केन बेतबा लिंक परियोजना के पानी-बिजली के बंटवारे के लिए गठित होगा केन्द्रीय प्राधिकरण

केन्द्रीय व मध्यप्रदेश- उत्तरप्रदेश के जल संसाधन मंत्रियों के बीच हुई वर्चुअल बैठक, जल्द काम शुरु करने पर बनी सहमति
45000 करोड़ की लागत से जल्द शुरु होगा काम, मप्र-उप्र में पानी बंटवारे के विवाद पर अटका गई थी परियोजना

By: Dharmendra Singh

Published: 24 Sep 2020, 07:00 AM IST

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की केन-बेतवा लिंक परियोजना के पानी-बिजली बंटवारे के विवाद को निपटाने के लिए केंद्रीय प्राधिकरण बनाया जाएगा। ये प्राधिकरण दोनों राज्यों के लिए पानी व बिजली के बंटवारे का फैसला करेगा। केंद्र ने दोनों राज्यों की सरकार को दो दिन के अंदर कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए हैं। केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, मध्यप्रदेश के जलसंसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और उत्तरप्रदेश के जलसंसाधन मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह ने मुद्दे को सुलझाने के लिए वर्चुअल बैठक की। बैठक में केन बेतवा लिंक परियोजना के सम्बन्ध में केन्द्रीय जलसंसाधन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि राष्ट्रीय नदी परियोजना के अन्तर्गत केन बेतवा योजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। जिसकी लागत लगभग 45 हजार करोड़ रहेगी जिसका 90 प्रतिशत केन्द्र सरकार बहन करेगी।

2 दिन में दोनों राज्य भेजेंगे कार्ययोजना
बैठक में पूर्व मेें बनाई गई डीपीआर की भी चर्चा की गई। इसके साथ ही मीटिंग में केन बेतवा योजना के सम्बन्ध में केन्द्रीय अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। दोनो राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों को 2 दिन में अपनी कार्य योजना केन्द्र को भेजने के लिए कहा गया है। बैठक में परियोजना का काम जल्द शुरु करने को लेकर सहमित बनी है, जिसके बाद कार्य योजना बनाई जा रही है।

ये है केन बेतवा लिंक परियोजना
राष्ट्रीय नदी विकास एजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) द्वारा प्रस्तावित 30 नदी जोड़ो परियोजनाओं में से एक केन-बेतवा नदी जोड़ों परियोजना भी है। जिसमें मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र शामिल है। मध्य प्रदेश में छतरपुर व पन्ना जिलों के सीमा पर केन नदी पर मौजूदा गंगऊ बैराज के अपस्ट्रीम में 2.5 किमी की दूरी पर डोढऩ गांव के पास एक 73.2 मीटर ऊंचा ग्रेटर गंगऊ बांध प्रस्तावित है। 212 किलोमीटर लंबी कंाक्रीटयुक्त नहर के द्वारा केन नदी का पानी उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में बेतवा नदी पर स्थित बरुआ सागर में डाला जाना प्रस्तावित है। नदीजोड़ योजना के कार्य दल के अनुसार केन-बेतवा नदी जोड़ योजना में दो बिजली परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 72 मेगावाट होगी। संपर्क नहर के मार्ग में पडऩे वाले 6.45 लाख हेक्टेयर (1.55 लाख हेक्टेयर उत्तर प्रदेश में एवं 4.90 लाख हेक्टेयर मध्य प्रदेश में) जमीन की सिंचाई के लिए 31960 लाख घन मीटर पानी इस्तेमाल होगा। इससे घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग के लिए 120 लाख घन मीटर पानी प्रदान किया जाएगा।

2008 से चल रही कवायद पड़ी थी ठंडे बस्ते में
परियोजना का खाका 2008 में तैयार किया गया था। लेकिन कुछ मंजूरियों के कारण मामला अटका रहा। फिर वर्ष 2012 में इस परियोजना पर चर्चा शुरू हो गई, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि परियोजना पर समयबद्ध तरीके से अमल किया जाए। वर्ष 2016 में कुछ पर्यावरणीय मंज़ूरियां प्राप्त होने के साथ ही सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना पर अमल करना शुरू किया। केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना के सन्दर्भ में एक अन्य मुख्य आपत्ति थी पन्ना टाइगर रिजर्व के 5500 हेक्टेयर से ज्यादा हिस्से का योजना क्षेत्र में आना। लेकिन नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ ने सशर्त इस पर अपनी सहमति दे दी है। वर्ष 2017 में फिर से परियोजना को लेकर चर्चा शुरु हुई। लेकिन परियोजना से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को पानी बांटने का विवाद फंस गया। परियोजना की समझौता शर्त के मुताबिक उत्तर प्रदेश को रबी सीजन के लिए 700 एमसीएम पानी दिया जाना है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार इस सीजन के लिए 930 एमसीएम पानी की मांग कर दी, जिसके बाद मामला फंस गया था। लेकिन अब पानी बंटवारे के लिए केन्द्रीय प्राधिकरण के गठन से मामले का हल निकलने की संभावना बन गई है।

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