प्राइवेट स्कूलों से आदेश का क्रियान्वयन कराना होगी चुनौती

- मनमर्जी से कोर्स चलाने वाले स्कूलों की मान्यता होगी निरस्त
- अभिभावकों की शिकायतों पर डीईओ ने जारी किए निर्देश, अभिभावकों को राहत

By: Neeraj soni

Published: 10 Apr 2019, 07:00 AM IST

छतरपुर। शहर में स्कूलों की लूट के खिलाफ चल रहे अभिभावकों के अभियान को देखते हुए जिला शिक्षाधिकारी संतोष शर्मा ने सभी स्कूल संचालकों को कड़े निर्देश जारी तो कर दिए हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर उसका क्रियान्वयन एक बड़ी चुनौती है। निर्देशों के मुताबिक अब अभिभावकों और जिला शिक्षाधिकारी से बिना अनुमोदन कराए अपने यहां महंगा और ज्यादा किताबों वाला कोर्स चलाने वाले स्कूलों की न सिर्फ मान्यता खत्म होगी बल्कि उनके विरुद्ध बाल संरक्षण अधिकार एवं मानव अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।
यह आदेश जारी किया है डीईओ ने :
जिला शिक्षाधिकारी संतोष शर्मा ने 8 अप्रैल को निर्देश जारी करते हुए सभी स्कूलों को आगाह किया है कि समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया पर शिकायतें मिल रही है कि छतरपुर के सीबीएससी एवं आईसीएससी से संबंद्ध निजी स्कूल मनमर्जी से अभिभावकों पर महंगा कोर्स थोप रहे हैं। बच्चों को किताबे जल्दी खदीरने के लिए प्रताडि़त किया जा रहा है, जबकि 2 अप्रैल को जिला शिक्षाधिकारी द्वारा आयोजित की गई स्कूल संचालकों की बैठक में यह निर्देश दिए गए थे कि सभी स्कूल संचालक अपने यहां संचालित कोर्स को जिला शिक्षाधिकारी एवं अभिभावकों से अनुमोदित कराएं। जिला शिक्षाधिकारी ने नए निर्देश में कहा कि जिन स्कूलों ने अब तक निर्देशों का पालन नहीं किया है उन्हें दो दिन का समय दिया गया है। दो दिन के भीतर सभी स्कूल अपने स्कूल में संचालित कोर्स एवं बच्चों से ली जा रही फीस की जानकारी का अनुमोदन अ िाभावकों एवं जिला शिक्षाधिकारी से कराएं। निर्देशों का पालन न करने वाले स्कूलों की मान्यता निरस्त की जाएगी। हालांकि अभी तक एक भी स्कूल संचालक डीईओ के यहां अनुमोदन कराने के लिए नहीं पहुंचा है।
यह हैं अभिभावकों की शिकायतें :
छतरपुर के एक सैकड़ा से अधिक अभिभावकों ने एक सप्ताह पहले जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय पहुंच कर शिकायत दर्ज कराई थी कि छतरपुर के अधिकांश निजी स्कूल एनसीआरटी की गाइड लाईन का उल्लघंन करते हुए अपने यहां मनमर्जी से ज्यादा किताबों वाला कोर्स संचालित कर रहे हैं। तीसरे क्लास के बच्चें को पांच हजार रुपये तक की 23 किताबें पढऩे के लिए दी जा रही हैं। स्कूलों का यह रवैया न सिर्फ बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और अभिभावकों की जेब के लिए तकलीफदेह है बल्कि उक्त निजी स्कूल खुलेआम एनसीआरटी के नियमों की धज्जियां भी उड़ा रहे हैं। इस शिकायत के बाद स्कूलों से जिला शिक्षाधिकारी के द्वारा उनकी फीस एवं संचालित कोर्स की जानकारी मांगी गई थी। स्कूलों द्वारा भेजी गई जानकारी में उक्त शिकायतेें सही पाई गई है। अब इन्हीं जानकारियों के आधार पर जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय ऐसे स्कूलों के विरुद्ध कार्यवाही का मन बना रहा है।
अभिभावक अभी न खरीदें किताबें, बच्चों को प्रताडि़त न करें स्कूल :
जिला शिक्षाधिकारी संतोष शर्मा ने जिले के सभी अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी स्कूल के दबाव में एनसीआरटी की गाइड लाईन के विरुद्ध चलाए जा रहे किताबों के भारी भरकम कोर्स को अभी न खरीदें। उन्होंने कहा है कि स्कूल के अनुमोदित कोर्स को ही क्रय करें। उन्होंने स्कूलों को भी पाबंद किया है कि वें बच्चों पर किताबें खरीदने का कोई दबाव न बनाएं। यदि किताबों के लिए बच्चों को प्रताडि़त करने की शिकायतें आई तो स्कूलों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
स्कूल फीस की समीक्षा भी करेगा विभाग :
जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय के द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूल विद्यार्थियों से ले रहे शुल्क का अनुमोदन भी जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय से कराएंगे। स्कूल अपनी मनमर्जी से हर वर्ष फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। यदि स्कूलों ने मनमर्जी से फीस बढ़ाई तो उनके खिलाफ अभिभावकों की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर चला अभियान, किताबे करें दान :
तीन से पांच हजार रुपये कीमत में शिक्षा माफियाओं द्वारा एलकेजी से आठवीं तक की किताबों को विक्रय किया जा रहा है। स्कूल और किताबों के प्रकाशन मनमर्जी से किताबों के दाम तय कर रहे हैं और पचास प्रतिशत तक कमीशन खा कर प्रतिवर्ष लाखों रुपये कमा रहे हैं। शहर के जागरुक नागरिकों ने आम अभिभावकों की जेब पर डाले जा रहे इस डांके के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक मुहिम छेड़ दी है। लोग अपने बच्चों की पुरानी किताबें दान करने के लिए आगे आ रहे है ताकि अभिभावकों को नई किताबें न खरीदनी पड़ें और पेड़ों की कटाई से हो रहे नुकसान को भी बचाया जा सके।

Neeraj soni Reporting
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