के ठेकदार व रेत माफिया छतरपुर जिले की सीमा में घुसकर हर्रई रेत खदान से अवैध रूप से उत्खनन करते हैं। जिसकों लेकर कई बार विवाद हुआ। छतरपुर प्रशासन नदी के बीच से आधा-आधा हिस्सा होने का दावा कर रहा है। जबकि यूपी प्रशासन जलधारा से आधा-आधा हिस्सा होने की बात कह रहा है। छतरपुर प्रशासन का कहना है कि जल धारा परिवर्तित होती रहती है। इसके साथ ही जमीन का सीमांकन जमीन व नक्शे के आधार पर होता है, न कि पानी की धारा के आधार पर।
240 मीटर का है विवाद
केन नदी की हर्रई और यूपी के बिलहरका के बीच 240 मीटर भूमि पर दोनों प्रदेश के अधिकारी अपना-अपना हक जता रहे हैं। नदी में 240 मीटर क्षेत्रफल का विवाद है। नक्शे के मुताबिक जिस एरिया में एमपी का अधिकार है। यूपी के नक्शे में यूपी प्रशासन अपना अधिकार दर्शा रहा है। इसके चलते दो साल में 2 बार बैठकों के वाबजूद सीमांकन नहीं हो सका है। जिला स्तर पर बार बार बैठकों के बाद दोनों जिलो के अधिकारियों ने प्रदेश शासन को प्रतिवेदन भी भेजा, लेकिन समाधान अब तक नहीं हो सका।

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